


ने कागज़ और शब्दों में गढ़ा ‘विकसित भारत’
@ शिवनारायणपुर स्टेशन के पुनर्विकास से पहले मालदा मंडल की अनूठी पहल, चित्रों, भाषणों और निबंधों में झलका भविष्य का भारत।
प्रदीप विद्रोही
भागलपुर। रेलवे स्टेशन सिर्फ ट्रेनों के आने-जाने की जगह नहीं, बल्कि विकसित भारत के सपनों का केंद्र भी बन सकता है। इसी सोच को साकार करने के लिए पूर्व रेलवे के मालदा मंडल ने शिवनारायणपुर रेलवे स्टेशन के पुनर्विकास के उद्घाटन से पहले स्कूली बच्चों को अपनी कल्पनाओं और विचारों को खुलकर व्यक्त करने का अवसर दिया।
भागलपुर जिले के रेडवुड इंटरनेशनल स्कूल, डीएवी पब्लिक स्कूल (मथुरापुर), मध्य विद्यालय शिवनारायणपुर, रामसुंदर उच्चस्तरीय विद्यालय और इंटरमीडिएट हाई स्कूल, शिवनारायणपुर में आयोजित चित्रकला, निबंध और भाषण प्रतियोगिताओं में करीब 672 विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। प्रतियोगिताओं का विषय था-‘मेरे शहर का स्टेशन विकसित भारत में कैसा होगा’ और ‘विकसित भारत में मेरा योगदान’।
बच्चों ने रंगों, शब्दों और अपने विचारों के माध्यम से ऐसे रेलवे स्टेशन की तस्वीर पेश की, जो आधुनिक सुविधाओं, स्वच्छता, हरित वातावरण और तकनीक से लैस हो। वहीं, उन्होंने देश के विकास में अपनी भूमिका को भी रचनात्मक ढंग से सामने रखा।
कार्यक्रम की खास आकर्षण रही ‘सेल्फी विद स्टेशन’ प्रतियोगिता, जिसमें विद्यार्थियों ने पुनर्विकसित शिवनारायणपुर स्टेशन के साथ अपनी यादों और उत्साह को कैमरे में कैद किया। इस पहल ने बच्चों को रेलवे के बदलते स्वरूप से भावनात्मक रूप से जोड़ने का अवसर दिया।
प्रतियोगिताओं में कुल 9 विजेताओं का चयन किया गया है। इन्हें अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत पुनर्विकसित शिवनारायणपुर रेलवे स्टेशन के उद्घाटन समारोह में सम्मानित किया जाएगा।
मालदा मंडल की यह पहल केवल प्रतियोगिता तक सीमित नहीं रही, बल्कि बच्चों को यह संदेश भी दिया कि विकसित भारत का सपना केवल सरकार या संस्थाओं का नहीं, बल्कि हर नागरिक की भागीदारी से ही साकार होगा। रेलवे स्टेशन के कायाकल्प के साथ नई पीढ़ी के सपनों और जिम्मेदारियों को जोड़ने की यह पहल लोगों के बीच विशेष चर्चा का विषय बनी हुई है।

















