5
(1)

भागलपुर। कला भवन साहित्य विभाग द्वारा प्रत्येक माह के प्रथम रविवार को आयोजित होने वाली साहित्यिक गोष्ठी की श्रृंखला के अंतर्गत रविवार, 5 जुलाई 2026 को डॉ. कामेश्वर पंकज के कहानी संग्रह ‘कथाकार रूपचंद’ का भव्य लोकार्पण समारोह आयोजित किया गया। समारोह की अध्यक्षता अंग्रेजी विभाग की पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. उषा शरण ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. शिवमुनि यादव उपस्थित रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन एवं मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण के साथ हुआ।

साहित्य विभाग की संयोजिका डॉ. निरुपमा राय ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि इस कहानी संग्रह में संकलित 14 कहानियां और 9 लघुकथाएं विशिष्ट, प्रभावशाली और पठनीय हैं।

CREATOR: gd-jpeg v1.0 (using IJG JPEG v62), default quality?

अपने अध्यक्षीय संबोधन में डॉ. उषा शरण ने डॉ. कामेश्वर पंकज को बधाई देते हुए उनकी रचनाओं की सार्थक व्याख्या प्रस्तुत की। उन्होंने ‘रूपचंद मर गया’, ‘पापा एक मौका दे दो’ और ‘मीठी यादें’ जैसी कहानियों का उल्लेख करते हुए लेखक को संवेदनशील और सशक्त लेखनी का धनी बताया।

मुख्य अतिथि डॉ. शिवमुनि यादव ने कहा कि डॉ. पंकज की कहानियों पर प्रेमचंद, अनूप लाल मंडल और फणीश्वरनाथ रेणु की साहित्यिक परंपरा का प्रभाव स्पष्ट दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर बिहार की समस्याओं, प्रवर्जन, सामाजिक परिवर्तनों तथा ग्रामीण जीवन का यथार्थवादी चित्रण उनकी कहानियों की सबसे बड़ी विशेषता है। उन्होंने ‘गरीबां दशहरा और मोहर्रम’ तथा ‘चलो हमारे गांव’ जैसी कहानियों की विशेष चर्चा की।

विशिष्ट अतिथि डॉ. प्रभात नारायण झा ने कहा कि डॉ. पंकज की कहानियों में ग्रामीण समाज और प्रवासी मजदूरों की पीड़ा प्रभावशाली ढंग से उभरकर सामने आती है। उन्होंने कहा कि लघुकथा कहानी का सूक्ष्म एवं केंद्रीय रूप होती है, जिसमें लेखक निष्कर्ष पाठक पर छोड़ देता है और डॉ. पंकज की लघुकथाएं इस कसौटी पर पूरी तरह खरी उतरती हैं।

प्रो. शंभूलाल वर्मा ने संग्रह की कहानी ‘अयोध्या में ज़फ़र सिद्दीकी’ को सांप्रदायिक सौहार्द की उत्कृष्ट मिसाल बताते हुए इसे संग्रह की सर्वश्रेष्ठ रचना कहा। वहीं बी. झा कॉलेज, कटिहार के पूर्व अंग्रेजी प्राध्यापक डॉ. दिलीप कुमार यादव ने ‘पापा एक मौका दे दो’ को महिला सशक्तिकरण पर आधारित प्रभावशाली कहानी बताते हुए लेखक की कहानी लेखन शैली की सराहना की। उन्होंने ‘सास बनाम मां’ और ‘पंचायत के बाद’ जैसी लघुकथाओं पर भी अपने विचार रखे।

अपने लेखकीय वक्तव्य में डॉ. कामेश्वर पंकज ने कहा कि उनकी सभी कहानियां जीवन के वास्तविक अनुभवों पर आधारित हैं। उन्होंने कहा कि साहित्य का कर्म दर्पण बनना और उसका धर्म दीपक बनना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने शिल्प से भले समझौता किया हो, लेकिन कथ्य से कभी समझौता नहीं किया। उनकी कहानियों की घटनाएं जीवन की सच्चाइयों से प्रेरित हैं।

डॉ. के.के. चौधरी ने ‘मुरली मंडल उदास है’, ‘तुम ही बताओ’, ‘चलो हमारे गांव’ और ‘मैं बूढ़ा हो लेता हूं’ सहित कई कहानियों पर विस्तार से चर्चा की।

द्वितीय सत्र में डॉ. कामेश्वर पंकज की धर्मपत्नी श्रीमती पूनम देवी ने अध्यक्ष डॉ. उषा शरण को सम्मानित किया। इसके बाद स्थानीय साहित्यकारों ने विभिन्न विषयों पर अपनी लघुकथाओं का पाठ कर कार्यक्रम को साहित्यिक गरिमा प्रदान की।

समारोह में श्रीमती पूनम देवी, किशोरी बबीता चौधरी, डॉ. निशा प्रकाश, देहरादून से पधारी डॉ. उषा झा ‘रेणु’, रानी ने सिंह, वंदना कुमारी, रंजना कुमारी, आयुष कुमार, मनोज कुमार राय, दिनकर दीवाना, कुमार दिवाकर, सुनील समदर्शी, विनायक रंजन, श्रीमती छाया जोशी, जया सरकार, छोटू घोष, मलय झा, विनीत राज, अजय सिंह, मुकेश कुमार सहित अनेक साहित्यकार एवं साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के दौरान साहित्यकार एवं ‘सांवली’ पत्रिका के संपादक जवाहर किशोर प्रसाद तथा कलाधर की स्मृति में दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित की गई। अंत में डॉ. निरुपमा राय ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया।

Aapko Yah News Kaise Laga.

Click on a star to rate it!

Average rating 5 / 5. Vote count: 1

No votes so far! Be the first to rate this post.

Share: