


@ सबौर महाविद्यालय में कार्यशाला, मंजूषा कला से लेकर पुस्तकों के लोकार्पण तक शिक्षा और संस्कृति का संगम।
प्रदीप विद्रोही
भागलपुर। सबौर महाविद्यालय में गुरुवार को आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला केवल नई शिक्षा नीति पर चर्चा तक सीमित नहीं रही, बल्कि शिक्षा, संस्कृति और संस्थान के विकास का साझा मंच बन गई। ‘नई शिक्षा नीति-2020 : विकसित भारत की नींव’ विषयक कार्यशाला में तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) विभांशु शेखर झा ने कहा कि ‘नई शिक्षा नीति ही विकसित भारत के निर्माण का मूल मंत्र है। महाविद्यालय केवल शिक्षकों का नहीं, बल्कि विद्यार्थियों और समाज का भी है। इसके विकास में सभी की भागीदारी जरूरी है।’
कुलपति के प्रथम आगमन पर महाविद्यालय में भव्य स्वागत हुआ। प्राचार्य प्रो. (डॉ.) संजय कुमार झा ने उनका स्वागत किया। कुलपति ने ‘दीपांकर श्रीज्ञान अतिश प्रवेश द्वार’ तथा ‘बाबा विशु रावत प्रवेश द्वार’ का उद्घाटन किया। छात्राओं ने अक्षत, चंदन और पुष्पवर्षा से उनका अभिनंदन किया, जबकि दीक्षा इंटरनेशनल स्कूल के बैंड और एनसीसी कैडेटों ने उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर तक पहुंचाया।
कार्यक्रम की शुरुआत से पहले कुलपति ने परिसर में लगी मंजूषा कला प्रदर्शनी एवं कार्यशाला का उद्घाटन किया। राज्य सरकार से सम्मानित कलाकार श्रीमती उलूपी झा के मार्गदर्शन में विद्यार्थियों ने मंजूषा कला की बारीकियां सीखीं। कुलपति ने इसे स्थानीय सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की सराहनीय पहल बताया।
सभागार में दीप प्रज्वलन के साथ कार्यशाला का औपचारिक शुभारंभ हुआ। छात्राओं ने वंदे मातरम्, कुलगीत और गणेश वंदना की प्रस्तुति दी। इस अवसर पर महाविद्यालय की वार्षिक पत्रिका ‘पुष्पिता’ के चौथे संस्करण का लोकार्पण किया गया। साथ ही राष्ट्रीय सेवा योजना के विश्वविद्यालय कार्यक्रम समन्वयक डॉ. राहुल कुमार की नई शिक्षा नीति पर आधारित पुस्तक तथा डॉ. मयंक वत्स की पुस्तक ‘चाइल्ड लेबर’ का भी विमोचन हुआ।
अपने संबोधन में कुलपति ने विद्यार्थियों से अनुसंधान, नवाचार और कौशल विकास को अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा, जब युवा नई शिक्षा नीति की भावना के अनुरूप आगे बढ़ेंगे।
अधिषद् सदस्य डॉ. मृत्युंजय सिंह गंगा ने विद्यार्थियों को खेल, सांस्कृतिक और शैक्षणिक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी की प्रेरणा दी। संस्थापक प्राचार्य डॉ. मणिनाथ चौधरी ने महाविद्यालय की भूमि की सुरक्षा के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन और वर्तमान प्राचार्य की पहल की सराहना की, जबकि पूर्व प्राचार्य डॉ. मिहिर मोहन मिश्रा ‘सुमन’ ने शिक्षक, कर्मचारी और विद्यार्थियों के समन्वय को संस्थान की सफलता का आधार बताया।
कार्यशाला में भाग लेने वाले विद्यार्थियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। कुलपति ने विद्यालय के निदेशक संजय कुमार पासवान को उत्कृष्ट शैक्षिक योगदान के लिए प्रशस्ति-पत्र भी प्रदान किया।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. राहुल कुमार ने किया, आयोजन सचिव डॉ. मणिलाल पासवान थे तथा अंत में डॉ. मयंक वत्स ने धन्यवाद ज्ञापन दिया। कार्यक्रम का समापन सामूहिक रूप से बिहार गीत के गायन के साथ हुआ।
















