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भागलपुर के जीरो माइल स्थित रेशम भवन में सोमवार को पारंपरिक मंजूषा कला को लेकर विशेष गतिविधि देखने को मिली। मेघालय के शिलांग स्थित राष्ट्रीय फैशन प्रौद्योगिकी संस्थान (NIFT) के विद्यार्थी यहां मंजूषा कला की बारीकियों को सीखने और समझने के लिए पहुंचे।

यह कार्यक्रम उपेंद्र महारथी शिल्प अनुसंधान संस्थान द्वारा, वस्त्र मंत्रालय भारत सरकार के डीसी (हैंडलूम/टेक्सटाइल) के सहयोग से संचालित 50 दिवसीय मंजूषा पेंटिंग गुरु-शिष्य प्रशिक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित किया जा रहा है। इसी क्रम में सोमवार को प्रतिभागियों की प्रायोगिक परीक्षा (प्रैक्टिकल एग्जाम) का आयोजन किया गया।

प्रशिक्षक के मार्गदर्शन में हुई परीक्षा
प्रशिक्षक मनोज कुमार पंडित के नेतृत्व में आयोजित इस परीक्षा को अनुकृति कुमारी द्वारा संपन्न कराया गया। प्रतिभागियों ने मंजूषा कला से जुड़ी सैद्धांतिक जानकारी के साथ-साथ अपनी प्रैक्टिकल कॉपियां जमा कीं और परीक्षा में भाग लिया।

निफ्ट छात्रों ने लिया अनुभव
शिलांग निफ्ट के विद्यार्थियों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल होकर मंजूषा कला की बारीकियों को नजदीक से समझा। इस दौरान उन्होंने प्रतिभागियों द्वारा तैयार किए गए वस्त्र, पेंटिंग एवं अन्य कलाकृतियों का अवलोकन किया और इस पारंपरिक कला के विभिन्न पहलुओं को जाना।

प्रतिभागियों में दिखा उत्साह
कार्यक्रम के दौरान सभी प्रतिभागी काफी उत्साहित नजर आए। प्रतिभागियों में सुरभि सुमन, सुप्रिया कुमारी, खुशबू कुमारी, सलेहा कुमारी, शालिनी कुमारी, मानवी कुमारी, नुसरत, नेहा कुमारी, रीना कुमारी, पूनम देवी, विवेक कुमार शाह, तनुजा कुमारी, मोनिका कुमारी, सपना कुमारी, चांदनी कुमारी, कविता देवी, नीलम कुमारी, चांदनी देवी, नूतन भारती, राधा रानी सहित अन्य शामिल रहे।

इस अवसर पर विद्यार्थियों ने कहा कि मंजूषा कला बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर है और इसे सीखना उनके लिए गर्व की बात है। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम न केवल पारंपरिक कला को संरक्षित करने का माध्यम बन रहा है, बल्कि नई पीढ़ी को इससे जोड़ने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण पहल साबित हो रहा है।

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