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भागलपुर। बिहार कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू), सबौर में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक दिवसीय कार्यशाला एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। आत्मा, भागलपुर एवं कृषि विज्ञान केंद्र, सबौर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में जिले के विभिन्न प्रखंडों से आए किसानों, कृषि विशेषज्ञों, प्रसार कार्यकर्ताओं तथा जनप्रतिनिधियों ने भाग लिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चार एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। उद्घाटन सत्र में बिहार सरकार के नगर विकास एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री नीतीश मिश्रा, भागलपुर विधायक रोहित पांडेय, पीरपैंती विधायक मुरारी पासवान, भाजपा जिला अध्यक्ष संतोष कुमार सहित कई गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। सभी अतिथियों का स्वागत विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. डी.आर. सिंह ने पुष्पगुच्छ एवं अंगवस्त्र प्रदान कर किया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री नीतीश मिश्रा ने कहा कि वर्तमान समय में कृषि क्षेत्र को टिकाऊ और पर्यावरण अनुकूल बनाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि यदि आज हम अपनी मिट्टी और कृषि संसाधनों की चिंता नहीं करेंगे तो आने वाली पीढ़ियों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। प्राकृतिक खेती न केवल किसानों की लागत कम करती है बल्कि मिट्टी की उर्वरता और पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

मंत्री ने बिहार कृषि विश्वविद्यालय द्वारा कृषि क्षेत्र में किए जा रहे अनुसंधान और नवाचारों की सराहना करते हुए कहा कि आधुनिक तकनीक और कृषि का समन्वय समय की मांग है। उन्होंने किसानों से नई तकनीकों को अपनाने की अपील करते हुए कहा कि तकनीक से दूरी नहीं बल्कि उसका बेहतर उपयोग ही कृषि को लाभकारी बना सकता है। उन्होंने आश्वस्त किया कि सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग कृषि क्षेत्र में तकनीकी सहयोग के लिए हरसंभव सहायता प्रदान करेगा।

भागलपुर विधायक रोहित पांडेय ने कहा कि प्राकृतिक खेती भारतीय कृषि परंपरा और वैदिक ज्ञान पर आधारित है। उन्होंने किसानों से रासायनिक खेती के दुष्प्रभावों को समझते हुए प्राकृतिक खेती की ओर आगे बढ़ने का आग्रह किया।

पीरपैंती विधायक मुरारी पासवान ने कहा कि बिहार कृषि विश्वविद्यालय प्राकृतिक खेती के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि विश्वविद्यालय भविष्य में भी किसानों को वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण उपलब्ध कराता रहेगा।

कुलपति डॉ. डी.आर. सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे अपनी कुल कृषि भूमि के कम-से-कम 25 प्रतिशत हिस्से में प्राकृतिक खेती की शुरुआत करें। उन्होंने कहा कि उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ टिकाऊ और सुरक्षित कृषि प्रणाली विकसित करना भी आवश्यक है।

डॉ. सिंह ने भागलपुर की पहचान माने जाने वाले जर्दालू आम, कतरनी धान और सिल्क के ब्रांडिंग एवं प्रचार-प्रसार के लिए विश्वविद्यालय में एक विशेष केंद्र स्थापित करने की आवश्यकता पर बल दिया। इसके साथ ही किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) के प्रशिक्षण हेतु एक समर्पित प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने का भी प्रस्ताव रखा।

कार्यक्रम का परिचय प्रसार शिक्षा निदेशक डॉ. एस.के. पाठक ने कराया, जबकि मंच संचालन डॉ. एम.जेड. होदा ने किया।

उद्घाटन सत्र के बाद आयोजित तकनीकी सत्र का संचालन कृषि विज्ञान केंद्र, सबौर की वरीय वैज्ञानिक एवं प्रधान डॉ. अनीता कुमारी ने किया। तकनीकी सत्र में विशेषज्ञों ने प्राकृतिक खेती की तकनीकों, जैविक उर्वरकों के उपयोग, प्राकृतिक कीटनाशकों की तैयारी, मिट्टी संरक्षण तथा किसानों के लिए उपलब्ध संभावनाओं पर विस्तार से जानकारी दी।

कार्यशाला के दौरान किसानों ने विशेषज्ञों से सीधे संवाद कर अपनी समस्याओं और जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को प्राकृतिक खेती के प्रति जागरूक करना तथा उन्हें टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रेरित करना था।

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