


भागलपुर में दोनों के तेवर समान, रु70 प्रति किग्रा
प्रदीप विद्रोही
भागलपुर। सोमरस और सोना छोड़िए, भागलपुर में अब सबसे कीमती वस्तु आपकी रसोई के कोने में रखी चीनी और टोकरी में पड़ा प्याज बन चुका है। महंगाई के इस ‘स्वर्ण युग’ में आखिरकार समाजवाद आ ही गया – अब गरीब-अमीर, तीखा-मीठा सब एक बराबर है! शहर के गिरधारी साह हाट से लेकर शहर की तंग गलियों तक चीनी और प्याज दोनों ₹70 प्रति किलो के शाही सिंहासन पर एक साथ विराजमान हैं। ग्रामीण इलाके में भी प्याज, चीनी के तेवर इस कडक से भी ऊपर। किसी-किसी कोने में प्याज के तेवर थोड़े कम, यानी ₹65 प्रति किलो हैं। अब अपनों को चाय पर बुलाना भी मुश्किल।

अब गृहिणियों के सामने एक नया यक्ष प्रश्न खड़ा हो गया है कि जब दोनों का भाव एक ही है, तो सुबह की चाय में चीनी डालें या प्याज का तड़का लगाएं।
आम जनता अब बाजार में ‘रुपया’ नहीं, अपना कलेजा हाथ में लेकर निकल रही है। गली-मोहल्ले के किराना दुकानदार ग्राहकों को चीनी और प्याज ऐसे तौलकर दे रहे हैं, मानो किसी प्रतिष्ठित आभूषण की दुकान में 24 कैरेट सोने की नाप-जोख हो रही हो। थोक मंडी के कारोबारी दबी जुबान में कह रहे हैं कि ‘आवक कम है’, जबकि आम जनता का मानना है कि उनकी जेब में अब सांसें ही कम बची हैं। शहर में रहकर पढ़ाई करने वाले छात्रों का बजट इतना डगमगा गया है कि अब वे किताबों के पन्नों के बीच महंगे प्याज के छिलके बतौर ‘एंटीक पीस’ सहेजकर रख रहे हैं।
महंगाई के इस तांडव का सबसे पहला शिकार बना है बेचारा सलाद और नॉनवेज। शहर के बड़े-बड़े फाइव-स्टार शैली वाले रेस्टोरेंट अब प्याज के दो-चार छल्ले ऐसे परोस रहे हैं, जैसे किसी को वीआईपी सुरक्षा कवर दे रहे हों। सावन रहता तो प्याज के इस तेवर को धकियाया जा सकता था। उसे किचन से तडीपार किया जा सकता था। अब तो भादो मास आ गया है। प्याज की चाहत तो अब शुरू ही हुई है। एक माह भेज से इश्क का सिलसिला तो अब खत्म हो चुका है। अब नॉनवेज की चोट शुरू हुई है। ऐसे में प्याज की यह रंगदारी देखने लायक है।
इधर, सड़क किनारे ठेले और मेस चलाने वालों ने तो बड़ा ही ऐतिहासिक फैसला लिया है – उन्होंने अपने सलाद की प्लेट से प्याज को हमेशा-हमेशा के लिए ‘देश निकाला’ दे दिया है। ग्राहक जब प्लेट में सिर्फ मूली और खीरा देखकर आंखें तरेरते हैं, तो दुकानदार बेहद दार्शनिक अंदाज़ में जवाब देते हैं, ‘भैया, सेहत के लिए प्याज अच्छा नहीं होता, दिल का दौरा पड़ सकता है – खासकर तब, जब आप उसका बिल देखेंगे!’

















