


@ सबौर के मसाढ़ू गांव में करीब पांच ट्रैक्टर लकड़ी बरामद, नेपाल में आई प्रलयकारी बाढ़ के बाद गंगा के रास्ते बहकर पहुंचने का अनुमान।
प्रदीप विद्रोही
भागलपुर। नेपाल में पिछले दिनों आई प्रलयकारी बाढ़ और भारी बारिश का असर अब बिहार के गंगा तटवर्ती इलाकों में भी दिखाई देने लगा है। भागलपुर जिले के सबौर प्रखंड स्थित मसाढ़ू गांव में गंगा के किनारे बड़ी मात्रा में लकड़ियां बहकर पहुंची हैं। ग्रामीणों के मुताबिक, गंगा की तेज धारा के साथ बहकर आई इन लकड़ियों का ढेर देखकर लोग हैरान रह गए।

मसाढ़ू गांव में ग्रामीणों ने गंगा किनारे से बड़ी मात्रा में लकड़ियां इकट्ठा की हैं। किसी ने लग्घी से, बांस से तो किसी ने तैर कर लकड़ी निकाला। बताया जा रहा है कि अब तक करीब पांच ट्रैक्टर के बराबर लकड़ियां बरामद की जा चुकी हैं। इनमें छोटे-बड़े आकार की लकड़ियां शामिल हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि गंगा के जलस्तर और तेज बहाव के कारण ये लकड़ियां काफी दूर से बहकर यहां तक पहुंची होंगी। इकट्ठी की गई लकड़ियां जलावन के काम ही आ सकती है। अहले सुबह से ही गंगा में लकड़ियों का ढेर देखा जा रहा है।
नेपाल की बाढ़ के बाद बढ़ी गंगा की धार:
मालूम हो कि नेपाल में भारी बारिश के बाद भागलपुर के आसपास कई इलाकों में बाढ़ की स्थिति पैदा हुई थी। जो अब भी मौजूद है। बाढ़ के दौरान बड़ी संख्या में पेड़ और अन्य प्राकृतिक मलबा पानी के तेज बहाव में बह गया। अब यही मलबा नदियों के रास्ते आगे बढ़ते हुए गंगा में पहुंचने और वहां से भागलपुर के तटवर्ती क्षेत्रों तक आने की संभावना जताई जा रही है।
मसाढ़ू गांव में गंगा किनारे जमा लकड़ियां इसी प्राकृतिक आपदा के बाद नदी में बहकर आए मलबे का हिस्सा मानी जा रही हैं। हालांकि, लकड़ियों के वास्तविक स्रोत और इनके गंगा तक पहुंचने की स्थिति की आधिकारिक पुष्टि संबंधित विभाग की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
ग्रामीणों में कौतूहल, देखने के लिए पहुंच रहे लोग:
गंगा किनारे अचानक बड़ी संख्या में लकड़ियां पहुंचने की खबर फैलने के बाद आसपास के ग्रामीण भी मौके पर पहुंच रहे हैं। लोगों के बीच इस बात को लेकर चर्चा है कि इतनी बड़ी मात्रा में लकड़ियां आखिर कहां से बहकर आई हैं।
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि गंगा में बाढ़ या तेज बहाव के दौरान अक्सर पेड़-पौधे और अन्य सामान बहकर तटवर्ती इलाकों में पहुंचते हैं, लेकिन इस बार लकड़ियों की मात्रा काफी अधिक दिखाई दे रही है।
प्रशासन की निगरानी जरूरी:
इतनी बड़ी मात्रा में नदी से लकड़ियां मिलने के बाद प्रशासन और संबंधित विभागों की निगरानी भी जरूरी हो गई है। नदी से बरामद लकड़ियों को लेकर यह भी देखा जाना आवश्यक है कि कहीं इनमें हाल में काटे गए पेड़ों की लकड़ियां तो शामिल नहीं हैं। यदि किसी प्रकार की अवैध कटाई या तस्करी का मामला सामने आता है तो इसकी जांच की जा सकती है।

फिलहाल मसाढ़ू गांव में गंगा किनारे जमा लकड़ियां लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई हैं। नेपाल में आई बाढ़ की भयावहता का असर किस तरह नदी के बहाव के साथ सैकड़ों किलोमीटर दूर तक पहुंच सकता है, मसाढ़ू में दिखाई दे रहा यह नजारा उसकी एक तस्वीर पेश कर रहा है।
स्थानीय लोगों की नजर अब गंगा के जलस्तर और बहाव पर भी बनी हुई है। आने वाले दिनों में नदी के साथ और कितना मलबा भागलपुर के तटवर्ती इलाकों तक पहुंचता है, इस पर भी लोगों की निगाह रहेगी।
















