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भागलपुर। लोक कला जब परंपरा की चौखट से निकलकर नवाचार का हाथ थामती है, तो उसकी तस्वीर कुछ ऐसी ही बनती है जैसी भागलपुर संग्रहालय परिसर में आयोजित दूसरी ‘मंजूषा हटिया’ में देखने को मिली। यहां मंजूषा कला सिर्फ कागज़ और कैनवास तक सीमित नहीं रही, बल्कि गोबर की सतह, चुकंदर-हल्दी जैसे प्राकृतिक रंगों और क्रोशिया की ऊनी बुनाई के जरिए एक नए रूप में सामने आई।


कला एवं संस्कृति विभाग, बिहार सरकार के जिला कला एवं संस्कृति कार्यालय, भागलपुर एवं भागलपुर संग्रहालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस प्रदर्शनी में 50 से अधिक कलाकारों ने हिस्सा लिया। प्रदर्शनी में कला प्रेमियों की अच्छी-खासी भीड़ उमड़ी और कई कलाकारों की कलाकृतियां मौके पर ही बिक गईं, जिससे लोक कला को सीधे बाजार से जोड़ने की पहल भी सफल रही।
प्रदर्शनी का सबसे बड़ा आकर्षण युवा कलाकारों के प्रयोग रहे। इलाहाबाद विश्वविद्यालय से फाइन आर्ट की पढ़ाई कर चुकी सोनाली कुमारी ने चुकंदर, धनिया और हल्दी से तैयार प्राकृतिक रंगों से मंजूषा चित्र बनाए। वहीं वरिष्ठ कलाकार माला घोष ने गोबर से तैयार बैकग्राउंड पर पारंपरिक मंजूषा चित्र उकेरकर ग्रामीण संस्कृति और पर्यावरण संरक्षण का अनूठा संदेश दिया।
कलाकार अर्पणा कुमारी ने होली के प्राकृतिक रंगों से मंजूषा चित्र तैयार किए, जबकि सरकारी विद्यालय की शिक्षिका प्रियंवदा ने ऊन की क्रोशिया कला में मंजूषा मोटिफ्स तैयार कर यह दिखाया कि यह लोककला अब दीवारों से निकलकर सजावटी और वस्त्र कला का भी हिस्सा बन सकती है।
प्रदर्शनी का उद्घाटन जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी सह सहायक संग्रहालयाध्यक्ष अंकित रंजन ने किया। उन्होंने कहा कि ‘मंजूषा हटिया’ केवल प्रदर्शनी नहीं, बल्कि कलाकारों के लिए सीखने, संवाद और नए प्रयोगों का साझा मंच है। उन्होंने यह भी घोषणा की कि आगामी प्रदर्शनी में मंजूषा कला की पारंपरिक पहचान बनाए रखने के लिए केवल तीन मूल रंग—माइजेंटा (गुलाबी), पीला और हरा—से बनी कलाकृतियों को ही स्थान दिया जाएगा। लाल रंग का उपयोग करने वाले चित्र शामिल नहीं किए जाएंगे।
कार्यक्रम के दौरान कलाकारों और खरीदारों के बीच सीधा संवाद भी देखने को मिला। जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी अंकित रंजन ने युवा कलाकार देवांश कुमारी की पेंटिंग खरीदी, जबकि सबौर के नवल किशोर राय ने पिंकी कुमारी द्वारा बनाया गया मंजूषा रूमाल खरीदकर कलाकारों का उत्साह बढ़ाया।
आयोजकों ने बताया कि प्रत्येक ‘मंजूषा हटिया’ के लिए नए संयोजकों का चयन किया जाता है ताकि अधिक से अधिक कलाकारों को नेतृत्व का अवसर मिल सके। इस बार आयोजन की जिम्मेदारी अनुकृति कुमारी और विशुद्धानंद मिश्र ने निभाई, जबकि अगली प्रदर्शनी का नेतृत्व मृदुला सिंह और अमन सागर करेंगे।

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