


पूर्णिया जिले में रेशम उद्योग के विकास को नई गति मिलने जा रही है। जिला उद्योग केंद्र के महाप्रबंधक-सह-सहायक उद्योग निदेशक संजीव कुमार ने बताया कि जिले की मिट्टी एवं जलवायु एरी और मलबरी रेशम कीटपालन के लिए अनुकूल है। इसी को देखते हुए सिल्क समग्र-2 योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 1.67 करोड़ रुपये की परियोजना को स्वीकृति मिल गई है।
उन्होंने बताया कि पूर्व में जिले में केंद्र प्रायोजित 10वीं एवं 11वीं सीडीपी योजना तथा मुख्यमंत्री कोशी मलबरी परियोजना के माध्यम से रेशम विकास का कार्य सफलतापूर्वक किया गया था। वर्ष 2008-09 में किसानों ने एरंडी की खेती के साथ एरी रेशम कीटपालन कर बेहतर परिणाम प्राप्त किए थे। पूर्णिया पूर्व, कसबा, बनमनखी, जलालगढ़ और धमदाहा प्रखंडों में रेशम उत्पादन की अच्छी संभावनाएं सामने आई थीं।
महाप्रबंधक ने बताया कि सिल्क समग्र-2 योजना के तहत जिले के 200 से अधिक इच्छुक किसानों का बेसलाइन सर्वे कराया गया। इनमें से कसबा, बनमनखी और धमदाहा प्रखंड के 100 अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग के किसानों का चयन कर उन्हें योजना का लाभ दिया जाएगा।
परियोजना के तहत चयनित किसानों को एरंडी के खाद्य पौधों का वृक्षारोपण, एरी रेशम कीटपालन के लिए आवश्यक उपकरण, कीटनाशक, कीटपालन गृह तथा दो बीजागार गृह की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। प्रत्येक चयनित किसान को अपनी आधा एकड़ भूमि पर एरंडी की खेती कर एरी रेशम कीटपालन करना होगा।

उन्होंने बताया कि योजना की लागत में 65 प्रतिशत राशि केंद्रीय रेशम बोर्ड, 25 प्रतिशत राशि बिहार सरकार तथा 10 प्रतिशत अंशदान लाभार्थी द्वारा वहन किया जाएगा।
संजीव कुमार ने कहा कि इस परियोजना का उद्देश्य पूर्णिया में एरी रेशम कीटपालन को कुटीर उद्योग के रूप में विकसित करना, ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर सृजित करना तथा महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। इससे किसानों की आय बढ़ने के साथ-साथ जिले में रेशम उद्योग को भी नई पहचान मिलेगी।
















