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@ चयनित एजेंसी को वर्क ऑर्डर नहीं, 51 वार्डों को 5 पैकेज में बांटकर फिर निकला टेंडर; निगम की मंशा पर विपक्ष और समिति की नजर।शहर की सड़कों और मोहल्लों को रोशन करने के लिए पहले से पूरी हो चुकी टेंडर प्रक्रिया को अचानक रद्द कर निगम प्रशासन ने चौथी बार 5.21 करोड़ रुपये की नई ई-निविदा जारी कर दी है।

प्रदीप विद्रोही
भागलपुर। सुल्तानगंज में खून की होली, नपं कहलगांव में स्ट्रीट लाइट घोटाला से सबक नहीं। इधर कुछ ऐसे ही मसले की चर्चा भागलपुर नगर निगम में आम है। प्राप्त जानकारी के अनुसार भागलपुर नगर निगम की स्ट्रीट लाइट योजना एक बार फिर विवादों के केंद्र में है। शहर की सड़कों और मोहल्लों को रोशन करने के लिए पहले से पूरी हो चुकी टेंडर प्रक्रिया को अचानक रद्द कर निगम प्रशासन ने चौथी बार 5.21 करोड़ रुपये की नई ई-निविदा जारी कर दी है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब तीसरे चरण में एजेंसी का चयन हो चुका था, तो उसे कार्यादेश (वर्क ऑर्डर) देने के बजाय पूरी प्रक्रिया दोबारा शुरू करने की जरूरत क्यों पड़ी?
इस फैसले ने निगम की कार्यशैली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला तब और गर्मा गया, जब सशक्त स्थायी समिति के सदस्यों ने चयनित एजेंसी को वर्क ऑर्डर नहीं दिए जाने का कारण पूछा। इसके बाद निगम ने पुरानी निविदा रद्द कर शहर को पांच जोन में बांटते हुए नया टेंडर जारी कर दिया।
नई योजना के तहत 15वें और छठे वित्त आयोग की राशि से सभी 51 वार्डों में स्ट्रीट लाइट लगाने का दावा किया गया है। निगम के अनुसार, इच्छुक एजेंसियां 16 से 24 जुलाई 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगी। 17 जुलाई को प्री-बिड बैठक होगी और 24 जुलाई को तकनीकी बोली खोली जाएगी।
इस बार शहर को पांच पैकेज में बांटा गया है। पहले पैकेज (वार्ड 1-10) के लिए लगभग 84.90 लाख रुपये, दूसरे (11-20) के लिए 80.62 लाख रुपये, तीसरे (21-30) के लिए 1.14 करोड़ रुपये, चौथे (31-39) के लिए 1.02 करोड़ रुपये और पांचवें (40-51) के लिए 1.39 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
निविदा की शर्तों के मुताबिक, कार्यादेश मिलने के 90 दिनों के भीतर काम पूरा करना अनिवार्य होगा। टेंडर की वैधता 120 दिन और आवेदन शुल्क 10 हजार रुपये रखा गया है।
हालांकि, पूरे घटनाक्रम का सबसे अहम सवाल अब भी अनुत्तरित है—जब चयनित एजेंसी मौजूद थी, तो टेंडर रद्द क्यों किया गया? क्या यह केवल प्रक्रिया में बदलाव है या इसके पीछे कोई बड़ा प्रशासनिक या वित्तीय खेल छिपा है? जब तक नगर निगम इस पर स्पष्ट जवाब नहीं देता, तब तक यह मामला सवालों के घेरे में बना रहेगा।

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