


ऑनलाइन आवेदन शुल्क के विरोध में पांचवें दिन भी भूख हड़ताल जारी, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने दिया समर्थन
पूर्णिया । पूर्णिया विश्वविद्यालय में नामांकन के लिए ऑनलाइन आवेदन के दौरान छात्रों से लिए जा रहे 600 रुपये आवेदन शुल्क के विरोध में छात्र नेता पीयूष पुजारा का आमरण अनशन पांचवें दिन भी जारी रहा। छात्रों के इस आंदोलन को अब राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर व्यापक समर्थन मिलने लगा है। बुधवार को कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राजेश कुमार राम अनशन स्थल पहुंचे और आंदोलनकारी छात्रों से मुलाकात कर उनकी मांगों का समर्थन किया।
अनशन स्थल पर पहुंचे कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने छात्र नेता पीयूष पुजारा से पूरे मामले की जानकारी ली और कहा कि शिक्षा प्रत्येक छात्र का मौलिक अधिकार है। आर्थिक कठिनाइयों के कारण किसी भी विद्यार्थी को उच्च शिक्षा से वंचित नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि सीमांचल जैसे आर्थिक रूप से पिछड़े क्षेत्र में छात्रों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालना उचित नहीं है।
राजेश कुमार राम ने कहा कि छात्रों की मांग पूरी तरह न्यायसंगत है और विश्वविद्यालय प्रशासन को इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि पूर्णिया विश्वविद्यालय प्रशासन और कुलपति छात्रों की इस जायज मांग पर सकारात्मक निर्णय नहीं लेते हैं, तो कांग्रेस पार्टी भी छात्रों के संघर्ष में उनके साथ मजबूती से खड़ी होगी और आंदोलन को व्यापक समर्थन देगी।
छात्रहित के मुद्दे पर बढ़ रहा समर्थन
गौरतलब है कि आंदोलन की शुरुआत पूर्णिया विश्वविद्यालय द्वारा नामांकन आवेदन के लिए 600 रुपये शुल्क निर्धारित किए जाने के विरोध में हुई थी। पिछले कई दिनों से विभिन्न छात्र संगठनों, सामाजिक संगठनों एवं जनप्रतिनिधियों द्वारा अनशन स्थल पर पहुंचकर आंदोलन को समर्थन दिया जा रहा है। अब प्रदेश स्तर के नेता के समर्थन से यह आंदोलन और अधिक मजबूत तथा चर्चित हो गया है।
‘मांगें पूरी होने तक जारी रहेगा आंदोलन’
अनशनकारी छात्र नेता पीयूष पुजारा ने कहा कि जब तक विश्वविद्यालय प्रशासन आवेदन शुल्क को वापस लेने तथा नामांकन प्रक्रिया को छात्रहित में सरल और सुलभ बनाने का निर्णय नहीं लेता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय प्रशासन छात्रों की समस्याओं को सुनने के बजाय लगातार नजरअंदाज कर रहा है।
पीयूष पुजारा ने कहा कि सीमांचल क्षेत्र के हजारों छात्र आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आते हैं। ऐसे में 600 रुपये का आवेदन शुल्क उनके लिए बड़ी बाधा बन जाता है। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन से छात्रहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए आवेदन शुल्क को निःशुल्क करने अथवा इसमें व्यापक कटौती करने की मांग की।
छात्रों के मुद्दे पर बढ़ा दबाव
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष के समर्थन के बाद आंदोलन को नई ऊर्जा मिली है। अब छात्रों को उम्मीद है कि विश्वविद्यालय प्रशासन उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करेगा। वहीं आंदोलन के लगातार पांचवें दिन में प्रवेश करने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन पर भी दबाव बढ़ता दिखाई दे रहा है।
छात्रों और समर्थकों ने स्पष्ट कहा है कि जब तक मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक संघर्ष जारी रहेगा। आंदोलन को मिल रहे लगातार समर्थन ने इसे पूर्णिया विश्वविद्यालय के हालिया वर्षों के प्रमुख छात्र आंदोलनों में शामिल कर दिया है।













