


पौधरोपण के साथ चित्रकला कार्यशाला आयोजित, प्रकृति और संस्कृति के संरक्षण का दिया संदेश
भागलपुर । विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर शुक्रवार को भागलपुर संग्रहालय एवं आम्रपाली कला प्रशिक्षण केंद्र में पर्यावरण संरक्षण और भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं को जोड़ते हुए विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के दौरान कलाकारों, कला प्रशिक्षुओं एवं कर्मचारियों ने सामूहिक रूप से विभिन्न प्रजातियों के पौधों का रोपण कर हरित भविष्य के निर्माण का संकल्प लिया। इस अवसर पर जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी अंकित रंजन के निर्देशन में संग्रहालय परिसर में ‘नवग्रह वाटिका’ निर्माण की महत्वाकांक्षी योजना का शुभारंभ भी किया गया।

कार्यक्रम की शुरुआत पौधरोपण अभियान से हुई, जिसमें उपस्थित कलाकारों और कर्मचारियों ने पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त करते हुए कई औषधीय एवं छायादार पौधे लगाए। इस दौरान संग्रहालय परिसर को एक सांस्कृतिक एवं पर्यावरणीय केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी अंकित रंजन ने कहा कि भारतीय संस्कृति का मूल स्वरूप प्रकृति के साथ गहरे जुड़ाव का प्रतीक है। हमारी कला, साहित्य, धार्मिक परंपराओं और जीवन दर्शन में पृथ्वी, आकाश, जल, वनस्पति और जीव-जंतुओं को विशेष महत्व दिया गया है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल वैज्ञानिक आवश्यकता नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक जिम्मेदारी भी है।
उन्होंने बताया कि नवग्रह वाटिका की अवधारणा भारतीय परंपरा और पर्यावरणीय चेतना का सुंदर समन्वय है। इस वाटिका में नवग्रहों से जुड़े नौ प्रमुख पौधों— दूब, चिड़चिड़ी, कुश, आक, शमी, खैर, पलाश, गूलर और पीपल का रोपण निर्धारित दिशाओं में किया जाएगा। इन पौधों का धार्मिक महत्व होने के साथ-साथ औषधीय एवं पर्यावरणीय दृष्टि से भी विशेष महत्व है।

अंकित रंजन ने कहा कि वर्तमान समय में पर्यावरण संरक्षण की चर्चाओं में अक्सर बड़े वृक्षों को ही महत्व दिया जाता है, जबकि नवग्रह वाटिका यह संदेश देती है कि छोटी दूब घास से लेकर विशाल पीपल वृक्ष तक प्रत्येक वनस्पति प्रकृति के संतुलन में समान रूप से महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने बताया कि प्रथम चरण में वाटिका में शमी, खैर, गूलर और पीपल के पौधे लगाए गए हैं।
विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर संग्रहालय परिसर में ‘प्रकृति और संस्कृति’ विषय पर आधारित एक विशेष चित्रकला कार्यशाला का भी आयोजन किया गया। कार्यशाला में 50 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया और मंजूषा चित्रकला, पोस्टर कला एवं समकालीन कला शैली के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता और वृक्षों के महत्व को चित्रों में उकेरा।
प्रतिभागियों ने अपनी कलाकृतियों के माध्यम से प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता, हरित पर्यावरण की आवश्यकता तथा मानव और प्रकृति के अटूट संबंध को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। कार्यशाला के दौरान कलाकारों को विशेषज्ञों द्वारा कला की बारीकियों की जानकारी भी दी गई।
कार्यक्रम में प्रसिद्ध मंजूषा कलाकार मनोज पंडित, डॉ. उलूपी झा, अनुकृति, विशुद्धानंद, कुमार गौरव, नरेंद्र कुमार, राजेश कुमार, निशा कुमारी सहित अनेक कलाकार, प्रशिक्षु एवं कला प्रेमी उपस्थित रहे। सभी ने पर्यावरण संरक्षण को जन-आंदोलन बनाने और अधिक से अधिक पौधे लगाने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित लोगों ने कहा कि प्रकृति और संस्कृति एक-दूसरे की पूरक हैं तथा पर्यावरण संरक्षण के बिना सांस्कृतिक धरोहरों का संरक्षण भी संभव नहीं है। पौधरोपण और कला के माध्यम से दिया गया यह संदेश समाज को पर्यावरण के प्रति जागरूक करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित होगा।
















