


नवगछिया के गोपालपुर प्रखंड के तिनटंगा करारी पंचायत स्थित खास महाल ग्राम कचहरी में रविवार को उस समय तनावपूर्ण स्थिति उत्पन्न हो गई, जब रंगरा अंचल के राजस्व कर्मचारी वहां रखे राजस्व संबंधी दस्तावेजों को अपने साथ ले जाने लगे। इसकी जानकारी मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण ग्राम कचहरी पहुंच गए और कार्रवाई का विरोध शुरू कर दिया। विरोध प्रदर्शन के दौरान आक्रोशित ग्रामीणों ने ग्राम कचहरी में ताला जड़ दिया तथा प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
ग्रामीणों का कहना है कि खास महाल क्षेत्र भौगोलिक दृष्टि से गोपालपुर प्रखंड और अंचल क्षेत्र के अंतर्गत आता है, लेकिन यहां के लोगों का हल्का एवं राजस्व संबंधी कार्य रंगरा अंचल से संचालित होता है। वर्षों से ग्राम कचहरी परिसर में ही राजस्व कर्मचारी द्वारा भूमि लगान की रसीद कटाने, दाखिल-खारिज एवं अन्य राजस्व कार्यों का निष्पादन किया जाता रहा है, जिससे स्थानीय लोगों को काफी सुविधा मिलती थी।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि बिना किसी पूर्व सूचना के दस्तावेजों को रंगरा ले जाने की कार्रवाई की जा रही है, जिससे लोगों को भविष्य में राजस्व संबंधी कार्यों के लिए काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि यदि सभी अभिलेख और कार्य रंगरा अंचल कार्यालय से संचालित होंगे तो क्षेत्र के लोगों को अपने छोटे-छोटे कार्यों के लिए भी लगभग 15 किलोमीटर दूर जाना पड़ेगा। इससे समय और धन दोनों की बर्बादी होगी।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की कि खास महाल क्षेत्र से जुड़े राजस्व एवं अन्य सरकारी कार्यों का निष्पादन स्थानीय स्तर पर ही सुनिश्चित किया जाए, ताकि आम लोगों को अनावश्यक परेशानी न उठानी पड़े। उनका कहना था कि क्षेत्र की बड़ी आबादी आर्थिक रूप से कमजोर है और बार-बार दूरस्थ कार्यालयों का चक्कर लगाना उनके लिए संभव नहीं है।
विरोध प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा कि जब तक उनकी मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं की जाती और राजस्व कार्यों के स्थानीय संचालन को लेकर स्पष्ट आश्वासन नहीं दिया जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। ग्रामीणों ने प्रशासन से शीघ्र हस्तक्षेप कर समस्या का समाधान करने की मांग की।
मौके पर सरपंच घनश्याम पासवान, पूर्व सरपंच शंभू यादव, पंचायत समिति सदस्य मनोज रविदास, निर्मल कुमार यादव, चंदन कुमार, चिरंजीवी राय उर्फ पटेल सहित सैकड़ों ग्रामीण उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में स्थानीय स्तर पर राजस्व सेवाएं बहाल रखने की मांग उठाई।
ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन को जनहित को ध्यान में रखते हुए ऐसा समाधान निकालना चाहिए, जिससे लोगों को सरकारी सेवाओं का लाभ उनके क्षेत्र में ही आसानी से मिल सके और उन्हें दूसरे प्रखंड अथवा अंचल कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ें।














