


प्रदीप विद्रोही
भागलपुर। लगातार बारिश और गंगा के बढ़ते जलस्तर ने भागलपुर में प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। बाढ़ आने का इंतजार करने के बजाय प्रशासन ने उससे पहले ही सुरक्षित ठिकानों की तलाश और तैयारी शुरू कर दी है। मकसद साफ है – अगर पानी आबादी की ओर बढ़ा तो लोगों को आनन-फानन में नहीं, बल्कि पहले से तैयार सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया जा सके।
सदर अनुमंडल के सुल्तानगंज, नाथनगर, सबौर और गोराडीह को बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के तौर पर चिह्नित किया गया है। वहीं शाहकुंड को आंशिक रूप से बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में रखा गया है।
इन इलाकों में अब प्रशासन की नजर सिर्फ नदी के जलस्तर पर नहीं, बल्कि उन ऊंचे स्थानों पर भी है, जहां जरूरत पड़ने पर लोगों को शिफ्ट किया जा सके। प्रखंड विकास पदाधिकारी, अंचलाधिकारी और थानाध्यक्षों को अपने-अपने क्षेत्रों में ऐसे स्थलों की पहचान कर उनकी साफ-सफाई कराने का निर्देश दिया गया है।

बाढ़ से पहले ‘शिफ्टिंग प्लान’ तैयार:
प्रशासन का मानना है कि आपदा के समय सबसे बड़ी चुनौती लोगों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने की होती है। ऐसे में ऊंचे स्थलों को पहले से चिन्हित और उपयोग के योग्य रखने से राहत एवं बचाव अभियान को तेजी मिल सकती है।
जिलाधिकारी ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि चिन्हित स्थलों की साफ-सफाई और पूर्व तैयारी में कोई ढिलाई न हो। जरूरत पड़ने पर यही स्थान बाढ़ प्रभावित परिवारों के लिए तत्काल सुरक्षित आश्रय बन सकेंगे। यानी इस बार प्रशासन की रणनीति पानी बढ़ने के बाद तैयारी करने की नहीं, बल्कि पानी से पहले ही सुरक्षित ठिकाने तैयार रखने की है।
















