5
(3)

नवगछिया। लोक आस्था और अंग क्षेत्र की समृद्ध लोक परंपरा से जुड़ा सती बिहुला-विषहरी पूजन समारोह सोमवार को नवगछिया में श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ आयोजित किया गया। हर वर्ष की परंपरा के अनुसार 17 अगस्त को सती बिहुला के मायके आगमन के अवसर पर शहर के विभिन्न पूजा स्थलों पर विशेष आयोजन हुए। मान्यता के अनुसार लोक साहित्य में बिहुला का मायका नवगछिया के उजानी गांव को माना जाता है। इसी परंपरा के तहत बिहुला के नवगछिया आगमन पर लोगों ने उन्हें बेटी के रूप में सम्मान देते हुए श्रद्धा और आस्था के साथ पूजा-अर्चना कर स्वागत किया।

पोस्ट ऑफिस के समीप स्थित बिहुला चौक पर आयोजित मुख्य पूजन समारोह में भगवान शंकर की मानस पुत्री माता विषहरी की पांच बहनों के साथ सती बिहुला को ससम्मान सिंहासन पर विराजमान कराया गया और वैदिक विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई। सुबह से ही पूजा स्थल पर श्रद्धालुओं की भीड़ जुटने लगी। बड़ी संख्या में महिलाओं ने डलिया चढ़ाकर माता की पूजा की और परिवार की सुख-समृद्धि एवं मंगलकामना की। पूरे दिन पूजा-अर्चना का सिलसिला चलता रहा, जबकि देर शाम भजन-कीर्तन एवं शिव चर्चा का आयोजन किया गया।

पूजन समारोह में नवगछिया के प्रशासनिक पदाधिकारियों के साथ भागलपुर केंद्रीय मनसा पूजा समिति के पदाधिकारियों ने भी मंदिर परिसर पहुंचकर माता की पूजा-अर्चना की। पंडित शैलेश झा ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विधिवत पूजा संपन्न कराई। आयोजन समिति की ओर से पूजा स्थल पर शिव चर्चा का आयोजन भी किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं ने भाग लेकर भक्ति और आध्यात्मिक वातावरण को और अधिक भक्तिमय बना दिया।

बिहुला पूजन को लेकर नवगछिया के अन्य पूजा स्थलों पर भी विशेष तैयारी की गई है। हड़ियापट्टी स्थित मंदिर में देर शाम माता की प्रतिमा स्थापित कर पूजन शुरू किया गया, जबकि मुसहरी पट्टी और मक्खातकिया में भी प्रतिमा स्थापित कर पूजा-अर्चना का सिलसिला शुरू हो गया है। विभिन्न पूजा स्थलों पर श्रद्धालुओं की आवाजाही से क्षेत्र में उत्सवी माहौल बना हुआ है।

अंग क्षेत्र की लोकगाथा में सती बिहुला का विशेष स्थान है। लोकमान्यता के अनुसार पति के जीवन की रक्षा और अपने संकल्प के लिए बिहुला ने कठिन संघर्ष किया था। इसी लोकगाथा से जुड़ी परंपरा में 17 अगस्त को उनके मायके आगमन का विशेष महत्व माना जाता है। नवगछिया में आज भी इस परंपरा को पूरी श्रद्धा और सम्मान के साथ निभाया जाता है। स्थानीय लोगों की मान्यता है कि जिस प्रकार बेटी के ससुराल से मायके लौटने पर उसका स्वागत और सम्मान किया जाता है, उसी भाव से सती बिहुला का भी नवगछिया में स्वागत किया जाता है।

आयोजन समिति से जुड़े मुकेश राणा ने बताया कि पूजा समारोह का समापन 18 अगस्त की शाम भव्य विसर्जन यात्रा के साथ होगा। विसर्जन यात्रा के दौरान श्रद्धालु पारंपरिक तरीके से माता को विदाई देंगे। उन्होंने कहा कि सती बिहुला-विषहरी पूजन नवगछिया की धार्मिक आस्था के साथ-साथ यहां की समृद्ध लोक संस्कृति और परंपरा का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। वर्षों से चली आ रही इस परंपरा में प्रत्येक वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं और पूरे उत्साह के साथ पूजा-अर्चना करते हैं।

Aapko Yah News Kaise Laga.

Click on a star to rate it!

Average rating 5 / 5. Vote count: 3

No votes so far! Be the first to rate this post.

Share: