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रिपोर्ट : प्रदीप विद्रोही

भागलपुर जिले के कहलगांव स्थित एनटीपीसी परियोजना में कार्यरत मजदूरों, सुपरवाइजरों और ठेका कर्मियों को साइबर अपराधी अपना निशाना बनाने में जुट गए हैं। ‘प्रधानमंत्री आवास योजना की नई लाभार्थी सूची’ दिखाने के नाम पर व्हाट्सएप के माध्यम से फर्जी APK फाइल और संदिग्ध लिंक भेजे जा रहे हैं। इस तरह के संदेश मिलने के बाद परियोजना क्षेत्र के कामगारों में चिंता का माहौल है। हालांकि समय रहते सतर्कता बरतने के कारण अब तक किसी बड़े आर्थिक नुकसान की पुष्टि नहीं हुई है।

जानकारी के अनुसार, शनिवार देर रात से एनटीपीसी कहलगांव परियोजना के कई कर्मचारियों और मजदूरों के मोबाइल फोन पर एक संदिग्ध संदेश वायरल हो रहा है। इस संदेश में दावा किया जा रहा है कि प्रधानमंत्री आवास योजना की नई सूची जारी कर दी गई है और लाभार्थी अपना नाम देखने के लिए एक APK फाइल डाउनलोड करें। इसके साथ एक कथित स्कैनर लिंक भी भेजा जा रहा है, जिस पर क्लिक करने या उसे स्कैन करने के लिए लोगों को प्रेरित किया जा रहा है।

साइबर विशेषज्ञों के अनुसार, इस प्रकार की APK फाइलें बेहद खतरनाक हो सकती हैं। यदि कोई व्यक्ति अज्ञात स्रोत से प्राप्त इस फाइल को अपने मोबाइल में इंस्टॉल कर लेता है, तो साइबर अपराधियों को उसके मोबाइल तक अनधिकृत पहुंच मिल सकती है। इससे बैंकिंग ऐप, यूपीआई, मोबाइल बैंकिंग, सोशल मीडिया अकाउंट, संपर्क सूची, फोटो, दस्तावेज, ओटीपी और अन्य निजी जानकारियां चोरी होने का खतरा बढ़ जाता है।

बताया जा रहा है कि एनटीपीसी कहलगांव के एमजीआर रेलवे क्षेत्र में कार्यरत गैंग-1 के कई सदस्यों को ऐसे संदिग्ध संदेश प्राप्त हुए। कुछ लोगों ने इसकी जानकारी अपने साथियों को दी और किसी भी लिंक या APK फाइल को डाउनलोड नहीं किया। इसी सतर्कता के कारण संभावित साइबर ठगी की बड़ी घटना टल गई। हालांकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि किसी व्यक्ति का मोबाइल हैक हुआ है या नहीं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यह पहला मामला नहीं है। कुछ दिन पहले भी साइबर ठगों ने कहलगांव क्षेत्र के कई जनप्रतिनिधियों, विशेषकर मुखिया प्रतिनिधियों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के नाम पर इसी तरह के फर्जी संदेश भेजे थे। अब अपराधियों ने अपना निशाना मजदूरों, ठेका कर्मियों और आम लोगों को बनाना शुरू कर दिया है।

विशेषज्ञों का कहना है कि केंद्र या राज्य सरकार की किसी भी योजना की लाभार्थी सूची देखने के लिए कभी भी APK फाइल डाउनलोड करने की आवश्यकता नहीं होती। सरकारी योजनाओं की जानकारी केवल संबंधित विभाग की आधिकारिक वेबसाइट, जनसेवा केंद्र या संबंधित सरकारी कार्यालय से ही प्राप्त करनी चाहिए। किसी भी अज्ञात व्यक्ति द्वारा भेजे गए लिंक या ऐप पर भरोसा करना आर्थिक और डिजिटल सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा साबित हो सकता है।

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों ने लोगों से विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। उन्होंने कहा है कि व्हाट्सएप, एसएमएस या सोशल मीडिया पर प्राप्त किसी भी अज्ञात APK फाइल या लिंक को डाउनलोड या इंस्टॉल न करें। किसी संदिग्ध क्यूआर कोड को स्कैन करने से पहले उसकी सत्यता अवश्य जांच लें। बैंक खाता, एटीएम, यूपीआई पिन, ओटीपी या अन्य गोपनीय जानकारी किसी भी परिस्थिति में किसी के साथ साझा न करें।

यदि किसी व्यक्ति से गलती से संदिग्ध ऐप इंस्टॉल हो जाए, तो तुरंत मोबाइल का इंटरनेट बंद कर दें, उस ऐप को हटाएं, बैंकिंग और सोशल मीडिया सहित सभी महत्वपूर्ण पासवर्ड बदल दें तथा तत्काल राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं। साथ ही राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज कर निकटतम साइबर थाना को भी इसकी सूचना दें।

एनटीपीसी कहलगांव क्षेत्र में सामने आया यह मामला एक बार फिर यह साबित करता है कि साइबर अपराधी लगातार नए-नए तरीके अपनाकर लोगों को ठगी का शिकार बनाने का प्रयास कर रहे हैं। ऐसे में जागरूकता और सतर्कता ही साइबर अपराध से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है।

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