


नवगछिया:
विश्व कविता दिवस के अवसर पर दिनांक 21 मार्च 2026 को मदन अहल्या महिला महाविद्यालय, नवगछिया के तत्वावधान में ‘जनमुक्ति और कविता’ विषय पर संगोष्ठी एवं कवि सम्मेलन का आयोजन हाइब्रिड (ऑनलाइन/ऑफलाइन) माध्यम से किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो. चंद्रभानु प्रसाद सिंह ने की। संचालन महाविद्यालय के सह-प्राचार्य डॉ. अमरेंद्र कुमार सिंह ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन आयोजन सचिव डॉ. धर्मेन्द्र दास ने किया। कार्यक्रम की शुरुआत स्नातक छात्रा राजकन्या द्वारा प्रस्तुत मैथिली स्वागत गीत से हुई।
कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. अवधेश रजक ने कहा कि कविता और जनमुक्ति का गहरा संबंध है तथा दोनों को अलग-अलग नहीं देखा जा सकता।
मुख्य वक्ता जनवादी कवि राजेश जोशी ने कहा:
“इतिहास गवाह है कि जब भी कोई बड़ा जनआंदोलन हुआ है, उसने समाज और संस्कृति के साथ-साथ साहित्य को भी प्रभावित किया है। फ्रांसीसी क्रांति के बाद मुक्त छंद की कविता का उद्भव हुआ, वहीं भारत में स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान कविता की भाषा और स्वरूप में बड़ा परिवर्तन देखने को मिला। 1936 से 1956 तक चले प्रगतिवाद आंदोलन ने कविता की विषयवस्तु और शिल्प दोनों में व्यापक बदलाव लाए। जनमुक्ति और कविता का संबंध आज भी उतना ही प्रासंगिक है, क्योंकि कविता जनपक्षधरता के बिना अपने उद्देश्य को पूरा नहीं कर सकती।”
विशिष्ट वक्ता प्रो. भरत प्रसाद ने कहा:
“जनमुक्ति केवल राजनीतिक अधिकारों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक, सांस्कृतिक, भाषिक, लैंगिक और आर्थिक अधिकारों से जुड़ा व्यापक विषय है। विश्व के विभिन्न देशों में हुए जनमुक्ति आंदोलनों का साहित्य पर गहरा प्रभाव पड़ा है। महमूद दरवेश, नाज़िम हिकमत, पाब्लो नेरुदा और ब्रेख्त जैसे कवियों की रचनाएं इसका उदाहरण हैं। जनमुक्ति का स्वप्न आज भी अधूरा है, जिसे जनपक्षधर कविता और राजनीति के समन्वय से ही पूरा किया जा सकता है।”
अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रो. चंद्रभानु प्रसाद सिंह ने कहा:
“सन 1999 से 21 मार्च को विश्व कविता दिवस के रूप में मनाने की परंपरा चली आ रही है। जैसे-जैसे समाज जटिल होता जा रहा है, कविता की जिम्मेदारी भी बढ़ती जा रही है। आज के इस आयोजन से यह स्पष्ट होता है कि समकालीन कविता अपने समय और समाज से गहरा संवाद स्थापित कर रही है, जिससे इसका भविष्य उज्ज्वल दिखाई देता है।”
कार्यक्रम के दूसरे सत्र में आयोजित कवि सम्मेलन में हिन्दी, मैथिली, बज्जिका, अंगिका, मगही और भोजपुरी भाषाओं के कवियों ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं। डॉ. अशोक मेहता, विनिताभ, अभय कुमार, डॉ. निशांत, उपासना झा, अविनाश भारती, अमित मिश्रा, सुबोध मंडल, सुरेश बिंद और मोनालिशा पोद्दार सहित अन्य कवियों ने अपनी कविताओं से श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया।
इस अवसर पर महाविद्यालय के सहायक प्राध्यापक डॉ. राजीव कुमार सिंह, डॉ. विनीता कुमारी, डॉ. नीलू कुमारी, डॉ. ममता झा, डॉ. संतोष कुमार, साहित्य-अध्येता डॉ. अभिषेक कुमार सिन्हा, दुर्गानंद ठाकुर, सियाराम मुखिया, समीर, वेदप्रकाश, दीक्षा मिश्रा सहित बड़ी संख्या में शिक्षक, शोधार्थी एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।













