



भागलपुर। शास्त्रीय नृत्य कथक की समृद्ध परंपरा को जीवंत बनाए रखने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने का कार्य पिछले कई वर्षों से भागलपुर के वरिष्ठ नृत्य गुरु निभाष मोदी कर रहे हैं। वे न केवल बच्चों को कथक नृत्य का प्रशिक्षण दे रहे हैं, बल्कि आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों के लिए निःशुल्क प्रशिक्षण देकर कला साधना को समाज सेवा से भी जोड़ रहे हैं। वर्तमान समय में वे करीब 25 बच्चों को निशुल्क कथक सिखा रहे हैं, जबकि अब तक लगभग हज़ारों बच्चे उनके मार्गदर्शन में प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हैं।

निभाष मोदी द्वारा प्रशिक्षित कई विद्यार्थी आज शिक्षा विभाग में म्यूजिक शिक्षक, कला एवं संस्कृति पदाधिकारी, रेलवे, डिफेंस विभाग सहित विभिन्न सरकारी और निजी क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा का परचम लहरा रहे हैं। यह उनके समर्पित गुरु-शिष्य परंपरा और कठोर प्रशिक्षण का ही परिणाम है।

शास्त्रीय नृत्य कथक को लेकर गुरु निभाष मोदी का मानना है कि:
“कथक सिर्फ नृत्य नहीं, बल्कि एक व्याकरण है। जिस तरह बिना व्याकरण के न तो सही बोला जा सकता है और न लिखा जा सकता है, उसी तरह बिना ताल, लय और गणित के नृत्य शुद्ध नहीं हो सकता।”
वे कहते हैं कि जितना मजबूत नृत्य का व्याकरण और गणित होगा, उतना ही सुंदर नृत्य मंच पर प्रस्तुत होगा।
निभाष मोदी ने यह भी बताया कि वेदों में सामवेद ऐसा वेद है, जिसमें संगीत का विस्तार से वर्णन मिलता है। संगीत और नृत्य हमें न केवल कला में बेहतर बनाते हैं बल्कि जीवन को अनुशासित और संस्कारित भी करते हैं। इसी वजह से वे अपने विद्यार्थियों को सिर्फ नृत्य नहीं, बल्कि उसका शास्त्र, ताल, लय और भाव पक्ष भी गहराई से सिखाते हैं।
निभाष मोदी स्वयं गायन और अभिनय के क्षेत्र में भी उत्कृष्ट कलाकार हैं। उन्होंने जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर के अनेक सांस्कृतिक कार्यक्रमों में अपनी प्रस्तुति देकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है।
उनकी कला साधना और सामाजिक योगदान के लिए उन्हें कई प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा गया है, जिनमें प्रमुख हैं—
शास्त्रीय नृत्य कथक फेलोशिप सम्मान
अंबेडकर–फुले फेलोशिप सम्मान
कला कोविद सम्मान
कलाश्री सम्मान
चक्रवर्ती देवी स्मृति सम्मान
डॉ. चतुर्भुज सम्मान
निभाष मोदी की विशेष शिक्षण शैली से भागलपुर के युवा और बच्चे तेजी से कथक की ओर आकर्षित हो रहे हैं। उनके शिष्यों का कहना है:
“हमारे गुरुजी का कथक सिखाने का तरीका इतना सरल और प्रभावी है कि कम समय में ही हम मंच पर प्रस्तुति देने के योग्य बन जाते हैं।”
एक अभिभावक भावुक होते हुए बताते हैं:
“निभाष मोदी सर की वजह से हमारी बेटी कला के क्षेत्र में आई, आज वह म्यूजिक शिक्षिका है और पूरे परिवार का सहारा बन चुकी है।”
निस्संदेह, निभाष मोदी आज भागलपुर ही नहीं, बल्कि पूरे बिहार में शास्त्रीय नृत्य कथक के प्रेरणास्रोत बन चुके हैं, और उनकी कला समाज में युवा प्रतिभाओं को मार्गदर्शन देने का आदर्श प्रस्तुत कर रही है।
















