


प्रदीप विद्रोही
भागलपुर। शंकर साह विक्रमशिला महाविद्यालय, कहलगांव के आईक्यूएसी (IQAC) विभाग एवं एग्रो रिसर्च सेंटर के संयुक्त तत्वावधान में बिहार एंड झारखंड तथा इंडियन केमिकल सोसायटी, भागलपुर चैप्टर के अकादमिक सहयोग से आयोजित दो दिवसीय बहुविषयक राष्ट्रीय सेमिनार का रविवार को सफलतापूर्वक समापन हो गया। हाइब्रिड मोड में आयोजित इस सेमिनार ने न केवल देशभर के शोधार्थियों और शिक्षकों को एक साझा मंच दिया, बल्कि शोध, समाज और स्थानीय विकास के मुद्दों पर भी गंभीर विमर्श का अवसर प्रदान किया।
सेमिनार के दूसरे दिन सुबह 10:30 बजे समानांतर रूप से तकनीकी सत्र-3 एवं तकनीकी सत्र-4 का आयोजन किया गया। तकनीकी सत्र-3 में सामाजिक विज्ञान, जबकि तकनीकी सत्र-4 में मानविकी, विज्ञान, वाणिज्य एवं प्रबंधन विषयों के शोधार्थियों और शिक्षकों ने ऑनलाइन एवं ऑफलाइन माध्यम से अपने शोध-पत्र प्रस्तुत किए। देश के विभिन्न राज्यों और विश्वविद्यालयों से आए प्रतिभागियों ने अपने शोध के निष्कर्ष साझा किए, जिन पर विशेषज्ञों ने विस्तार से चर्चा की।
भोजनावकाश के बाद आयोजित पैनल चर्चा सेमिनार का सबसे महत्वपूर्ण आकर्षण रही। विभिन्न तकनीकी सत्रों में सामने आए विचारों और सुझावों के आधार पर विशेषज्ञों ने संवाद किया। इस दौरान एनटीपीसी, कहलगांव के श्री सुधीर सिंह तथा प्रख्यात समाजसेवी श्री रणधीर चौधरी ने स्थानीय समस्याओं को सेमिनार की थीम से जोड़ते हुए समाधानपरक दृष्टिकोण प्रस्तुत किया। वक्ताओं ने शिक्षा, शोध और सामाजिक भागीदारी के समन्वय को क्षेत्रीय विकास के लिए आवश्यक बताया।
मुख्य प्रतिवेदक डॉ. रंजन कुमार सिन्हा ने चारों तकनीकी सत्रों का विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए प्रमुख शोध निष्कर्षों और सुझावों को साझा किया। इसके बाद प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि सेमिनार से उन्हें नए शोध आयामों की जानकारी मिली और ज्ञानवर्धन हुआ। प्रतिभागियों ने भविष्य में भी ऐसे राष्ट्रीय सेमिनार एवं कार्यशालाओं के नियमित आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया।
समापन समारोह में महाविद्यालय के सेवानिवृत्त शिक्षकों, शिक्षकेत्तर कर्मचारियों तथा आयोजन समिति के सदस्यों को शॉल एवं स्मृति-चिह्न देकर सम्मानित किया गया। वहीं सेमिनार ज्यूरी द्वारा सर्वश्रेष्ठ शोध-पत्र प्रस्तुतीकरण के लिए प्रथम पुरस्कार मगध विश्वविद्यालय के सहायक प्राध्यापक (सीनियर स्केल) डॉ. सुमित कुमार, द्वितीय पुरस्कार तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय की शोधार्थी साक्षी तथा तृतीय पुरस्कार असम विश्वविद्यालय के कॉमर्स विभाग के शोधार्थी रितेश सहनी को प्रदान किया गया। इसके बाद सभी प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र वितरित किए गए।
कार्यक्रम के प्रथम सत्र का संचालन डॉ. सितारे हिंद तथा द्वितीय सत्र का संचालन डॉ. अमित कुमार ने किया। आयोजन सचिव डॉ. नमन कुमार, संरक्षक डॉ. राजेश कुमार मिश्र एवं पूरी आयोजन समिति की सराहना करते हुए प्रभारी प्राचार्य ने कहा कि इस तरह के राष्ट्रीय आयोजन महाविद्यालय की शैक्षणिक पहचान को नई ऊंचाई प्रदान करते हैं और शोध संस्कृति को मजबूत बनाते हैं। उन्होंने सभी आयोजकों की मेहनत और सुव्यवस्थित संचालन की प्रशंसा की।
राष्ट्रगान के साथ दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार के औपचारिक समापन की घोषणा की गई। शोध, नवाचार और सामाजिक सरोकारों को एक मंच पर समेटने वाला यह आयोजन प्रतिभागियों के लिए ज्ञान, संवाद और सहयोग का यादगार अवसर बनकर उभरा।
















