


पूर्णिया। पूर्णिया के सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने दिल्ली में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के सदस्य (परियोजना) अनिल चौधरी से मुलाकात कर कोसी, सीमांचल और मिथिलांचल क्षेत्र की सड़क एवं राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। सांसद ने इस दौरान क्षेत्र की लंबित सड़क, पुल, फ्लाईओवर, बाईपास और एक्सप्रेसवे परियोजनाओं को लेकर विस्तृत चर्चा की तथा संबंधित समस्याओं के समाधान के लिए ज्ञापन भी सौंपा।

बैठक में सांसद को बताया गया कि सहरसा से पूर्णिया तक के सभी आरओबी और सड़क निर्माण कार्यों को दिसंबर तक पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है। सहरसा-पूर्णिया तथा सहरसा-मधेपुरा कोर्ट सड़क परियोजनाओं को भी दिसंबर की निर्धारित समय-सीमा से आगे नहीं जाने देने की बात कही गई।
सांसद पप्पू यादव ने पटना-पूर्णिया एक्सप्रेसवे की प्रगति का मुद्दा भी उठाया। उन्हें बताया गया कि एक्सप्रेसवे का प्रस्ताव कैबिनेट तक पहुंच चुका है। समस्तीपुर से जुड़े कुछ विवादों और एलाइनमेंट के कारण रुकी प्रक्रिया को स्पष्ट करने की दिशा में कार्रवाई आगे बढ़ रही है। वहीं गेड़ाबाड़ी-कोढ़ा सड़क परियोजना का डीपीआर तैयार हो चुका है। हरदा से पूर्णिया एयरपोर्ट तक सड़क निर्माण के लिए राज्य सरकार ने एनएच की सहमति से निर्णय लिया है।

जीरोमाइल बाईपास और बेलोरी को एक्सप्रेसवे से जोड़ने पर जोर
पूर्णिया के जीरोमाइल बाइपास को लेकर भी बैठक में महत्वपूर्ण सहमति बनी। अररिया की ओर से आने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग और जीरोमाइल पर मिलने वाले बाइपास को सीधे पटना-पूर्णिया एक्सप्रेसवे से जोड़ने की दिशा में कार्रवाई की बात कही गई। इससे जीरोमाइल क्षेत्र में यातायात के बढ़ते दबाव को कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
राजमहल से दिग्घा होते हुए कटिहार तक प्रस्तावित फोरलेन सड़क की पुरानी मांग को भी अंतिम रूप दिए जाने की जानकारी दी गई। इसके लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी होने की बात कही गई। बेलोरी को एक्सप्रेसवे से जोड़ने की मांग को भी मंजूरी मिलने तथा बेलोरी बाइपास को एक्सप्रेसवे से जोड़ने की दिशा में कार्रवाई की जानकारी सामने आई।
इसके अलावा सन्हौली-बारसोई और कटिहार-सन्हौली मार्ग को राजमहल की सड़कों से जोड़ने तथा पटना-पूर्णिया एक्सप्रेसवे को राजमहल-दिग्घा फोरलेन कॉरिडोर से जोड़ने की दिशा में भी सहमति बनी।
थुमहा, जदिया और रानीगंज बाजार में बाईपास की मांग
सांसद ने राष्ट्रीय राजमार्ग-327ई के परसरमा-अररिया खंड के उन्नयन के दौरान सुपौल के थुमहा बाजार, जदिया बाजार और अररिया के रानीगंज बाजार में पर्याप्त भूमि के साथ व्यवस्थित बाईपास निर्माण की मांग प्रमुखता से रखी।
उन्होंने कहा कि ये तीनों क्षेत्र घनी आबादी और व्यापक व्यावसायिक गतिविधियों वाले इलाके हैं। प्रस्तावित राजमार्ग के एक लंबे बाजार क्षेत्र में हजारों लोग रहते हैं तथा 500 से अधिक छोटी-बड़ी दुकानें संचालित होती हैं। यहां हाट और नियमित व्यापारिक गतिविधियां भी होती हैं।
सांसद ने अतिक्रमण तथा सड़क किनारे बालू, गिट्टी, अनाज और अन्य सामग्रियों के अनियंत्रित भंडारण से उत्पन्न जाम और दुर्घटना के खतरे का भी उल्लेख किया। उन्होंने मांग की कि बाजारों के बीच से राष्ट्रीय राजमार्ग ले जाने के बजाय व्यवस्थित बाईपास का प्रावधान सुनिश्चित किया जाए, ताकि स्थानीय लोगों, दुकानदारों और राहगीरों को परेशानी न हो।
बनमनखी को NH-107 से जोड़ने की योजना शीघ्र शुरू करने की मांग
पप्पू यादव ने परसरमा-सुपौल से तरावे चौक, सिंहेश्वर, केवटगामा चौक, खुर्दा और चकमका होते हुए बनमनखी को राष्ट्रीय राजमार्ग-107 से जोड़ने की पूर्व स्वीकृत योजना का काम शीघ्र शुरू कराने का आग्रह किया।
