


प्रदीप विद्रोही
भागलपुर। अंग प्रदेश की विश्वप्रसिद्ध मंजूषा कला अब केवल दीवारों और चित्रों तक सीमित नहीं रही। बैग, साड़ी, कुर्ता, की-रिंग, रूमाल, ऊनी हस्तशिल्प और पर्यावरण-अनुकूल गोबर बैकग्राउंड पर उकेरी गई कलाकृतियों ने रविवार को भागलपुर संग्रहालय परिसर में आयोजित ‘मंजूषा हटिया’ की तीसरी प्रदर्शनी में हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींचा।

कला एवं संस्कृति विभाग, जिला प्रशासन और भागलपुर संग्रहालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस एकदिवसीय प्रदर्शनी में स्थानीय कलाकारों ने पारंपरिक मंजूषा कला को आधुनिक जीवनशैली से जोड़ने वाले नए प्रयोग प्रस्तुत किए। प्रदर्शनी का उद्देश्य कलाकारों को ऐसा मंच देना है, जहां वे अपनी मौलिक कलाकृतियों का प्रदर्शन करने के साथ सीधे खरीदारों तक पहुँच सकें। इससे कलाकारों को आर्थिक मजबूती मिलने के साथ मंजूषा कला को भी व्यापक बाजार मिल रहा है।
कार्यक्रम का उद्घाटन जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी सह सहायक संग्रहालयाध्यक्ष अंकित रंजन और नगर विधायक रोहित पाण्डेय ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस अवसर पर मंजूषा गुरु मनोज पंडित, अंतरराष्ट्रीय मंजूषा कलाकार उलूपी झा सहित कई वरिष्ठ और युवा कलाकार मौजूद रहे।
अंकित रंजन ने कहा कि ‘मंजूषा हटिया’ अब केवल प्रदर्शनी नहीं, बल्कि अंग प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को सहेजने का सतत अभियान बन चुकी है। उन्होंने कहा कि हर महीने नए कलाकार जुड़ रहे हैं और अपने नवाचारों से इस लोककला को नई पहचान दे रहे हैं।
नगर विधायक रोहित पाण्डेय ने संग्रहालय का भ्रमण कर कलाकारों के कार्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन न सिर्फ मंजूषा कला को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाएंगे, बल्कि स्थानीय कलाकारों के लिए रो
















