


@ 13 सेक्टरों में चला औचक अभियान, तीन प्रतिष्ठानों से बच्चों को कराया गया विमुक्त; दोषी नियोजकों पर प्राथमिकी।
प्रदीप विद्रोही
भागलपुर। श्रावणी मेला क्षेत्र में कांवरियों की भीड़ के बीच बाल श्रम के खिलाफ जिला प्रशासन ने भी अपनी निगरानी तेज कर दी है। जिला पदाधिकारी के निर्देश पर गठित धावादल की तीन टीमों ने मेला क्षेत्र के 13 सेक्टरों में एक साथ सघन एवं औचक जांच अभियान चलाया। कार्रवाई के दौरान तीन प्रतिष्ठानों से तीन बाल श्रमिकों को मुक्त कराया गया।

सुलतानगंज से लेकर भागलपुर के विभिन्न मेला क्षेत्रों तक चले इस अभियान में रेलवे स्टेशन परिसर, जहाज घाट, बाबा चौक, कृष्णगढ़ चौक, मसदी, कमरॉय, बुढ़ानाथ विद्यालय के आसपास, नमामि गंगे घाट, सीढ़ी घाट, अजगैबीनाथ मंदिर, शाहाबाद चौक और धांधी बेलारी समेत प्रमुख स्थलों की जांच की गई।
अभियान के दौरान आलोक भोजनालय, न्यू सीढ़ी घाट, सुलतानगंज, मेसर्स सृष्टि भोजनालय, कृष्णगढ़ चौक तथा आकुआ हाउस धर्मशाला से एक-एक बाल श्रमिक को विमुक्त कराया गया। संबंधित नियोजकों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
विमुक्त बच्चों को आवश्यक प्रक्रिया के बाद बाल कल्याण समिति, भागलपुर को सुपुर्द किया गया। प्रत्येक बाल श्रमिक को तत्काल 3,000 रुपये की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई गई। इसके अलावा मुख्यमंत्री राहत कोष से प्रत्येक बच्चे के नाम 25,000 रुपये की सावधि जमा कराने की कार्रवाई भी की जाएगी।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि बाल श्रम कराने वाले नियोजकों पर केवल प्राथमिकी तक कार्रवाई सीमित नहीं रहेगी। एम.सी. मेहता बनाम तमिलनाडु सरकार मामले में पारित आदेश के आलोक में दोषी नियोजकों से 20,000 रुपये की राशि की वसूली की जाएगी। न्यूनतम मजदूरी का भुगतान नहीं किए जाने के मामलों में भी नियमानुसार कार्रवाई होगी।
धावादल ने कांवरिया पथ पर दुकानों और अन्य प्रतिष्ठानों की भी जांच की तथा संचालकों से शपथ-पत्र लिया कि वे किसी भी रूप में बाल श्रमिकों को नियोजित नहीं करेंगे।
जिला प्रशासन एवं श्रम संसाधन एवं प्रवासी श्रमिक कल्याण विभाग ने दुकानदारों, प्रतिष्ठान मालिकों और नियोजकों को स्पष्ट संदेश दिया है कि श्रावणी मेला हो या सामान्य दिन बाल श्रम किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। बाल श्रमिक नियोजित करते पाए जाने पर संबंधित नियोजक के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
















