


प्रदीप विद्रोही
भागलपुर। रक्षा बंधन महज एक त्योहार नहीं, बल्कि भाई-बहन के उस रिश्ते का उत्सव है, जिसमें प्रेम, विश्वास, अपनापन और जीवनभर साथ निभाने का वादा छिपा होता है। कलाई पर बंधा एक नन्हा-सा रक्षा सूत्र बहन के स्नेह का प्रतीक बन जाता है, तो भाई के लिए वह बहन की खुशियों और सुरक्षा की जिम्मेदारी का संकल्प।
अंग की धरती पर शुभ मुहूर्त के प्रवेश करते ही शुक्रवार को घर-आंगन से लेकर शहर और गांव तक भाई-बहन के प्रेम का अनुपम दृश्य देखने को मिला। बहनों ने भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधा, माथे पर तिलक लगाया, आरती उतारी और अपने हाथों से मिष्ठान खिलाया। इस दौरान सबसे भावुक क्षण वह रहा, जब कई बहनों ने धन-दौलत, गहने-जेवर या रुपये-पैसे के बजाय भाई से सिर्फ आशीर्वाद और जीवनभर प्रेम बनाए रखने का वचन मांगा।
ज्योतिषीय गणना के अनुसार शुभ मुहूर्त में राखी बांधने की परंपरा निभाने के लिए भाई-बहनों को घंटों इंतजार करना पड़ा। कई भाई लंबी रेल यात्रा पूरी कर बहनों के घर पहुंचे, तो कई बहनों ने दूर रह रहे भाइयों तक राखी पहुंचाकर रिश्ते की डोर को मजबूत बनाए रखा।
भागलपुर सांसद अजय मंडल को उनकी दीदी नयन देवी (खिरीडांड-जयखुट) द्वारा भेजी गई राखी को अपनी कलाई पर स्वयं बांधना पड़ा। राखी भले ही बहन के हाथों नहीं बंधी, लेकिन उसके धागे में समाया स्नेह और आशीर्वाद सांसद की कलाई तक पहुंच गया। कहलगांव विधायक ई. शुभानंद मुकेश की तीनों बड़ी दीदियों सुचित्रा, सुदीप्ता नीतू व सुविज्या की राखी समय से पटना पहुंच गई थी। लेकिन विधायक स्वयं बड़ी दीदी के घर पहुंचकर राखी बंधवाया। देर जरूर हुई, लेकिन बहन के स्नेह के आगे समय की दूरी छोटी पड़ गई। तकनीक ने भी इस बार भाई-बहन के रिश्ते में दूरी को आड़े नहीं आने दिया। मुंबई में ड्यूटी में मशगूल भाई विशाल राज को उनकी दो छोटी बहनों शिप्रा और सोनल ने वीडियो कॉल के जरिए राखी बांधी। स्क्रीन के उस पार बहनों की आंखों में स्नेह था और शब्द-शब्द में भाई के लिए प्यार-दुलार। भाई ने भी बहनों को युग-युग जीने का आशीर्वाद दिया। उस पल मोबाइल की स्क्रीन ने हजारों किलोमीटर की दूरी को मानो मिटा दिया।
बिहार, झारखंड और दिल्ली में रह रहीं बहनें शीला, चुन्नी, पिंकी, बॉबी और राखी बताती हैं कि उन्होंने इस बार भी अपने भैया के लिए राखी कोरियर से भेजी। राखी समय पर पहुंची और भाइयों ने उसे अपनी कलाई पर सजा भी लिया। उनके लिए राखी का वह छोटा-सा धागा किसी महंगे उपहार से कम नहीं था।
वहीं शिवानी, पायल, गुड़िया, इलू, कशिश, सुहानी और लाडो के भाई विशाल राज, सावन, उज्जवल और सचिन अपने पारिवारिक व्हाट्सऐप ग्रुप में अब तक राखी नहीं मिलने की शिकायत अपनी प्यारी बहनों से करते नजर आए। भाइयों की शिकायत पर बहनों का मासूम जवाब था – ’15 दिन पहले ही राखी भेज दी थी, फिर भी नहीं मिली तो भाई खुद खरीदकर अपनी कलाई पर रक्षा सूत्र बांध लो।’ शिकायतों के पीछे भी वही अपनापन था, जो इस रिश्ते को दुनिया के तमाम रिश्तों से अलग बनाता है।
इधर बहन सुनयना और प्रेमलता अपने भाई चंदन को राखी बांधने दोपहर बाद भूखी-प्यासी भाई के घर पहुंचीं। शुभ मुहूर्त का इंतजार, लंबी दूरी और रास्ते की थकान सब पीछे छूट गया। सामने था तो बस भाई की कलाई और उस पर अपने हाथों से रक्षा सूत्र बांधने की खुशी।
रक्षा बंधन के इस पावन अवसर पर कहीं बहन ने भाई की कलाई पर राखी बांधी, कहीं डाक और कोरियर ने बहन का प्यार पहुंचाया, तो कहीं मोबाइल की स्क्रीन के जरिए राखी की रस्म पूरी हुई। मगर हर जगह भाव एक ही था – भाई की कलाई पर बंधा धागा और बहन के दिल में उसके लिए अनमोल दुआ। बहरहाल, शहर से गांव तक रक्षा बंधन हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। महंगे उपहारों और भौतिक सुख-सुविधाओं के बीच इस बार भी बहनों की सबसे बड़ी मांग वही रही – ‘भैया, बस हमेशा खुश रहना और मुझे अपना प्यार व आशीर्वाद देते रहना।’

















