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कोढ़ में खाज, अब पीरपैंती के तीसरे विधायक से उम्मीद

@ सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर इस जर्जर सड़क की स्थिति को विस्तार से प्रस्तुत करते हुए लिखा – ‘मेरे चेहरे पे चेचक के दाग नहीं है,लोगों ने नजरे गड़ा-गड़ा के देखा है।’ अब सांसद अजय कुमार मंडल, पीरपैंती विधायक मुरारी पासवान और कहलगांव विधायक शुभानंद मुकेश से इस दिशा में शीघ्र पहल करने की अपील की है।
प्रदीप विद्रोही
भागलपुर। कहलगांव-नंदलापुर-बाराहाट यानी बिहार झारखंड को जोड़ने वाली इस ग्रामीण सड़क की दुर्दशा पर पिछले दिनों एक युवक ने फेसबुक पर पोस्ट करते हुए कुछ यूं लिखा- ‘मेरे चेहरे पे चेचक के ये दाग नहीं है,लोगों ने नजरे गड़ा-गड़ा के मुझे देखा है।’ फिर क्या कमेंट्स की झड़ी लग गई। सड़क की इस दुर्दशा के लिए सड़क से जुड़े ग्रामीण युवाओं ने सरकार की मंशा व इलाके के विधायक को जमकर कोसा। मालूम हो कि इस ग्रामीण सड़क के रास्ते ही पीरपैंती के दो पूर्व विधायक रामविलास पासवान (आरजेडी) और अमन कुमार (भाजपा) का भी पुश्तैनी घर है। पूर्व विधायक अमन कहते हैं हमने खूब प्रयास किए किसी ने नहीं सुनी।
कहलगांव-बाराहाट ग्रामीण सड़क की लंबाई करीब चौदह किमी है।नंदलालपुर से पूर्व यह सड़क दो ग्रामीण सड़क में तब्दील हो जाती है।प्रथम कहलगांव-प्यालापुर होते हुए पीरपैंती-बाराहाट एनएच-133 स्थित प्यालापुर चौंक पर मिलती है।वहीं दूसरी सड़क कहलगांव से नंदलालपुर होते हुए बाराहाट तक जाती है।कमोवेश दोनों ही ग्रामीण सड़क की स्थित जर्जर।नंदलालपुर-चांदनी चौंक के बाद सात किमी सड़क की दुर्दशा देख रूह कांप उठती है।वैसे कहलगांव से नंदलालपुर तक इस इलाके की सड़क की निगरानी एनटीपीसी कहलगांव करती है। अभी इसकी भी स्थिति जर्जर है। नंदलापुर के बाद सड़क में गड्ढों का जखीरा है।करीब सात किमी सड़क में करीब 8 सौ छोटे-बड़े गड्ढों की संख्या पायी गयी।चांदनी चौंक से करीब डेढ़ किमी आगे बढ़ने के बाद बनस्पति गांव मिलता है। ग्रामीण मिथुन यादव लोहा कहता है-मैं तो करीब 20 वर्षों से सड़क के गड्ढों को देख रहा हूं।पीरपैंती विधान सभा स्थित इस ग्रामीण सड़क की दुर्दशा पर जनप्रतिनिधि की चुप्पी से ग्रामीण गुस्से में हैं।
डेढ़ किमी बाद हरचंदपुर गांव मिलता है।सड़क किनारे ही अमल कुमार उर्फ गुड्डू,बिनोद कु यादव, मिलते हैं।सड़क की व्यथा पूछते ही चिल्ला उठा।अब मेरे गांव कुटुंब भी आने से पहरेज करने लगे हैं।बीमार व गर्भवती महिलाओं को शहर ले जाने में कितनी कठिनाई होती है कहने भर में ही बदन कांप उठता है।
विकास के बड़े-बड़े दावों के बीच कहलगांव से बाराहाट को जोड़ने वाली लगभग 14 किलोमीटर लंबी सड़क आज भी बदहाली की कहानी बयां कर रही है।14 किलोमीटर की सड़क, 14 सौ छोटे-बड़े गड्ढे, वर्षों से जर्जर इस सड़क की बदहाली अब कोढ़ में खाज हो चुकी है। यह सड़क बिहार के ग्रामीणों की मानें तो वर्षों से यह सड़क जर्जर हालत में है, लेकिन अब तक इसका स्थायी पुनर्निर्माण नहीं हो सका है। बरसात के मौसम में हालात इतने खराब हो जाते हैं कि इस सड़क पर सफर करना किसी जोखिम से कम नहीं रह जाता।
