


प्रदीप विद्रोही
भागलपुर। जिले के गोराडीह प्रखंड अंतर्गत मोहनपुर पंचायत के सियारगढ़ गांव की रहने वाली ब्यूटी बिहारी आज ग्रामीण महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता और बदलाव की सशक्त मिसाल बन चुकी हैं। कभी घरेलू जिम्मेदारियों तक सीमित रहने वाली ब्यूटी आज ‘दीदी की नर्सरी’ की सफल उद्यमी और जीविका की सामुदायिक उत्प्रेरक के रूप में अपनी पहचान बना चुकी हैं।

ब्यूटी बिहारी के पति नवीन कुमार सिंह खेती-किसानी का कार्य करते हैं। सीमित जमीन और पारंपरिक खेती के कारण परिवार की आय सीमित थी। घरेलू जिम्मेदारियों और सामाजिक संकोच के कारण ब्यूटी के लिए घर से बाहर निकलकर स्वतंत्र रूप से काम करना भी आसान नहीं था। ऐसे समय में जीविका से जुड़ना उनके जीवन में बदलाव की शुरुआत साबित हुआ।
जीविका से जुड़कर बढ़ा आत्मविश्वास:
ब्यूटी बिहारी 19 मार्च 2018 को सागर जीविका स्वयं सहायता समूह की सदस्य बनीं। समूह से जुड़ने के बाद उन्हें नियमित बैठकों, प्रशिक्षण और सामूहिक सहयोग के माध्यम से बचत, ऋण प्रबंधन, आजीविका विकास तथा उद्यमिता की जानकारी मिली। जीविका के माध्यम से मिले मार्गदर्शन ने उनके आत्मविश्वास को बढ़ाया।
इंटर तक शिक्षित ब्यूटी बिहारी को जीविका के 10 से 12 स्वयं सहायता समूहों की बैठक कराने तथा लेखांकन पुस्तिकाओं के संधारण के लिए सामुदायिक उत्प्रेरक के रूप में चयनित किया गया। इसके लिए उन्हें आवश्यक प्रशिक्षण भी दिया गया।
आज वह गांव-गांव जाकर महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़ने, सरकारी योजनाओं की जानकारी देने और आजीविका गतिविधियों के लिए प्रेरित करने का कार्य करती हैं। इस कार्य से उन्हें प्रतिमाह लगभग 10 हजार रुपये मानदेय प्राप्त होता है।
2021 में शुरू की ‘दीदी की नर्सरी’:
प्रशिक्षण और प्रेरणा के बाद ब्यूटी बिहारी ने वर्ष 2021 में ‘दीदी की नर्सरी’ की शुरुआत की। उन्हें मनरेगा के तहत नर्सरी का आवंटन किया गया तथा वन विभाग की ओर से पौध उत्पादन एवं नर्सरी प्रबंधन का प्रशिक्षण दिया गया।
पहले वर्ष उन्होंने करीब 25 हजार पौधे तैयार किए। नर्सरी की स्थापना और पौधों की देखभाल पर लगभग 1.50 लाख रुपये खर्च हुए। मौसम और अन्य कारणों से करीब 6 हजार पौधे नष्ट हो गए। इसके बाद 14 हजार पौधों की बिक्री मनरेगा को 11 रुपये प्रति पौधे की दर से की गई, जिससे 1.61 लाख रुपये की आय हुई और लगभग 11 हजार रुपये का लाभ प्राप्त हुआ और लगातार बढ़ता गया कारोबार और मुनाफा।
पिछले पांच वर्षों में ब्यूटी बिहारी की ‘दीदी की नर्सरी’ ने उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। ब्यूटी बिहारी घर में खेती और पशुपालन भी करती हैं।

महिलाओं के लिए बनीं प्रेरणा:
ब्यूटी बिहारी की ‘दीदी की नर्सरी’ आज ग्रामीण महिला उद्यमिता का उत्कृष्ट उदाहरण है। सीमित संसाधनों से शुरू किया गया उनका प्रयास अब लाखों रुपये के कारोबार और करीब 10 लाख रुपये के संचयी शुद्ध लाभ वाले उद्यम में बदल चुका है।













