


@ श्रावणी मेला के 11वें दिन पूर्व रेलवे ने संभाला तीर्थयात्रियों का रेला; सुल्तानगंज में 1.06 लाख से अधिक यात्रियों की आवाजाही, 68 से ज्यादा स्पेशल ट्रेनों से बढ़ी रफ्तार।सुल्तानगंज में टूटा पिछले साल का आंकड़ा।
प्रदीप विद्रोही
भागलपुर। सावन की आस्था जब चरम पर पहुंची तो रेलवे के स्टेशनों पर भी श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। कोई बाबा बैद्यनाथ की नगरी की ओर बढ़ रहा था तो कोई सुल्तानगंज की उत्तरवाहिनी गंगा से जल लेकर कांवर यात्रा शुरू करने पहुंचा था। इसी आस्था के विशाल प्रवाह को सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से संभालने के लिए पूर्व रेलवे ने श्रावणी मेला के 11वें दिन रेलवे नेटवर्क को पूरी तरह सक्रिय रखा।
9 अगस्त 2026 को एक दिन में 2.8 लाख से अधिक तीर्थयात्रियों की आवाजाही दर्ज की गई। प्रमुख तीर्थस्थलों से जुड़े स्टेशनों पर रेलवे ने न सिर्फ अतिरिक्त ट्रेनों का संचालन किया, बल्कि मेडिकल सहायता, व्हीलचेयर और अतिरिक्त कोच जैसी सुविधाओं के जरिए यात्रियों की जरूरतों का भी ध्यान रखा। पूर्व रेलवे की महाप्रबंधक गीतिका पांडेय के मार्गदर्शन में मेला स्पेशल ट्रेनों और यात्री सुविधाओं की लगातार निगरानी की गई।
सुल्तानगंज में टूटा पिछले साल का आंकड़ा:
इस बार श्रावणी मेले में सुल्तानगंज रेलवे स्टेशन श्रद्धालुओं की आवाजाही के लिहाज से सबसे प्रमुख केंद्रों में रहा। 9 अगस्त को यहां 1,06,640 आवक यात्रियों की संख्या दर्ज की गई। पिछले साल इसी दिन 76,481 यात्री सुल्तानगंज पहुंचे थे। यानी इस वर्ष 39.43 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई।
सुल्तानगंज से गंगाजल लेकर देवघर की ओर निकलने वाले कांवरियों की बड़ी संख्या ने रेलवे के लिए यात्री प्रबंधन की चुनौती बढ़ाई, लेकिन विशेष ट्रेनों और अतिरिक्त कोचों के जरिए भीड़ को नियंत्रित करने की कोशिश की गई।
जहां भीड़ बढ़ी, वहां रेलवे ने बढ़ाई ट्रेनें:
श्रावणी मेले के दौरान यात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए पूर्व रेलवे ने प्रमुख तीर्थस्थल वाले स्टेशनों से बड़ी संख्या में स्पेशल ट्रेनों का संचालन किया।
जसीडीह से 32 विशेष ट्रेनें चलाई गईं, जिनमें कुल 478 कोच शामिल थे। इसके अलावा मौजूदा ट्रेनों में 8 जीएस/एलएस अनारक्षित कोच भी बढ़ाए गए।
देवघर से 18 विशेष ट्रेनें 234 कोचों के साथ संचालित की गईं। बासुकीनाथ से 10 स्पेशल ट्रेनें 120 कोचों के साथ और बैद्यनाथधाम से 6 विशेष ट्रेनें 72 कोचों के साथ चलाई गईं।
सुल्तानगंज में भी यात्रियों की भारी भीड़ को देखते हुए छह जोड़ी विशेष ट्रेनों का संचालन किया गया।
इनमें – 03479/80 – 08 कोच,03233/34 – 16 कोच, 03441/42 – 08 कोच,05027/28 – 16 कोच, 03235/36 – 18 कोच, 05545/46 – 18 कोच शामिल हैं। इसके अलावा 13409/10 में एक अतिरिक्त एलएस कोच लगाया गया।
सिर्फ ट्रेन नहीं, इलाज की भी व्यवस्था:
मेले के दौरान लाखों श्रद्धालुओं के आवागमन के बीच स्वास्थ्य सेवाओं को भी रेलवे ने प्राथमिकता दी। प्रमुख स्टेशनों पर चिकित्सा दल और सहायता केंद्र सक्रिय रहे।एक दिन में – बासुकीनाथ – 632 श्रद्धालु, जसीडीह – 301,देवघर – 189,तारकेश्वर – 145, बैद्यनाथधाम – 90,सुल्तानगंज – 82 श्रद्धालुओं को चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई गई। यानी रेलवे के लिए श्रावणी मेला सिर्फ ट्रेनों की संख्या बढ़ाने का अभियान नहीं रहा, बल्कि स्टेशन पर उतरते ही श्रद्धालुओं की जरूरतों का ख्याल रखने की भी कोशिश की गई।
भीड़ के बीच बुजुर्ग और दिव्यांग श्रद्धालुओं को विशेष परेशानी न हो, इसके लिए व्हीलचेयर सुविधा भी उपलब्ध कराई गई। तारकेश्वर में 8, जसीडीह में 7, देवघर में 1, बासुकीनाथ में 1 और सुल्तानगंज में 1 व्हीलचेयर उपलब्ध कराई गई।
रेलवे के कर्मचारी और चिकित्सा दल प्रमुख स्टेशनों पर लगातार तैनात रहे, ताकि जरूरत पड़ने पर श्रद्धालुओं को तत्काल सहायता मिल सके।
रेलवे बोला – चौबीसों घंटे तैनात हैं टीमें:
पूर्व रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी शिबराम माझि ने कहा कि पवित्र श्रावणी मेला के दौरान आने वाले सभी तीर्थयात्रियों को सुरक्षित, आरामदायक और सुगम यात्रा उपलब्ध कराना पूर्व रेलवे की प्राथमिकता है।
















