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प्रदीप विद्रोही
भागलपुर। अपने बेबाक और कई बार विवादों में घिरे बयानों के कारण हमेशा सुर्खियों में रहने वाले गोपालपुर विधानसभा क्षेत्र के पूर्व जेडीयू विधायक गोपाल मंडल एक बार फिर बिहार की राजनीति में चर्चा के केंद्र में हैं। इस बार वजह उनका कोई बयान नहीं, बल्कि कांग्रेस से जुड़ने की तस्वीरें और सोशल मीडिया पोस्ट हैं।
सोशल मीडिया पर सामने आई तस्वीरों में गोपाल मंडल कांग्रेस के शीर्ष संगठन AICC परिसर में नजर आ रहे हैं। इसके बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई कि उन्होंने कांग्रेस का दामन थाम लिया है। हालांकि, गोपाल मंडल की ओर से अब तक इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
पप्पू यादव की पोस्ट ने बढ़ाया सियासी सस्पेंस
पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव की सोशल मीडिया पोस्ट के बाद गोपाल मंडल के कांग्रेस से जुड़ने की चर्चा को और बल मिला। पोस्ट के बाद समर्थकों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं के बीच तरह-तरह की अटकलें लगने लगीं।
वहीं कांग्रेस से जुड़े रंजन यादव ने सोशल मीडिया पर गोपाल मंडल का स्वागत करते हुए उन्हें बधाई दी। उन्होंने लिखा – ‘गोपालपुर के पूर्व विधायक एवं अति पिछड़ा समाज के सम्मानित नेता गोपाल मंडल जी का कांग्रेस परिवार में हार्दिक स्वागत!’ इस पोस्ट ने उन चर्चाओं को और हवा दे दी है, जिनमें गोपाल मंडल के कांग्रेस में शामिल होने की बात कही जा रही है।

AICC में मौजूदगी को क्यों माना जा रहा अहम:
गोपाल मंडल का AICC में स्वागत किए जाने की तस्वीरें सामने आना महज औपचारिक मुलाकात से ज्यादा बड़ा राजनीतिक संकेत माना जा रहा है। कांग्रेस की ओर से उनके सामाजिक और राजनीतिक प्रभाव को देखते हुए उन्हें अपने साथ जोड़ना अति पिछड़ा समाज के बीच संगठन की पकड़ मजबूत करने की रणनीति के तौर पर देखा जा सकता है।
बताया जा रहा है कि कांग्रेस खेमे में उनके आने से संगठन को स्थानीय स्तर पर नई ऊर्जा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। हालांकि, गोपाल मंडल की भूमिका क्या होगी और पार्टी में उन्हें किस जिम्मेदारी से जोड़ा जाएगा, इस पर अभी स्थिति पूरी तरह साफ नहीं है।
विवादों से लेकर विधानसभा तक का सफर:
गोपाल मंडल का राजनीतिक सफर हमेशा चर्चा में रहा है। गोपालपुर विधानसभा क्षेत्र से जेडीयू विधायक रहते हुए वह अपने बयानों और राजनीतिक अंदाज के कारण लगातार सुर्खियों में बने रहे। कई मौकों पर उनके बयान राजनीतिक बहस का विषय बने और पार्टी को भी उनके बयानों पर सफाई देनी पड़ी।
इसके बावजूद क्षेत्रीय राजनीति में उनकी अपनी पहचान और समर्थकों का आधार माना जाता है। यही वजह है कि अगर कांग्रेस में उनके शामिल होने की खबर आधिकारिक रूप से पुष्ट होती है, तो इसे सिर्फ एक नेता का दल बदलना नहीं, बल्कि गोपालपुर और आसपास के इलाके की सामाजिक-राजनीतिक समीकरणों में संभावित बदलाव के रूप में देखा जाएगा।
क्या कांग्रेस को मिलेगा ‘गोपाल मंडल फैक्टर’:
बिहार की राजनीति में जातीय और सामाजिक समीकरण हमेशा महत्वपूर्ण रहे हैं। गोपाल मंडल को अति पिछड़ा समाज के बेबाक नेताओं में गिना जाता है। ऐसे में कांग्रेस के साथ उनका जुड़ाव पार्टी के लिए खासकर अंग क्षेत्र में एक नया राजनीतिक समीकरण तैयार करने की कोशिश हो सकता है।
हालांकि, अभी सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि गोपाल मंडल ने खुद कांग्रेस में शामिल होने की आधिकारिक घोषणा नहीं की है। इसलिए तस्वीरों और नेताओं के सोशल मीडिया पोस्ट के आधार पर चल रही चर्चाओं को फिलहाल राजनीतिक संकेत के तौर पर ही देखा जा रहा है।
अब निगाह गोपाल मंडल के अगले बयान पर है। अगर वह खुद कांग्रेस में शामिल होने की पुष्टि करते हैं, तो बिहार की राजनीति में उनकी यह नई पारी आने वाले दिनों में कितना असर डालती है, यह देखने वाली बात होगी। फिलहाल AICC की तस्वीरों और कांग्रेस नेताओं के स्वागत संदेश ने सियासी गलियारों में इतना जरूर पूछवा दिया है – क्या गोपाल मंडल ने JDU छोड़कर कांग्रेस के साथ अपनी अगली राजनीतिक पारी की पटकथा लिख दी है।
















