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प्रदीप विद्रोही
भागलपुर। तीन वर्ष पहले सेवानिवृत्त हुए टीएनबी कॉलेज के पूर्व प्रशाखा पदाधिकारी अमरेन्द्र कुमार झा आज भी अपने वैधानिक बकाया भुगतान के लिए कॉलेज और विश्वविद्यालय के चक्कर लगाने को विवश हैं। टीएमबीयू पेंशनर संघर्ष मंच ने इसे न केवल प्रशासनिक लापरवाही बल्कि न्यायालय के आदेशों की अवहेलना बताते हुए गंभीर चिंता व्यक्त की है।


मंच के अध्यक्ष बिहारी लाल चौधरी और संयोजक पवन कुमार सिंह ने संयुक्त बयान में कहा कि लगभग चार दशकों तक कॉलेज की सेवा देने वाले श्री झा को आज तक नियमसम्मत बकाया दावा विवरणी उपलब्ध नहीं कराई गई है। जबकि माननीय उच्च न्यायालय द्वारा CWJC एवं MJC वादों में उनके पक्ष में स्पष्ट आदेश दिए जा चुके हैं।
मंच का आरोप है कि कॉलेज प्रशासन ने श्री झा के सेवाकाल के 85 माह का वेतन ‘शून्य’ दर्शा दिया है, जबकि उन्हीं महीनों का वेतन उच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन में उन्हें पहले ही भुगतान किया जा चुका है। ऐसे में भुगतान की गई राशि का अभिलेखों में समुचित उल्लेख किए बिना सही बकाया दावा विवरणी तैयार नहीं की जा सकती।
पेंशनर संघर्ष मंच ने बताया कि इस त्रुटि को सुधारने के लिए प्रधानाचार्य को ज्ञापन सौंपा गया था। स्वयं श्री झा भी कई बार विश्वविद्यालय प्रशासन से गुहार लगा चुके हैं। विश्वविद्यालय ने भी भूल सुधार के लिए प्रधानाचार्य को तीन बार पत्र भेजे, जिनकी भाषा हर बार अधिक कठोर होती गई, लेकिन कॉलेज प्रशासन ने अब तक कोई सकारात्मक कार्रवाई नहीं की। मंच ने सवाल उठाया कि यदि वास्तव में 85 माह का वेतन नहीं दिया गया था, तो कॉलेज उसका नियमित भुगतान क्यों नहीं कर रहा है?
मंच ने कहा कि सही दावा विवरणी नहीं मिलने के कारण श्री झा अपने वैधानिक बकाया से वंचित हैं और मुख्यालय छोड़कर अपने पैतृक गांव भी नहीं जा पा रहे हैं। दूसरी ओर, सरकारी आवास खाली नहीं करने के नाम पर उनकी पेंशन से हर माह 18 हजार रुपये से अधिक पेनल रेंट की कटौती की जा रही है, जबकि इस संबंध में भी न्यायालय का आदेश उनके पक्ष में है।
टीएमबीयू पेंशनर संघर्ष मंच का कहना है कि इस पूरे प्रकरण से श्री झा मानसिक और आर्थिक रूप से लगातार प्रताड़ित हो रहे हैं। मंच ने माननीय कुलपति से तत्काल हस्तक्षेप कर मामले का न्यायोचित समाधान सुनिश्चित करने की मांग की है। साथ ही कॉलेज प्रशासन से हठधर्मिता छोड़कर अभिलेखों में आवश्यक संशोधन करते हुए सही दावा विवरणी जारी करने का अंतिम अनुरोध किया है। मंच ने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो इस मुद्दे को सड़क से लेकर सभी सक्षम संवैधानिक एवं प्रशासनिक मंचों तक जोरदार ढंग से उठाया जाएगा।

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