5
(2)

@ बाबा बैद्यनाथ की कृपा से घर में गूंजी किलकारी, सुल्तानगंज से गंगाजल लेकर माता-पिता-पुत्र पहुंचे देवघर। कांवड़ पथ पर दिखी आस्था की अनमोल तस्वीर।

प्रदीप विद्रोही

सुल्तानगंज। सावन सिर्फ शिवभक्ति का महीना नहीं, बल्कि उन अनगिनत उम्मीदों और मनोकामनाओं का भी महीना है, जिन्हें लेकर भक्त बाबा बैद्यनाथ के दरबार तक पहुंचते हैं। कांवड़ के हर कदम के साथ कोई मन्नत चलती है तो किसी के मन में बाबा के प्रति कृतज्ञता का भाव होता है। देवघर के कांवड़ पथ पर इन दिनों ऐसी ही एक भावुक कर देने वाली कहानी श्रद्धालुओं के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है।

उत्तर प्रदेश के गाजीपुर निवासी आदित्य वर्मा के लिए इस बार की कांवड़ यात्रा बेहद खास है। चार वर्षों के लंबे इंतजार के बाद जब उनके घर बेटे की किलकारी गूंजी, तो उन्होंने इसे बाबा बैद्यनाथ की कृपा माना। बेटे के जन्म के बाद उन्होंने मन ही मन संकल्प लिया कि अपने लाल को बाबा बैद्यनाथ के दरबार में ले जाकर उनका आशीर्वाद जरूर दिलाएंगे। फिर आया सावन का पावन महीना और पूरा हुआ वह संकल्प।

आदित्य वर्मा अपनी पत्नी के साथ सुल्तानगंज से पवित्र गंगाजल लेकर पैदल कांवड़ यात्रा पर निकल पड़े। लंबा रास्ता, थकान और कठिनाइयां भी उनके कदमों को नहीं रोक सकीं। मन में सिर्फ एक ही भाव था – जिस बाबा की कृपा से घर में खुशियों की किलकारी गूंजी, उसी बाबा के दरबार में अपने बेटे को लेकर पहुंचना है।

कांवड़ यात्रा पूरी कर जब वे बाबाधाम देवघर पहुंचे तो श्रद्धा और भावनाओं का अनोखा संगम देखने को मिला। उन्होंने बाबा बैद्यनाथ का विधिवत जलाभिषेक किया और अपने बेटे को बाबा के चरणों में समर्पित कर उसके सुखद, स्वस्थ और उज्ज्वल भविष्य के लिए आशीर्वाद मांगा।

आदित्य वर्मा कहते हैं कि चार साल के लंबे इंतजार के बाद बाबा बैद्यनाथ की कृपा से उनके घर बेटे की किलकारी गूंजी। ऐसे में बाबाधाम तक की यह यात्रा उनके लिए महज एक धार्मिक यात्रा नहीं है, बल्कि बाबा के प्रति विश्वास, आस्था और कृतज्ञता प्रकट करने का उनका अपना तरीका है।

कांवड़ पथ पर जब पिता अपने नन्हे बेटे को लेकर आगे बढ़ते नजर आए तो यह दृश्य श्रद्धालुओं के लिए भी भावुक कर देने वाला बन गया। किसी के लिए यह एक पिता की आस्था थी, तो किसी के लिए बाबा बैद्यनाथ के दरबार में पूरी हुई मनोकामना की जीवंत तस्वीर।

कहते हैं, आस्था में शक्ति होती है। आदित्य वर्मा की यह यात्रा उसी विश्वास की कहानी कहती है – चार साल का इंतजार, फिर घर में गूंजी किलकारी और उसके बाद बाबा के दरबार तक कृतज्ञता के कदम।

सुल्तानगंज से देवघर तक कांवर में गंगाजल और दिल में विश्वास लेकर चले इस माता – पिता की कहानी सावन की उन अनगिनत कहानियों में शामिल हो गई है, जहां मंजिल सिर्फ बाबाधाम नहीं होती, बल्कि बाबा से जुड़ी कोई पूरी हुई मुराद भी होती है।

Aapko Yah News Kaise Laga.

Click on a star to rate it!

Average rating 5 / 5. Vote count: 2

No votes so far! Be the first to rate this post.

Share: