


प्रदीप विद्रोही
भागलपुर। तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (टीएमबीयू) के पेंशनरों की मुश्किलें कम होने के बजाय बढ़ती जा रही हैं। पेंशन ग्रांट लगातार रोके जाने और छह महीने से फरवरी की पेंशन लंबित रहने के बीच अब रजिस्ट्रार सह डी.डी.ओ. के कथित बयान ने पेंशनरों का गुस्सा और भड़का दिया है। पेंशनर संघर्ष मंच (पीएसएम) ने इसे पेंशनरों की उपेक्षा की पराकाष्ठा बताते हुए आंदोलन का ऐलान किया है।

मंच के सह-संयोजक अमरेन्द्र झा ने कहा कि विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार ही डी.डी.ओ. हैं। पेंशन भुगतान और सरकार को उपयोगिता प्रमाणपत्र (यूसी) भेजने की प्रक्रिया में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है। ऐसे में पेंशन ग्रांट रुकने के मामले में यह कहना कि ‘मुझे पता नहीं, एफओ सही सूचना देंगे’, पेंशनरों के प्रति जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने जैसा है।
पीएसएम का आरोप है कि वित्त विभाग को विश्वविद्यालय द्वारा पूर्व के वर्षों में सरकारी पेंशन अनुदान से फिक्स्ड डिपॉजिट किए जाने की सूचना मिलने के बाद वर्ष 2024-25, 2025-26 और अब 2026-27 में पेंशन ग्रांट को लेकर स्थिति गंभीर बनी हुई है। मंच का कहना है कि इस पूरे प्रकरण में रजिस्ट्रार के डी.डी.ओ. के रूप में दायित्व को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
‘पेंशन का इंतजार कब तक?’
पेंशनरों की नाराजगी इस बात को लेकर भी है कि फरवरी माह से उनकी पेंशन लंबित है और अब सरकार के ताजा अनुदान पत्र में भी टीएमबीयू के लिए अगस्त माह की पेंशन का उल्लेख नहीं होने की बात सामने आई है। इससे पेंशनरों के बीच भविष्य को लेकर चिंता और बढ़ गई है।
रजिस्ट्रार के बयान से नाराज पेंशनर संघर्ष मंच ने आपात बैठक कर जोरदार आंदोलन शुरू करने का सर्वसम्मत निर्णय लिया है। मंच ने कुलपति और वित्त सलाहकार (एफए) से तत्काल हस्तक्षेप कर पेंशनरों के प्रतिनिधिमंडल से वार्ता करने और रुके हुए अनुदान के समाधान के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की है।
अमरेन्द्र झा ने कहा कि पेंशनर वर्षों की सेवा के बाद अपने अधिकार की पेंशन के लिए संघर्ष कर रहे हैं। ऐसे में जिम्मेदार पदाधिकारी द्वारा मामले से अनभिज्ञता जताना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। मंच ने चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो पेंशनर अपने आंदोलन को और तेज करने के लिए बाध्य होंगे।
