उन्होंने दरभंगा से सुपौल के बीच प्रस्तावित नई फोरलेन सड़क को सुपौल तक सीमित रखने के बजाय परसरमा और गम्हरिया होते हुए मधेपुरा के प्रसिद्ध सिंहेश्वर स्थान से रानीगंज तक विस्तारित करने का सुझाव दिया। उन्होंने इसे एनएच-327ई से जोड़ने की भी मांग रखी।
इसके साथ ही कुशेश्वर स्थान और सहरसा के महिषी स्थित तारा स्थान सूर्य मंदिर को इस कॉरिडोर से जोड़ने तथा भारतमाला परियोजना के अंतर्गत उच्चैठ भगवती स्थान से महिषी तारा स्थान तक उपलब्ध एनएच-527ए नेटवर्क के साथ समन्वय स्थापित करने की मांग की गई।
धार्मिक स्थलों की कनेक्टिविटी बेहतर होने से पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
सांसद ने कहा कि सिंहेश्वर स्थान सहित क्षेत्र के प्रमुख धार्मिक स्थलों की बेहतर सड़क कनेक्टिविटी से पर्यटन को बढ़ावा मिल सकता है। उन्होंने कहा कि सिंहेश्वर स्थान में प्रत्येक सोमवार, सावन और शिवरात्रि के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे में धार्मिक स्थलों को बेहतर सड़क नेटवर्क से जोड़ना क्षेत्र के विकास के लिए महत्वपूर्ण होगा।
उन्होंने इस प्रस्तावित कॉरिडोर के लिए विस्तृत तकनीकी-आर्थिक व्यवहार्यता अध्ययन, नए सरेखण की संभावनाओं की जांच, आवश्यक भूमि अधिग्रहण और डीपीआर की प्रक्रिया प्राथमिकता से शुरू करने की मांग की। साथ ही निर्णय से पहले क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों से परामर्श करने का भी आग्रह किया।
पप्पू यादव ने कहा कि यदि यह कॉरिडोर रानीगंज तक विकसित होता है तो मिथिला, कोसी और सीमांचल के बीच एक मजबूत संपर्क-सेतु तैयार होगा। इससे बाढ़ और सूखे से प्रभावित पिछड़े क्षेत्रों में कृषि, व्यापार, रोजगार और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिल सकती है।
25 साल बाद भी अधूरा NH-131, निर्माण एजेंसी और गुणवत्ता पर सवाल
सांसद ने कोसी-सीमांचल क्षेत्र की महत्वपूर्ण राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना NH-131, पूर्व NH-106, वीरपुर-बिहपुर के करीब 25 वर्षों बाद भी अधूरे रहने का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की।
करीब 130 किलोमीटर लंबे इस मार्ग का शिलान्यास 5 जुलाई 2001 को मधेपुरा के वी.पी. मंडल चौक पर तत्कालीन केंद्रीय मंत्री एवं सांसद स्वर्गीय शरद यादव ने किया था। वास्तविक निर्माण कार्य वर्ष 2016-17 में करीब 675 करोड़ रुपये की लागत से शुरू हुआ था।
सांसद के अनुसार, भूमि अधिग्रहण की बाधाओं और निर्माण एजेंसी की कथित लापरवाही के कारण परियोजना लगातार पिछड़ती रही। वर्ष 2023 तक केवल करीब 55 प्रतिशत कार्य पूरा हो सका था। मार्च 2025 तक शेष कार्य पूरा करने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन यह समय-सीमा भी धरातल पर पूरी नहीं हो सकी।
फुलौत पुल की प्रगति पर भी उठे सवाल
इसी परियोजना के तहत कोसी नदी पर बन रहे करीब 6.930 किलोमीटर लंबे फुलौत पुल, उसके एप्रोच रोड और उदाकिशनगंज से बिहपुर तक लगभग 30 किलोमीटर सड़क वाली करीब 1,478.4 करोड़ रुपये की परियोजना की प्रगति पर भी सांसद ने सवाल उठाए।
यह परियोजना वर्ष 2022 में शुरू हुई थी और वर्ष 2024 तक पूरी होनी थी। समय-सीमा दो बार बढ़ाए जाने के बाद इसे मई 2026 तक पूरा करने की बात कही गई थी। सांसद ने परियोजना की वास्तविक स्थिति और लगातार हो रही देरी को लेकर संबंधित अधिकारियों से जवाबदेही तय करने की मांग की।
मिठाई चौक, बनमनखी और फ्लाईओवरों की स्थिति का मुद्दा
सांसद ने मधेपुरा के मिठाई चौक के पास सड़क निर्माण की स्थिति का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार करीब 200 मीटर हिस्सा आंशिक रूप से तैयार होने के बाद शेष भाग गड्ढों और अधूरे सतहीकरण के साथ पड़ा है।
बनमनखी के निकट भी लंबे समय से निर्माण अधूरा रहने से सड़क की स्थिति दो वर्ष पहले की तुलना में खराब होने की स्थानीय शिकायतों का मुद्दा उठाया गया।
