


नामांकन आवेदन शुल्क समाप्त करने की मांग पर अड़े छात्र नेता, छात्र हितों की लड़ाई जारी रखने का किया दावा
पूर्णिया। पूर्णिया विश्वविद्यालय में नामांकन आवेदन शुल्क माफी की मांग को लेकर छात्र नेता एवं पूर्णिया विश्वविद्यालय छात्र संघ अध्यक्ष पीयूष पुजारा का अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल मंगलवार को लगातार चौथे दिन भी जारी रहा। विश्वविद्यालय परिसर में चल रहे इस आंदोलन को लेकर छात्र समुदाय के बीच चर्चा तेज हो गई है, वहीं विभिन्न छात्र संगठनों एवं स्थानीय लोगों का समर्थन भी आंदोलन को मिल रहा है।
छात्र नेता पीयूष पुजारा का आरोप है कि विश्वविद्यालय द्वारा नामांकन प्रक्रिया के दौरान आवेदन शुल्क के रूप में 600 रुपये लिए जा रहे हैं, जो आर्थिक रूप से कमजोर छात्र-छात्राओं पर अतिरिक्त बोझ है। उनका कहना है कि सीमांचल क्षेत्र के बड़ी संख्या में विद्यार्थी आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आते हैं और ऐसे में अधिक शुल्क उनकी उच्च शिक्षा के मार्ग में बाधा बन रहा है।
अनशन स्थल पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए पीयूष पुजारा ने कहा कि उनका आंदोलन किसी व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं, बल्कि हजारों छात्र-छात्राओं के हितों की रक्षा के लिए है। उन्होंने दावा किया कि विश्वविद्यालय प्रशासन चाहे तो नामांकन आवेदन शुल्क में राहत देने या इसे समाप्त करने का निर्णय ले सकता है, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की गई है।
उन्होंने कहा कि बिहार के विभिन्न विश्वविद्यालयों में नामांकन शुल्क की दरों में काफी अंतर देखने को मिलता है। ऐसे में छात्रों के बीच समानता और सुविधा सुनिश्चित करने के लिए शुल्क संरचना की समीक्षा आवश्यक है। उनका आरोप है कि विश्वविद्यालय प्रशासन इस मुद्दे पर स्पष्ट निर्णय लेने के बजाय जिम्मेदारी एक-दूसरे पर डाल रहा है।
पीयूष पुजारा ने कहा कि सीमांचल क्षेत्र में शिक्षा के स्तर को बेहतर बनाने और अधिक से अधिक विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा से जोड़ने के लिए छात्र हित में निर्णय लेना जरूरी है। उन्होंने कहा कि जब तक छात्रों की मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
अनशन स्थल पर विभिन्न छात्र संगठनों के प्रतिनिधियों और समर्थकों ने भी पहुंचकर आंदोलन के प्रति समर्थन व्यक्त किया। छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से शीघ्र संवाद स्थापित कर मामले का समाधान निकालने की मांग की।
वहीं विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से इस संबंध में अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। छात्र समुदाय की निगाहें अब विश्वविद्यालय प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हुई हैं।
प्रमुख मांगें
- नामांकन आवेदन शुल्क में राहत या पूर्ण माफी।
- छात्र हित से जुड़े मुद्दों पर विश्वविद्यालय प्रशासन की सकारात्मक पहल।
- आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों के लिए विशेष व्यवस्था।
- विश्वविद्यालय में छात्र समस्याओं के समाधान हेतु प्रभावी तंत्र की स्थापना।
छात्र नेता ने कहा कि छात्रों के हितों की रक्षा के लिए उनका संघर्ष जारी रहेगा और मांगें पूरी होने तक आंदोलन वापस लेने का कोई सवाल नहीं है।














