


@ 5वीं पुण्यतिथि पर उमड़ा जनसैलाब, पुष्प अर्पित करते ही छलक पड़े आंसू; करीब पांच हजार लोगों ने लिया शांतिभोज में हिस्सा।
प्रदीप विद्रोही
भागलपुर। कहलगांव का वह आंगन बुधवार को सिर्फ श्रद्धांजलि का स्थल नहीं था, बल्कि यादों और भावनाओं का समंदर बन गया था। पांच वर्ष पहले दुनिया से विदा हुए पूर्व बिहार विधानसभा अध्यक्ष सदानंद सिंह की पांचवीं पुण्यतिथि पर जब सैकड़ों लोग उनके निवास पहुंचे और तस्वीर पर पुष्प अर्पित किए, तो कई आंखें बरबस नम हो गईं। किसी के पास उन्हें याद करने के लिए शब्द कम पड़ रहे थे, तो कोई उनकी सहज मुस्कान और अपनत्व को याद कर भावुक हो उठा। सदानंद बाबू के साथ बिताए पलों को याद कर बुजुर्गों के होंठ फफक पडे।

कहलगांव, सन्हौला और गोराडीह प्रखंड से बड़ी संख्या में शुभचिंतक, कार्यकर्ता और सामाजिक-राजनीतिक क्षेत्र से जुड़े लोग श्रद्धांजलि देने पहुंचे। ऐसा लग रहा था मानो पांच साल का लंबा वक्त बीत जाने के बावजूद सदानंद बाबू लोगों की स्मृतियों से कहीं दूर नहीं हुए हैं।
तस्वीर पर फूल चढ़े, यादों में लौट आए सदानंद बाबू:
श्रद्धांजलि सभा में लोगों ने उनकी तस्वीर पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया। मौके पर डॉ. डीपी, जिप अध्यक्ष बीपीन मंडल, जिप उपाध्यक्ष प्रणव कुमार उर्फ पप्पू यादव, डॉ डीपी सिंह, सकलदेव मंडल, शिवकुवेर सिंह, डॉ. ऋचा अंगिक, लोजपा (आर) के युवा जिलाध्यक्ष पोली पासवान, सन्हौला प्रखंड अध्यक्ष विजय मंडल, गोराडीह प्रखंड अध्यक्ष किशोर कुमार, कहलगांव प्रखंड अध्यक्ष मो. शाहबाज आलम मुन्ना, अशोक सिन्हा, भानु यादव, अमन कुमार, विनय सिंह, मुमताज आलम, नीरज मंडल, विक्की यादव समेत बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
उनकी स्मृति में श्रद्धांजलि सभा, सुंदरकांड पाठ और शांतिभोज का आयोजन किया गया। परिजनों के साथ बड़ी संख्या में उनके समर्थक और शुभचिंतक कार्यक्रम में शामिल हुए।
स्थानीय विधायक एवं उनके पुत्र ई. शुभानंद मुकेश ने अपने पिता को याद करते हुए कहा कि सदानंद सिंह का निधन 8 सितंबर 2021 को हुआ था। उनके जाने के साथ बिहार की राजनीति ने एक ऐसे अनुभवी, सहज और जनसरोकारों से जुड़े नेता को खो दिया, जिन्होंने अपने लंबे सार्वजनिक जीवन में जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। बिहार विधानसभा अध्यक्ष के रूप में सदानंद सिंह की निष्पक्ष कार्यशैली और सदन की गरिमा बनाए रखने की परंपरा आज भी लोगों के बीच याद की जाती है।
परिजन वार्ड पार्षद अरविंद सिंह, विवेकानंद सिंह ने कहा कि सदानंद सिंह का व्यक्तित्व और कृतित्व आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बना रहेगा। जनसेवा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता, उच्च आदर्श और जनकल्याण की सोच ही उनकी सबसे बड़ी विरासत है।उन्होंने कहा कि पांच वर्ष गुजर गए, लेकिन उनके चाहने वालों के दिलों में उनकी यादें आज भी उसी तरह जीवंत हैं।
पुण्यतिथि कार्यक्रम की शुरुआत शाम पांच बजे श्रद्धांजलि सभा से हुई। इसके बाद शाम 5:30 बजे सुंदरकांड पाठ और 6:30 बजे शांतिभोज का आयोजन किया गया। शांतिभोज में करीब पांच हजार लोगों ने हिस्सा लिया।
परिजन वार्ड पार्षद अरविंद सिंह और विवेकानंद सिंह ने श्रद्धांजलि संदेश में कहा कि सदानंद सिंह की निष्पक्ष परंपरा परिवार और समाज के लिए प्रकाशपुंज है। उनके आदर्श, विचार और जनकल्याण की सोच आगे भी लोगों का मार्गदर्शन करती रहेगी।
वक्त बीतता गया, कैलेंडर के पन्ने बदलते गए, लेकिन सदानंद बाबू की यादें धुंधली नहीं हुईं। उनकी पुण्यतिथि पर उमड़ा जनसैलाब शायद यही कह रहा था – जनता के बीच जीने वाला जननेता शरीर से भले चला जाए, मगर उसकी सेवा और स्मृतियां लंबे समय तक लोगों के दिलों में जिंदा रहती हैं।

















