


“क्लिक से किताब तक” पुस्तक की पहली प्रति पिता को भेंट कर जताया आभार, गांव में खुशी की लहर
पूर्णिया । पूर्णिया जिले के के.नगर प्रखंड अंतर्गत गोआसी पंचायत के सौसा गांव निवासी युवा लेखक अबू फजल ने अपनी पहली पुस्तक “क्लिक से किताब तक” की प्रथम प्रति अपने पिता मो. इश्तियाक आलम को भेंट कर सम्मान, प्रेम और कृतज्ञता का अनूठा उदाहरण प्रस्तुत किया है। इस भावुक और प्रेरणादायक क्षण ने न केवल परिवार बल्कि पूरे गांव को गौरवान्वित कर दिया है। लेखक की इस उपलब्धि पर ग्रामीणों ने खुशी जताते हुए इसे गांव के लिए गर्व का विषय बताया।
किसी भी लेखक के जीवन में उसकी पहली पुस्तक का प्रकाशित होना एक सपने के साकार होने जैसा होता है। यह केवल शब्दों का संग्रह नहीं, बल्कि वर्षों की मेहनत, संघर्ष, अनुभव और भावनाओं का प्रतिबिंब होता है। युवा लेखक अबू फजल के लिए भी यह अवसर बेहद खास रहा, जब उन्होंने अपनी पहली पुस्तक की पहली प्रति अपने पिता को समर्पित कर उनके त्याग और संघर्ष को नमन किया।
इस अवसर पर लेखक ने कहा कि एक पिता केवल परिवार का मुखिया नहीं होता, बल्कि अपने बच्चों के सपनों की मजबूत नींव भी होता है। वह जीवनभर अपने परिवार और बच्चों के भविष्य को संवारने के लिए संघर्ष करता है तथा हर परिस्थिति में उनका सबसे बड़ा सहारा बनकर खड़ा रहता है।
भावुक होते हुए अबू फजल ने कहा, “आज मेरी पहली पुस्तक पाठकों तक पहुंची है, लेकिन इस उपलब्धि के पीछे मेरे पिता की मेहनत, त्याग, मार्गदर्शन और दुआएं हैं। यदि उन्होंने हर कदम पर मेरा हौसला न बढ़ाया होता, तो शायद मैं इस मुकाम तक नहीं पहुंच पाता। यह पुस्तक उनके प्रति मेरे सम्मान और आभार का एक छोटा-सा प्रयास है।”
पुस्तक की पहली प्रति अपने पिता को सौंपते समय का दृश्य बेहद भावुक रहा। यह केवल एक पुस्तक भेंट करने का अवसर नहीं था, बल्कि एक बेटे द्वारा अपने पिता के संघर्ष, प्रेम और समर्पण को सम्मान देने का विशेष क्षण था। परिवार के सदस्यों की आंखें भी इस दौरान नम हो गईं।
लेखक ने कहा कि जीवन में चाहे कितनी भी बड़ी सफलता क्यों न मिल जाए, माता-पिता का ऋण कभी नहीं चुकाया जा सकता। उन्होंने संकल्प व्यक्त किया कि भविष्य में भी अपने लेखन के माध्यम से समाज, क्षेत्र और देश का नाम रोशन करने का प्रयास जारी रखेंगे।
सौसा गांव के लोगों ने युवा लेखक की सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह गांव के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है। सीमित संसाधनों के बावजूद मेहनत, लगन और दृढ़ संकल्प के बल पर सफलता हासिल की जा सकती है। अबू फजल की उपलब्धि यह साबित करती है कि छोटे गांवों से निकलने वाली प्रतिभाएं भी अपनी मेहनत और रचनात्मकता के दम पर बड़ी पहचान बना सकती हैं।
ग्रामीणों ने कहा कि “क्लिक से किताब तक” केवल एक पुस्तक नहीं, बल्कि युवा पीढ़ी के सपनों, संघर्ष और सफलता की कहानी है। लेखक की यह उपलब्धि पूरे क्षेत्र के लिए गर्व का विषय है और आने वाली पीढ़ियों को अपने लक्ष्य की ओर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेगी।













