


पूर्णिया। शहर के लाइन बाजार स्थित मां पंचादेवी हॉस्पिटल के सेमिनार हॉल में आयोजित वनवासी कल्याण आश्रम की बैठक में अनुसूचित जनजाति (ST) के अधिकारों को लेकर महत्वपूर्ण चर्चा की गई। इस अवसर पर प्रसिद्ध सर्जन डॉ. अनिल कुमार गुप्ता ने कहा कि जिस प्रकार संविधान की धारा 341 के तहत अनुसूचित जाति (SC) के अधिकारों की रक्षा का प्रावधान है, उसी तरह अनुसूचित जनजाति के अधिकारों की भी समुचित सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि आजादी की लड़ाई में आदिवासी समाज ने कंधे से कंधा मिलाकर योगदान दिया, लेकिन उन्हें आज भी वह सम्मान और अधिकार नहीं मिल पाए हैं, जिसके वे हकदार हैं। उन्होंने संविधान की धारा 342 में आवश्यक संशोधन कर एसटी समाज के अधिकारों को और सशक्त बनाने की मांग की।
जनजातीय समागम की तैयारियों पर चर्चा
बैठक में आगामी 24 मई को दिल्ली के लालकिला मैदान में प्रस्तावित जनजातीय समागम की तैयारियों पर भी विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। बताया गया कि इस समागम में देशभर से करीब 5 लाख जनजातीय समुदाय के लोगों के शामिल होने की संभावना है, जहां धारा 342 में संशोधन की मांग को सरकार तक पहुंचाया जाएगा।
जनजातीय समाज के योगदान को इतिहास में स्थान देने की जरूरत
बैठक को संबोधित करते हुए उत्तर मध्य क्षेत्र के क्षेत्र संगठन मंत्री प्रफुल्ल अकांत ने कहा कि देश की आजादी में जनजातीय समाज के अनेक महापुरुषों ने अपने प्राणों की आहुति दी, लेकिन इतिहास में उनके योगदान को उचित स्थान नहीं मिला। उन्होंने जनजातीय समाज की पारंपरिक व्यवस्था और सामाजिक संरचना पर भी प्रकाश डाला।
समाज को मुख्यधारा से जोड़ने का आह्वान
जिला संरक्षक डॉ. ए. के. गुप्ता ने जनजातीय समाज के उत्थान के लिए सभी से आगे आने का आह्वान किया और उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया। कार्यक्रम के अंत में जिला अध्यक्ष हरिलाल उरांव ने सभी अतिथियों का आभार प्रकट किया।
गणमान्य लोगों की रही उपस्थिति
इस अवसर पर महंत स्वामी मुरारी दास जी महाराज (ठाकुरबाड़ी), तल्लू बास्की (सदस्य, अनुसूचित जनजाति आयोग, बिहार सरकार), श्याम तापड़िया, अरुण संचेती, नीलम अग्रवाल, आलोक लोहिया, मिथिलेश जी, नीतीश, रेवती कांत ‘मुन्ना’, रितेश जी, विकास सोरेन सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
बैठक में मौजूद सभी सदस्यों ने एक स्वर में जनजातीय समाज के सशक्तीकरण, उनके अधिकारों की रक्षा एवं सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने का संकल्प लिया।