यह सड़क करीब दर्जनों गांवों के लोगों की जीवनरेखा मानी जाती है। प्रतिदिन हजारों ग्रामीण, किसान, व्यापारी, मरीज और स्कूली बच्चे इसी मार्ग से कहलगांव और बाराहाट के बीच आवागमन करते हैं। लेकिन जगह-जगह बने गहरे गड्ढे, जलजमाव और टूटी सड़क लोगों के लिए बड़ी परेशानी का कारण बने हुए हैं।
सबसे अधिक दिक्कत स्कूली बच्चों को झेलनी पड़ रही है। अभिभावकों का कहना है कि बच्चों को स्कूल पहुंचने के लिए सुबह दो घंटे पूर्व घर से निकलना पड़ता है। स्कूल बसों और अन्य वाहनों को गड्ढों से बचते हुए धीमी गति से चलना पड़ता है, जिससे समय पर स्कूल पहुंचना मुश्किल हो जाता है। कई बार दुर्घटना की आशंका भी बनी रहती है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि वर्षों से जनप्रतिनिधि बदलते रहे, लेकिन सड़क की तस्वीर नहीं बदली। रामविलास,अमन, ललन और वर्तमान में मुरारी पासवान विधायक हैं। वहीं, अजय मंडल भी लंबे समय तक सांसद रहे, लेकिन इस महत्वपूर्ण सड़क का स्थायी निर्माण नहीं हो सका। विधायक बदलते रहे, मगर सड़क की बदतर स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ। बीच-बीच में केवल खानापूरी के तौर पर मरम्मत का काम कराया गया, जो कुछ ही दिनों में फिर उखड़ गया।
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की बदहाली का एक बड़ा कारण ओवरलोड ट्रैक्टरों और ट्रकों का लगातार परिचालन भी है। आरोप है कि प्रशासन की ओर से ओवरलोड वाहनों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं होने के कारण सड़क तेजी से क्षतिग्रस्त होती चली गई। आज स्थिति यह है कि कई स्थानों पर सड़क की पहचान तक मिट चुकी है और हर ओर गड्ढे ही गड्ढे नजर आते हैं।
बरसात में जलजमाव के कारण सड़क और भी खतरनाक हो जाती है। वाहन चालकों के साथ-साथ पैदल चलने वालों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि वे कई वर्षों से सड़क निर्माण की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें केवल आश्वासन ही मिला है।
स्थानीय लोगों ने सरकार और संबंधित विभाग से मांग की है कि कहलगांव-बाराहाट सड़क का शीघ्र उच्च गुणवत्ता के साथ पुनर्निर्माण कराया जाए तथा ओवरलोड वाहनों पर सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि करीब सौ गांवों के लोगों को सुरक्षित और सुगम आवागमन की सुविधा मिल सके।
इधर, सामाजिक कार्यकर्ता मिथुन यादव लोहा (गम्हरपुर), अमल कुमार (हरचंदपुर), अनुज कुमार, गौरव राणा, मंगल यादव, बिनोद कुमार साह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर इस जर्जर सड़क की स्थिति को विस्तार से प्रस्तुत करते हुए सांसद अजय कुमार मंडल, पीरपैंती विधायक मुरारी पासवान और कहलगांव विधायक शुभानंद मुकेश से इस दिशा में शीघ्र पहल करने की अपील की है।

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