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नवगछिया के खरीक प्रखंड में स्थित मां भगवती का प्राचीन आस्था केंद्र, नवरात्र में चौबीसों घंटे दुर्गा सप्तशती का पाठ और नवमी-दशमी पर महाहवन की रहती है विशेष तैयारी

नवगछिया। नवरात्र का पर्व आते ही वातावरण मां दुर्गा की भक्ति और आराधना से सराबोर हो जाता है। कहीं मंदिरों में घंटियों की गूंज सुनाई देती है, तो कहीं शंखनाद और मंत्रोच्चार के बीच श्रद्धालु मां के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। इसी भक्तिमय वातावरण के बीच नवगछिया अनुमंडल के खरीक प्रखंड अंतर्गत तुलसीपुर गांव स्थित भगवती स्थान भी श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। यहां नवरात्र के नौ दिनों तक चौबीसों घंटे नवाह पाठ की परंपरा निभाई जाती है। मां के दरबार में धूप, दीप, फूल-माला और पवित्र मन से पूजा-अर्चना की जाती है। इस मंदिर की एक खास बात यह भी है कि यहां बलि प्रथा पूरी तरह निषिद्ध है।

नवरात्रि विशेषांक की इस कड़ी में आज चलिए तुलसीपुर गांव के इसी भगवती स्थान की ओर, जहां मां की आराधना के साथ धार्मिक परंपराओं और सामूहिक भक्ति का सुंदर संगम देखने को मिलता है।

तुलसीपुर चौक से महज दो किलोमीटर की दूरी पर है मां का दरबार

तुलसीपुर भगवती स्थान पहुंचने के लिए तेतरी जीरो माइल से पश्चिम दिशा में जाने वाली सड़क से आगे बढ़ना होता है। तुलसीपुर चौक से गांव की ओर जाने वाली मुख्य सड़क उत्तर दिशा की तरफ है। चौक पर लगने वाले हाट-बाजार के कारण यहां कुछ चहल-पहल रहती है। बाजार की भीड़ को पार कर आगे बढ़ने पर लगभग दो सौ कदम की दूरी पर मां भगवती का मंदिर स्थित है।

मंदिर का मुख्य द्वार पूर्व दिशा की ओर है। गांव में मां भगवती का यही एक मंदिर है, जहां साल के 365 दिन श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है। कोई अपनी मनोकामना लेकर मां के दरबार में पहुंचता है, तो कोई केवल श्रद्धा और भक्ति के भाव से शीश नवाने आता है। नवरात्र के दिनों में मंदिर की रौनक और बढ़ जाती है। पूजा-पाठ, मंत्रोच्चार और भक्ति संगीत से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठता है।

नौ दिनों तक चौबीसों घंटे गूंजता है नवाह पाठ

तुलसीपुर के भगवती स्थान में नवरात्र के दौरान नवाह पाठ का विशेष महत्व है। यहां नौ दिनों तक चौबीसों घंटे नवाह पाठ किया जाता है। दुर्गा सप्तशती के पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच श्रद्धालु मां भगवती की आराधना में लीन रहते हैं।

मंदिर परिसर में पटैत द्वारा दुर्गा सप्तशती का पाठ किया जाता है। वहीं, महिलाओं का समूह भी पूजा-अर्चना में शामिल होकर भक्ति का वातावरण बनाए रखता है। नवरात्र के दौरान बजने वाले भक्ति संगीत और पाठ की ध्वनि गांव के वातावरण को आध्यात्मिक रंग में रंग देती है।

यहां आने वाले श्रद्धालुओं के लिए पूजा केवल एक धार्मिक क्रिया नहीं, बल्कि मां के प्रति अपनी आस्था व्यक्त करने का अवसर भी है। सुबह से लेकर रात तक मंदिर में भक्तों की उपस्थिति इस बात का एहसास कराती है कि मां भगवती के प्रति लोगों की श्रद्धा पूरे वर्ष बनी रहती है।

नवमी और दशमी पर महाहवन की विशेष तैयारी

मां भगवती के दरबार में नवरात्र के अंतिम दिनों की तैयारियां भी विशेष होती हैं। मंदिर के गर्भगृह के सामने नवमी और दशमी के अवसर पर होने वाले महाहवन के लिए बड़े आकार का हवन कुंड बनाया गया है। इसी हवन कुंड में धार्मिक विधि-विधान के अनुसार हवन किया जाता है।

मंदिर परिसर में टाइल्स और मार्बल लगाए गए हैं। फूलों और बेलपत्र से सजा मंदिर के सामने का हिस्सा सुंदर बगीचे जैसा दिखाई देता है। पूजा के दिनों में श्रद्धालुओं की आवाजाही, धार्मिक अनुष्ठान और मंदिर की सजावट मिलकर यहां एक विशेष भक्तिमय वातावरण बनाते हैं।

नवरात्र के दौरान मां की आराधना के लिए पहुंचने वाले भक्तों के लिए यह दरबार श्रद्धा और शांति का केंद्र बना रहता है। यहां की व्यवस्था और पूजा की तैयारियां पर्व के महत्व को और विशेष बना देती हैं।

बिना बलि के होती है मां भगवती की पूजा

तुलसीपुर के भगवती स्थान की सबसे खास परंपराओं में से एक है बलि प्रथा का निषेध। यहां मां को प्रसन्न करने के लिए पशुबलि नहीं दी जाती। श्रद्धालु धूप, दीप, फूल-माला और पवित्र मन से प्रार्थना कर मां की आराधना करते हैं।

यह परंपरा मंदिर की धार्मिक मान्यताओं और पूजा पद्धति की विशिष्ट पहचान है। यहां आने वाले भक्त श्रद्धा के साथ मां के सामने अपनी मनोकामनाएं रखते हैं और परिवार की सुख-शांति तथा कल्याण की कामना करते हैं।

मां भगवती के इस दरबार में नवरात्र के दौरान होने वाली पूजा-अर्चना, दुर्गा सप्तशती का पाठ और महाहवन श्रद्धालुओं को भक्ति से जोड़ते हैं। मंदिर में महिलाओं और अन्य भक्तों की सहभागिता से सामूहिक आराधना का दृश्य और भी सुंदर हो उठता है।

श्रद्धा, परंपरा और सामूहिक भक्ति का संगम है तुलसीपुर भगवती स्थान

तुलसीपुर गांव का भगवती स्थान केवल पूजा-अर्चना का केंद्र नहीं, बल्कि गांव की धार्मिक आस्था से जुड़ा एक महत्वपूर्ण स्थल है। यहां वर्षभर श्रद्धालुओं का पहुंचना और नवरात्र के दौरान चौबीसों घंटे नवाह पाठ की परंपरा निभाया जाना मां के प्रति लोगों की गहरी श्रद्धा को दर्शाता है।

नवरात्र के छठे दिन मां कात्यायनी की आराधना के अवसर पर तुलसीपुर का यह भगवती स्थान श्रद्धालुओं को मां के चरणों में शीश नवाने और भक्ति में लीन होने का अवसर देता है। फूल, धूप, दीप और मंत्रोच्चार के बीच मां की आराधना करते भक्तों के लिए यह दरबार विश्वास और समर्पण का प्रतीक है।

मां भगवती के इस दरबार में श्रद्धालु सच्चे मन से प्रार्थना करते हुए सुख, शांति और परिवार के कल्याण की कामना करते हैं। नवरात्र के पावन अवसर पर तुलसीपुर का यह मंदिर भक्ति, परंपरा और सामूहिक आस्था की सुंदर तस्वीर प्रस्तुत करता है।

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