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@ भागलपुर स्थित एमजी रोड के एक चश्मे के शोरूम में लगे ‘BUY 1 GET 1 FREE’ ऑफर ने अब सवाल खड़े कर दिए हैं।
प्रदीप विद्रोही
भागलपुर। इन दिनों शहर से गांवों तक अलग तरह के आकर्षक लोक लुभावन ऑफर पर ग्राहकों को ठगी का शिकार होना पड़ रहा है। आरटीआई कार्यकर्ता अजीत कुमार सिंह बताते हैं शहर के एमजी रोड स्थित एक चश्मे के शोरूम में लगे ‘BUY 1 GET 1 FREE’ के विज्ञापन ने अब ऑफर की चमक से ज्यादा उसकी गणित पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला एक ग्राहक द्वारा शोरूम में चश्मे के फ्रेम की कीमत और उसी उत्पाद की डिजिटल बिक्री कीमत में कथित अंतर सामने आने के बाद चर्चा में आया है।
आरटीआई कार्यकर्ता अजीत कुमार सिंह के मुताबिक, उन्होंने शोरूम में एक फ्रेम पसंद किया, जिसकी कीमत ₹3,000 बताई गई। इसके साथ दूसरा फ्रेम ‘FREE’ देने की बात कही गई। पहली नजर में यह सौदा आकर्षक लगा – एक की कीमत में दो फ्रेम मिलने का दावा।

लेकिन असली सवाल तब उठा, जब उसी मॉडल की कीमत शोरूम के आधिकारिक डिजिटल ऐप पर देखी गई। वहां कथित तौर पर वही फ्रेम ₹1,500 में उपलब्ध था। ऐसे में ग्राहक का सवाल है कि यदि दो फ्रेम की कीमत डिजिटल ऐप पर कुल ₹3,000 बैठती है, तो शोरूम में ₹3,000 की कीमत वाले एक फ्रेम के साथ दूसरे को ‘FREE’ बताने की वास्तविक बचत कितनी है।
यहीं से ‘फ्री ऑफर’ की मार्केटिंग और वास्तविक कीमत के बीच का सवाल खड़ा होता है। सवाल यह भी है कि ग्राहक को किसी वस्तु पर ‘FREE’ का लाभ बताया जा रहा है या वास्तविक कीमत को अलग तरीके से प्रस्तुत कर ऑफर को ज्यादा आकर्षक बनाया जा रहा है।
ऑफर के बाद शुरू हुआ अतिरिक्त खर्च का खेल:
अजीत कुमार सिंह का आरोप है कि मामला केवल फ्रेम की कीमत तक सीमित नहीं रहा। खरीदारी के दौरान ₹500 की मेंबरशिप, एंटी-ग्लेयर, ब्लू-कट और लेंस प्रोटेक्शन जैसी अतिरिक्त सुविधाओं की पेशकश भी की गई, जिसके बाद अंतिम बिल की रकम और बढ़ती चली गई। यानी जिस खरीदारी की शुरुआत ‘एक खरीदिए, एक मुफ्त पाइए’ जैसे आकर्षक ऑफर से हुई, उसमें ग्राहक के सामने बाद में कई अतिरिक्त खर्च भी जुड़ते गए।
हालांकि इन आरोपों पर संबंधित प्रतिष्ठान का पक्ष सामने आना अभी बाकी है। ऐसे में पूरे मामले में अंतिम निष्कर्ष संबंधित दस्तावेजों, शोरूम की मूल्य नीति और प्रतिष्ठान के जवाब के आधार पर ही निकाला जा सकेगा।
शिकायत पहुंची उपभोक्ता मामलों के विभाग तक:
मामले को लेकर अजीत कुमार सिंह ने कथित तौर पर बिल, डिजिटल भुगतान के प्रमाण और आधिकारिक ऐप पर दिखाई गई कीमत के स्क्रीनशॉट सुरक्षित रखे हैं। इन दस्तावेजों के आधार पर उन्होंने मामले की शिकायत उपभोक्ता मामलों के विभाग में की है।
अब निगाह इस बात पर है कि शिकायत पर विभाग क्या संज्ञान लेता है और संबंधित प्रतिष्ठान की ओर से इस मूल्य अंतर तथा ‘BUY 1 GET 1 FREE’ ऑफर को लेकर क्या स्पष्टीकरण दिया जाता है।
ग्राहकों के लिए भी सबक:
अजीत कुमार सिंह इस झोल को समझाते हुए आगे कहते हैं कि यह मामला सामने आने के बाद उपभोक्ताओं के लिए भी एक महत्वपूर्ण सवाल खड़ा होता है। किसी भी ‘FREE’ या भारी छूट वाले ऑफर को देखकर तुरंत खरीदारी करने के बजाय उसकी वास्तविक कीमत की पड़ताल कितनी जरूरी है। ग्राहकों को खरीदारी से पहले ऑनलाइन और ऑफलाइन कीमतों की तुलना करनी चाहिए। ऑफर की शर्तें पढ़नी चाहिए, MRP और वास्तविक बिक्री मूल्य की जानकारी लेनी चाहिए तथा खरीदारी के बाद पूरा बिल जरूर लेना चाहिए। किसी विवाद की स्थिति में भुगतान का प्रमाण और ऑफर से जुड़े स्क्रीनशॉट सुरक्षित रखना भी उपयोगी हो सकता है।
क्योंकि बाजार में कभी-कभी ‘FREE’ शब्द सबसे ज्यादा आकर्षित करता है, लेकिन असली कहानी उसके पीछे छिपी कीमत में होती है।
अब देखना यह है कि ₹3,000 के दो फ्रेम में एक को ‘FREE’ बताने की इस गणित पर उपभोक्ता विभाग और संबंधित शोरूम की ओर से क्या जवाब सामने आता है।
















