


@ टिकट से बढी आय, सुविधा क्यों नहीं?
प्रदीप विद्रोही
भागलपुर। भागलपुर-साहिबगंज रेलखंड को लेकर यात्रियों की शिकायत अब सिर्फ ट्रेनों की कमी तक सीमित नहीं रही है। रेल यात्री संघर्ष समिति ने रेलवे के सामने एक सीधा सवाल खड़ा किया है—जिस रेलखंड के स्टेशनों से रेलवे को करोड़ों रुपये की आमदनी हो रही है, वहां यात्रियों को महत्वपूर्ण ट्रेनों का ठहराव क्यों नहीं मिल रहा है?
समिति ने हावड़ा-नटेसर (राजगीर) त्रि-साप्ताहिक स्पेशल ट्रेन संख्या 03029/03030 के भागलपुर और साहिबगंज के बीच महत्वपूर्ण स्टेशनों पर ठहराव की मांग तेज कर दी है। समिति का कहना है कि इस रेलखंड के कई प्रमुख स्टेशन यात्री और राजस्व, दोनों लिहाज से महत्वपूर्ण हैं, लेकिन इसके बावजूद इस ट्रेन का लाभ बड़ी आबादी को सीधे नहीं मिल पा रहा है।
कमाई के आंकड़े खुद बता रहे हैं कि स्टेशन कितने महत्वपूर्ण हैं। रेल यात्री संघर्ष समिति की ओर से जारी आंकड़ों पर नजर डालें तो भागलपुर-साहिबगंज क्षेत्र के कई स्टेशनों से रेलवे को अच्छी-खासी आय होती है।

भागलपुर स्टेशन की आय 1 अरब 81 करोड़ रुपये से अधिक बताई गई है। वहीं, सुल्तानगंज से 20 करोड़ 80 लाख रुपये से अधिक, साहिबगंज से 16 करोड़ 48 लाख रुपये से अधिक और कहलगांव से 10 करोड़ 70 लाख रुपये से अधिक की आय का आंकड़ा दिया गया है। पीरपैंती स्टेशन से करीब 8.08 करोड़ रुपये, मिर्जाचौकी से 3.11 करोड़ रुपये, घोघा से 1.82 करोड़ रुपये, एकचारी से 1.77 करोड़ रुपये और शिवनारायणपुर से 1.23 करोड़ रुपये से अधिक की आय बताई गई है।
यही आंकड़े अब यात्रियों की मांग का आधार बन रहे हैं। समिति का तर्क है कि जब इन स्टेशनों से रेलवे को राजस्व मिल रहा है, तो यहां यात्रियों की जरूरत के मुताबिक ट्रेनों का ठहराव भी होना चाहिए।
भागलपुर से साहिबगंज के बीच कहलगांव, पीरपैंती, घोघा, एकचारी, मिर्जाचौकी, सबौर और शिवनारायणपुर जैसे स्टेशन बड़ी संख्या में यात्रियों की आवाजाही के केंद्र हैं। स्थानीय यात्रियों का कहना है कि ट्रेनें इन स्टेशनों से गुजरती तो हैं, लेकिन महत्वपूर्ण ट्रेनों का ठहराव नहीं होने के कारण उन्हें दूसरे विकल्पों पर निर्भर रहना पड़ता है। खासकर नौकरीपेशा लोगों, विद्यार्थियों, व्यापारियों और रोजाना सफर करने वाले यात्रियों के लिए ट्रेन के समय और ठहराव का सीधा असर उनकी दिनचर्या पर पड़ता है।
समिति ने इसी मुद्दे को उठाते हुए कहा है – “रुकावट नहीं, ठहराव मांगते हैं; अपने हक का पड़ाव मांगते हैं।”
रेल यात्री संघर्ष समिति की तीन प्रमुख मांगें निम्नलिखित हैं –
पहली मांग – महत्वपूर्ण स्टेशनों पर ठहराव:
03029/03030 हावड़ा-नटेसर त्रि-साप्ताहिक स्पेशल ट्रेन का भागलपुर-साहिबगंज के बीच महत्वपूर्ण स्टेशनों पर ठहराव दिया जाए। समिति ने खास तौर पर कहलगांव, पीरपैंती, घोघा, एकचारी, मिर्जाचौकी और शिवनारायणपुर जैसे स्टेशनों को ठहराव के दायरे में लाने की मांग की है।
दूसरी मांग – स्पेशल नहीं, नियमित ट्रेन बने:
समिति का कहना है कि इस ट्रेन को सिर्फ स्पेशल के तौर पर चलाने के बजाय नियमित ट्रेन बनाया जाए और प्रतिदिन इसका परिचालन किया जाए। इससे यात्रियों को सप्ताह में कुछ दिनों के बजाय रोजाना यात्रा का विकल्प मिल सकेगा।
तीसरी मांग – शाम की नई पैसेंजर ट्रेन:
साहिबगंज से भागलपुर के लिए शाम करीब पांच बजे नई मेमू/डेमू पैसेंजर ट्रेन चलाने की मांग भी की गई है।
यह मांग खास तौर पर उन यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जो दिनभर काम या कारोबार करने के बाद शाम में भागलपुर लौटना चाहते हैं। इस रेलखंड पर ट्रेनें सिर्फ लंबी दूरी की यात्रा का माध्यम नहीं हैं। आसपास के जिलों और कस्बों के हजारों लोगों के लिए यही ट्रेनें रोजगार, शिक्षा, कारोबार और इलाज तक पहुंचने का सबसे व्यावहारिक साधन हैं।
किसी छात्र को समय पर कॉलेज पहुंचना हो, कर्मचारी को रोज कार्यालय जाना हो, व्यापारी को भागलपुर या साहिबगंज पहुंचना हो या किसी मरीज को बड़े अस्पताल तक लाना हो – ट्रेन के ठहराव और समय का महत्व सीधे उनकी जिंदगी से जुड़ा है।
ऐसे में यात्रियों का सवाल साफ है—रेलवे की कमाई और यात्री सुविधा के बीच संतुलन कब बनेगा?
आखिर जिस रेलखंड से रेलवे को करोड़ों रुपये का राजस्व मिल रहा है, वहां के यात्रियों को अपनी जरूरत की ट्रेन के लिए सिर्फ गुजरती हुई ट्रेन देखने के बजाय एक ठहराव का हक कब मिलेगा?
