बैजनाथपुर फ्लाईओवर को लेकर सांसद ने कहा कि भारी सरकारी खर्च से निर्मित होने के बावजूद इसे अभी तक यातायात के लिए नहीं खोला गया है। स्थानीय स्तर पर संरचना में दरार और क्षरण दिखाई देने की शिकायतों का उल्लेख करते हुए उन्होंने इसकी स्वतंत्र संरचनात्मक जांच की मांग की।
वहीं पूर्णिया के बनमनखी-मिरगंज-दीनापट्टी क्षेत्र के बलुआहा में निर्माणाधीन फ्लाईओवर का काम भी लंबे समय से अधूरा है। इसके पीछे वन भूमि संबंधी एनओसी अथवा अन्य प्रशासनिक अड़चनों की चर्चा है, लेकिन वास्तविक कारण सार्वजनिक नहीं किया गया है।
सांसद ने मुरलीगंज रेलवे क्रॉसिंग, मिठाई चौक, बनमनखी, बलुआहा और बैजनाथपुर फ्लाईओवर समेत पांच प्रमुख स्थलों की वर्तमान भौतिक प्रगति, देरी के कारण और जिम्मेदार एजेंसी की जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की।
निर्माण एजेंसी और टेंडर प्रक्रिया की जानकारी सार्वजनिक करने की मांग
पप्पू यादव ने NH-107/NH-231 के पूर्णिया-मधेपुरा और महेशखूंट-सहरसा चरणों के टेंडर, NIT प्रक्रिया, निर्माण कंपनी का पूरा नाम और पंजीकरण विवरण भी उपलब्ध कराने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा कि लगातार अधूरे काम, समय-सीमा में विस्तार, गुणवत्ता को लेकर उठ रहे सवाल और भुगतान प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी से सरकारी धन और जनता के हित दोनों प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने मंत्रालय से समयबद्ध उच्चस्तरीय जांच कर दोषी एजेंसी एवं जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई करने तथा सभी लंबित सड़क, पुल और फ्लाईओवर कार्यों को गुणवत्ता मानकों के साथ शीघ्र पूरा कराने की मांग की।
खगड़िया-पूर्णिया-मालदा कॉरिडोर के एकीकृत विकास की मांग
सांसद ने बिहार के खगड़िया, पूर्णिया, कटिहार और सीमावर्ती क्षेत्रों को पश्चिम बंगाल के मालदा से जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग NH-27, NH-231 और NH-131A के एकीकृत एवं समयबद्ध विकास की मांग भी रखी।
उन्होंने कहा कि यह कॉरिडोर बिहार और पश्चिम बंगाल के बीच संपर्क के साथ पूर्वोत्तर भारत के आवागमन, व्यापार, कृषि उत्पादों के परिवहन और सामरिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है।
पप्पू यादव ने खगड़िया-पूर्णिया खंड को चार लेन करने की केंद्र सरकार की स्वीकृति का स्वागत करते हुए NH-231 और NH-131A के कोढ़ा-कटिहार-मालदा खंड को शीघ्र फोरलेन करने की मांग की। साथ ही कोढ़ा क्षेत्र में NH-27, NH-231 और NH-131A के जंक्शन पर आधुनिक इंटरचेंज अथवा बाईपास बनाने तथा पूर्णिया के प्रस्तावित ग्रीनफील्ड बाईपास को निर्धारित समय-सीमा में पूरा कराने की मांग की।
उन्होंने वर्तमान NH-231, पूर्ववर्ती NH-107 की करीब 177 किलोमीटर लंबी महेशखूंट-सहरसा-मधेपुरा-पूर्णिया परियोजना में 25 वर्षों से जारी देरी और कथित अनियमितताओं की जांच की भी मांग की।
करीब 1,400 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली इस परियोजना का शिलान्यास 5 जुलाई 2001 को हुआ था। निर्माण वर्ष 2018 से करीब 90 और 87.9 किलोमीटर के दो चरणों में शुरू किया गया था। परियोजना में 15 पुल, जिनमें दो बड़े पुल, आठ छोटे पुल और पांच रेलवे ओवरब्रिज शामिल हैं, स्वीकृत हैं।
पूर्णिया-मधेपुरा के करीब 87 किलोमीटर खंड को वर्ष 2020 तक पूरा किया जाना था, लेकिन समय-सीमा कई बार बढ़ने के बाद भी कार्य अधूरा है। सांसद ने मुरलीगंज रेलवे क्रॉसिंग समेत विभिन्न स्थानों पर अधूरे कार्य, बैजनाथपुर फ्लाईओवर की गुणवत्ता और परियोजना में संभावित सरकारी राजस्व क्षति की उच्चस्तरीय जांच की मांग की।
सांसद ने कहा कि कोसी, सीमांचल और मिथिलांचल के लिए बेहतर सड़क नेटवर्क केवल आवागमन का माध्यम नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र के व्यापार, कृषि, रोजगार, पर्यटन और आर्थिक विकास से सीधे जुड़ा हुआ है। इसलिए लंबित परियोजनाओं को निर्धारित समय-सीमा में गुणवत्ता के साथ पूरा करना आवश्यक है।
















