


@ सोशल मीडिया पोस्ट में पुलिस के सहयोग की अपील, कहा – ‘अभी नहीं रोका तो पांच साल में खोखला हो जाएगा कहलगांव’।
प्रदीप विद्रोही
भागलपुर। जिला के कहलगांव में शहर से गांव तक कथित रूप से बढ़ते सूखा नशे के कारोबार को लेकर अब आम नागरिकों के बीच भी चिंता बढ़ती दिखाई दे रही है। इसी क्रम में ‘कहलगांव नगर परिवार’ ग्रुप में एक व्यक्ति की ओर से की गई सोशल मीडिया पोस्ट चर्चा का विषय बनी हुई है। पोस्ट में स्मैक के खिलाफ लड़ाई का संकल्प जताते हुए ईमानदार पुलिस अधिकारी तक पहुंच बनाने के लिए लोगों से मदद मांगी गई है।
पोस्ट करने वाले व्यक्ति ने लिखा कि यदि किसी व्यक्ति का किसी ईमानदार पुलिस अधिकारी से संपर्क है, तो वह कथित रूप से स्मैक की बिक्री से जुड़े लोगों और उनके ठिकानों से संबंधित जानकारी पुलिस तक पहुंचाने में सहयोग कर सकता है। हालांकि, पोस्ट में किए गए दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।

नशे के खिलाफ लड़ने का संकल्प:
सोशल मीडिया पोस्ट में नशे के खिलाफ आवाज बुलंद करते हुए कहा गया है कि उसने इस समस्या के खिलाफ लड़ने का प्रण लिया है। साथ ही ऐसे पुलिस अधिकारी से संपर्क कराने की अपील की गई है, जो मामले में निष्पक्ष और प्रभावी कार्रवाई कर सके। पोस्ट में चिंता जताई गई है कि यदि स्मैक और अन्य नशीले पदार्थों की समस्या को समय रहते नियंत्रित नहीं किया गया, तो आने वाले वर्षों में इसका गंभीर सामाजिक प्रभाव पड़ सकता है।
‘अभी नहीं रोका तो पांच साल में खोखला हो जाएगा कहलगांव’:
पोस्ट में सबसे अधिक ध्यान खींचने वाली बात नशे के भविष्य के प्रभाव को लेकर जताई गई चिंता है। इसमें कहा गया है कि ‘अगर अभी नहीं रोका गया तो पांच साल में कहलगांव खोखला हो जाएगा।’ नशे के खिलाफ नागरिक स्तर से उठी यह आवाज इस बात की ओर भी इशारा करती है कि स्थानीय स्तर पर लोग इस समस्या को लेकर चिंतित हैं। हालांकि, किसी भी व्यक्ति पर नशीले पदार्थों की बिक्री या तस्करी का आरोप लगाने से पहले पुलिस जांच और आधिकारिक पुष्टि जरूरी है।
पुलिस कार्रवाई और जागरूकता की जरूरत:
नशीले पदार्थों का अवैध कारोबार केवल कानून-व्यवस्था की समस्या नहीं, बल्कि युवाओं के भविष्य और पूरे समाज से जुड़ा गंभीर मुद्दा है। ऐसे में नागरिकों द्वारा उपलब्ध कराई जाने वाली विश्वसनीय सूचनाओं की जांच कर पुलिस को कानून के तहत कार्रवाई करनी होगी।
साथ ही, नशे के खिलाफ जागरूकता, युवाओं की काउंसलिंग और परिवार एवं समाज की सक्रिय भागीदारी भी जरूरी है। सोशल मीडिया पर सामने आई इस अपील के बाद अब देखना होगा कि पुलिस और प्रशासन इस चिंता को किस रूप में लेते हैं और नशीले पदार्थों के खिलाफ स्थानीय स्तर पर क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।

















