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पूर्णिया (बिहार)। प्रोफेसर और पीएचडी छात्रा से जुड़े वायरल वीडियो मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। विवाद के बीच छात्रा पहली बार सामने आई और पूरे प्रकरण को साजिश करार दिया।

छात्रा ने स्पष्ट कहा कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रही तस्वीरें और वीडियो कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की मदद से एडिट कर भ्रामक तरीके से फैलाए गए हैं, ताकि उसकी छवि खराब की जा सके।

छात्रा ने अपने बयान में प्रोफेसर के साथ अपने संबंधों को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की। उसने कहा कि संबंधित प्रोफेसर उसके लिए अभिभावक समान हैं और उनके साथ सार्वजनिक स्थान पर बैठना या भोजन करना किसी भी तरह से गलत नहीं है। उसने आरोप लगाया कि एक सामान्य तस्वीर को जानबूझकर एडिट कर गलत अर्थों में प्रस्तुत किया गया है।

छात्रा के अनुसार, विवाद की शुरुआत 18 मार्च को विश्वविद्यालय स्थापना दिवस के दौरान हुए हंगामे के विरोध से हुई। उसने बताया कि उसने और विभागाध्यक्ष ने कुछ छात्र नेताओं के खिलाफ आवाज उठाई थी, जिसके बाद से उसे लगातार बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। साथ ही, उसे जान से मारने की धमकियां मिलने का भी आरोप लगाया।

छात्रा ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए दोषियों पर कड़ी कार्रवाई और अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है।

इस घटनाक्रम के बाद शिक्षा जगत और समाज में गुरु-शिष्य संबंधों की गरिमा तथा सोशल मीडिया पर फर्जी और एडिटेड कंटेंट के प्रसार को लेकर बहस तेज हो गई है।

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