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@ सम्मेलन के दूसरे सत्र में समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले 100 लोगों को ‘अंग गौरव सम्मान’ से सम्मानित किया गया।
प्रदीप विद्रोही

भागलपुर। इतिहास, संस्कृति और विकास की नई इबारत लिखने के उद्देश्य से रविवार को टाउन हॉल में आयोजित ‘अंग शिखर सम्मेलन-2026’ केवल एक सम्मेलन नहीं, बल्कि अंग क्षेत्र के भविष्य का साझा संकल्प बनकर उभरा। अंग मुक्ति दल के तत्वावधान में हुए इस आयोजन में बिहार और झारखंड के 12 जिलों से पहुंचे करीब एक हजार लोगों ने अंग प्रदेश को देश के अग्रणी क्षेत्रों में शामिल करने की रणनीति पर मंथन किया।
सम्मेलन की सबसे खास बात यह रही कि इसमें न कोई मुख्य अतिथि था और न ही पारंपरिक उद्घाटन समारोह। पूरा कार्यक्रम आम अंगवासियों को समर्पित रहा। शिक्षा, स्वास्थ्य, इतिहास, कृषि, उद्योग, साहित्य, पर्यटन, पर्यावरण, खेल, कला और सहकारिता सहित 13 क्षेत्रों के विशेषज्ञों ने अंग के गौरवशाली अतीत, वर्तमान चुनौतियों और भविष्य की संभावनाओं पर अपने विचार रखे।
अंग मुक्ति दल के महासचिव अमित विक्रम ने कहा कि संगठन का उद्देश्य केवल लोगों में विश्वास जगाना नहीं, बल्कि लगातार प्रयास कर अंग क्षेत्र को विकास के शिखर तक पहुंचाना है। उन्होंने बताया कि यह अभियान आगे भी विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से जारी रहेगा।
सम्मेलन के दूसरे सत्र में समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले 100 लोगों को ‘अंग गौरव सम्मान’ से सम्मानित किया गया। हालांकि आयोजन समिति ने इसे केवल सम्मान समारोह नहीं, बल्कि क्षेत्र के विकास की जिम्मेदारी सौंपने का प्रतीक बताया।
अध्यक्ष एके प्रियदर्शी ने कहा, ‘हमने 13 वक्ता नहीं, बल्कि 13 स्थानीय नेतृत्वकर्ता और 100 सम्मानित व्यक्ति नहीं, बल्कि 100 ऐसे सेनापति चुने हैं जो अंग के विकास अभियान को आगे बढ़ाएंगे।’
कार्यक्रम में इतिहासकार, शिक्षाविद, चिकित्सक, साहित्यकार, कृषि विशेषज्ञ, उद्योगपति और सामाजिक कार्यकर्ताओं सहित बड़ी संख्या में बुद्धिजीवियों की भागीदारी रही। मंच संचालन प्रो. देबज्योति मुखर्जी ने किया।
यह सम्मेलन केवल विचार-विमर्श तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अंग क्षेत्र के सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक पुनर्जागरण के लिए सामूहिक नेतृत्व तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा गया।
















