


सांसद पप्पू यादव ने भी किया सहयोग
पूर्णिया। टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत शनिवार को समाहरणालय स्थित महानंदा सभागार में टीबी से पीड़ित मरीजों के बीच पौष्टिक आहार किट का वितरण किया गया। जिला पदाधिकारी अंशुल कुमार के निर्देश एवं सिविल सर्जन डॉ. प्रमोद कुमार कनौजिया के मार्गदर्शन में आयोजित कार्यक्रम में पूर्णिया के सांसद राजेश रंजन ने भी मरीजों को पोषण किट प्रदान कर अभियान में सहयोग किया।
कार्यक्रम का आयोजन जिला विकास समन्वय एवं अनुश्रवण समिति (दिशा) की बैठक के अवसर पर किया गया। इस दौरान सांसद ने चिन्हित 20 से अधिक टीबी मरीजों को पोषण किट उपलब्ध कराते हुए कहा कि टीबी जैसी गंभीर बीमारी से लड़ाई में दवा के साथ पौष्टिक आहार भी बेहद जरूरी है।

जिला प्रशासन ने बताया कि टीबी मुक्त भारत अभियान का उद्देश्य समाज के सहयोग से टीबी मरीजों को बेहतर पोषण उपलब्ध कराकर उनके स्वास्थ्य में सुधार लाना है। आम नागरिक भी इस अभियान से जुड़कर टीबी मरीजों को पोषण सामग्री उपलब्ध करा सकते हैं और उन्हें स्वस्थ जीवन की ओर लौटाने में योगदान दे सकते हैं।
जिलाधिकारी अंशुल कुमार ने लोगों से अपील की कि वे टीबी के प्रति जागरूक रहें तथा जरूरतमंद मरीजों की सहायता के लिए आगे आएं। उन्होंने कहा कि समय पर जांच, नियमित उपचार और पौष्टिक भोजन से टीबी को पूरी तरह हराया जा सकता है।
सिविल सर्जन डॉ. प्रमोद कुमार कनौजिया ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग टीबी उन्मूलन के लिए लगातार अभियान चला रहा है। चिकित्सकों, स्वास्थ्यकर्मियों और जनप्रतिनिधियों के सहयोग से मरीजों को उपचार के साथ-साथ पोषण सहायता भी उपलब्ध कराई जा रही है।
जिला संचारी रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. मोहम्मद तनवीर हैदर ने बताया कि टीबी एक संक्रामक रोग है, जिसके प्रमुख लक्षणों में तीन सप्ताह से अधिक समय तक लगातार खांसी, बलगम या खून आना, सीने में दर्द, सांस लेने में तकलीफ, बुखार, रात में पसीना आना, तेजी से वजन घटना, अत्यधिक कमजोरी और भूख कम लगना शामिल हैं। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत नजदीकी सरकारी स्वास्थ्य केंद्र में जांच करानी चाहिए।
उन्होंने बताया कि टीबी मरीजों के संपर्क में रहने वाले परिजनों की भी जांच की जा रही है तथा संक्रमण से बचाव के लिए आवश्यक दवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
टीबी विशेषज्ञ डॉ. दिनेश कुमार ने बताया कि राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम (NTEP) के तहत अब 3HP (थ्री एचपी) दवा योजना लागू की गई है। यह विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा अनुशंसित टीबी बचाव उपचार है, जिसमें आइसोनियाजिड (Isoniazid) और रिफापेंटीन (Rifapentine) दवाएं सप्ताह में एक बार, कुल 12 सप्ताह (तीन माह) तक दी जाती हैं। इससे टीबी संक्रमण की आशंका काफी हद तक कम होती है और मरीज जल्द स्वस्थ हो सकते हैं।
कार्यक्रम में जिला पदाधिकारी अंशुल कुमार, सिविल सर्जन डॉ. प्रमोद कुमार कनौजिया, जिला संचारी रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. मोहम्मद तनवीर हैदर, टीबी विशेषज्ञ डॉ. दिनेश कुमार, जिला कार्यक्रम प्रबंधक सोरेंद्र कुमार दास सहित स्वास्थ्य विभाग के कई अधिकारी एवं कर्मी उपस्थित थे।
स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि “जन-जन का रखें ध्यान, टीबी मुक्त भारत अभियान” से जुड़कर टीबी मरीजों को पोषण और सहयोग उपलब्ध कराने में अपनी सहभागिता निभाएं।
















