


प्रदीप विद्रोही
भागलपुर। गंगा की बाढ़ ने मैदान छीन लिया, रास्ते डुबो दिए और घर से निकलना मुश्किल कर दिया… लेकिन सेना में भर्ती होने का सपना देख रहे भागलपुर के युवाओं के हौसले को पानी नहीं डुबो सका।
जिस सैंडिस कंपाउंड मैदान में रोज दौड़, हाई जंप, लॉन्ग जंप और गोला फेंक की तैयारी होती थी, आज वहां 4 से 5 फीट तक पानी भरा है। ट्रैक डूब चुका है, जंप के लिए जगह नहीं बची और गोला फेंकने वाला हिस्सा भी पानी में समा गया है। बावजूद इसके अभ्यर्थियों ने अभ्यास रोकने से इनकार कर दिया है।

मैदान डूबा तो बदली ट्रेनिंग की जगह:
सेना भर्ती और मद्य निषेध दरोगा की शारीरिक दक्षता परीक्षा नजदीक है। महीनों की मेहनत के बाद अगर बाढ़ के कारण अभ्यास रुक जाए तो तैयारी पर असर पड़ना तय है। इसी वजह से युवाओं ने मैदान का इंतजार करने के बजाय जहां सूखी और सुरक्षित जगह मिली, वहीं ट्रेनिंग शुरू कर दी।
पैरा कमांडो से रिटायर रणजीत सोलंकी इन अभ्यर्थियों को प्रशिक्षण दे रहे हैं। मैदान डूबने के बाद उन्होंने भी ट्रेनिंग का तरीका बदला है। कभी बचे हुए सूखे हिस्से में अभ्यास कराया जाता है तो कभी युवाओं को किसी दूसरे सुरक्षित स्थान पर ले जाकर दौड़ और अन्य शारीरिक गतिविधियां कराई जाती हैं।
कहीं सड़क डूबी, कहीं नाव बनी सहारा:
बाढ़ की चुनौती सिर्फ मैदान तक सीमित नहीं है। कई इलाकों में रास्तों पर पानी भरने से प्रशिक्षण स्थल तक पहुंचना भी मुश्किल हो गया है। कुछ अभ्यर्थियों को नाव या दूसरे साधनों का सहारा लेकर अभ्यास के लिए पहुंचना पड़ रहा है।
अभ्यर्थियों का कहना है कि हालात कठिन हैं, लेकिन परीक्षा का समय किसी का इंतजार नहीं करता। इसलिए परिस्थितियां चाहे जितनी मुश्किल हों, तैयारी जारी रखना ही उनकी मजबूरी भी है और संकल्प भी।
अभिमन्यु का जज्बा – ‘सपना बड़ा है, मुश्किलें छोटी’
सेना में भर्ती की तैयारी कर रहे अभिमन्यु कुमार सिंह कहते हैं कि पहले सैंडिस कंपाउंड में नियमित रूप से दौड़, हाई जंप, लॉन्ग जंप और गोला फेंक का अभ्यास करते थे। अब पूरा मैदान पानी में डूबा है, लेकिन उनका लक्ष्य नहीं बदला है।
अभिमन्यु का कहना है कि उनका सपना सेना में जाकर देश की सेवा करना है। रास्ते में बाढ़ आई है तो तैयारी का तरीका बदलना पड़ेगा, लक्ष्य नहीं।
कोच रणजीत सोलंकी भी सुरक्षित स्थानों पर ले जाकर अभ्यर्थियों का अभ्यास जारी रखवा रहे हैं।
पानी ने मैदान डुबोया है, लेकिन इन युवाओं के हौसले नहीं। इनकी दौड़ अब ट्रैक पर नहीं, बल्कि हालात के खिलाफ है और मंजिल वही है, सेना की वर्दी।

















