


नवगछिया के ‘कन्हैया बम’ बने आस्था की मिसाल
सावन में सप्ताह के छह दिन कांवर पथ पर बीतते हैं शिक्षक कन्हैया कुमार के, सिर्फ शनिवार को रहते हैं घर
नवगछिया। शिवभक्ति जब साधना बन जाती है तो कठिन से कठिन राह भी आसान लगने लगती है। नवगछिया पुलिस जिला के गोपालपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत गोसाई गांव पंचायत के संत नगर टोला निवासी शिक्षक कन्हैया कुमार, जिन्हें कांवर पथ पर लोग ‘कन्हैया बम’ के नाम से जानते हैं, सावन में अपनी अनूठी तपस्या के कारण हजारों शिवभक्तों के बीच विशेष पहचान बना चुके हैं। वे हर दूसरे दिन बाबा बैद्यनाथ धाम, देवघर में जलाभिषेक करते हैं और सप्ताह में तीन बार सुल्तानगंज से लगभग 105 किलोमीटर की पैदल यात्रा महज 18 घंटे में पूरी कर बाबा का अभिषेक करते हैं।
कन्हैया बम की दिनचर्या सामान्य कांवरियों से बिल्कुल अलग है। वे रविवार को उत्तरवाहिनी गंगा से जल भरकर यात्रा शुरू करते हैं और सोमवार को बाबा बैद्यनाथ का जलाभिषेक करते हैं। इसके बाद मंगलवार को पुनः जल उठाते हैं और बुधवार को जलाभिषेक करते हैं। फिर गुरुवार को एक बार फिर कांवर यात्रा प्रारंभ कर शुक्रवार को बाबा धाम पहुंचकर जल चढ़ाते हैं। पूरे सावन में शनिवार ही एकमात्र दिन होता है, जब वे अपने घर पर रहते हैं। शेष छह दिन उनका जीवन शिवभक्ति और कांवर पथ को समर्पित रहता है।

इतना ही नहीं, सावन के अलावा भी प्रत्येक मास की पूर्णिमा पर वे सुल्तानगंज से जल भरकर बाबा बैद्यनाथ धाम पहुंचते हैं। वर्षों से जारी यह क्रम अब उनकी पहचान बन चुका है। कांवर पथ पर सेवा देने वाले शिविरों में उनके आगमन की विशेष प्रतीक्षा की जाती है।
बेलहर (बांका) स्थित प्रसिद्ध जोड़ी पार महादेव बम काली के समीप संचालित महाकाल बोल बम सेवा समिति के अध्यक्ष अवधेश कुमार कहते हैं, “कन्हैया बम हमारी समिति के लिए कोहिनूर हैं। सेवा तो हर कांवरिया की होती है, लेकिन उनके आने का इंतजार अलग उत्साह के साथ किया जाता है। जैसे ही उनके पहुंचने की सूचना मिलती है, सैकड़ों सेवादार उनकी सेवा के लिए तैयार हो जाते हैं। यह सम्मान उनकी वर्षों की तपस्या और शिवभक्ति का परिणाम है।”
समिति के सदस्य राकेश झा बताते हैं, “कन्हैया बम की भक्ति अद्भुत है। वे सावन में सप्ताह में तीन बार जलाभिषेक करते हैं। रविवार, मंगलवार और गुरुवार को जल उठाते हैं, जबकि सोमवार, बुधवार और शुक्रवार को बाबा बैद्यनाथ का जलाभिषेक करते हैं। शनिवार को ही वे घर पर रहते हैं। उनका अधिकांश समय बाबा के मार्ग और भक्ति में ही बीतता है।”
कांवर पथ पर वर्षों से सेवा देने वाले कार्यकर्ताओं का कहना है कि कन्हैया बम की तेज चाल, अनुशासित यात्रा और लगातार सप्ताह में तीन बार 18 घंटे के भीतर देवघर पहुंचने का संकल्प उन्हें हजारों कांवरियों से अलग पहचान दिलाता है। उनकी एक झलक पाने के लिए भी श्रद्धालु उत्सुक रहते हैं।
नवगछिया और भागलपुर क्षेत्र के लोगों के लिए कन्हैया बम आज केवल एक शिवभक्त नहीं, बल्कि अटूट आस्था, अनुशासन, कठिन तपस्या और संकल्प के जीवंत प्रतीक बन चुके हैं। उनकी यह साधना आने वाली पीढ़ियों के लिए भी शिवभक्ति की प्रेरणादायक मिसाल है।
















