


प्रदीप विद्रोही
भागलपुर। विक्रमशिला सेतु 1 अक्टूबर से बंद होगा, लेकिन भागलपुर और नवगछिया के बीच आवाजाही थमने नहीं दी जाएगी। सड़क का रास्ता बंद होने के बाद अब गंगा ही वैकल्पिक मार्ग बनेगी। प्रशासन यात्री और मालवाहक जहाजों के जरिए दोनों किनारों को जोड़ने की तैयारी में जुट गया है।
सेतु के क्षतिग्रस्त हिस्से की स्थायी मरम्मत के लिए पहले बेली ब्रिज हटाया जाएगा। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने निर्माण कार्य को जनवरी 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है। यानी अक्टूबर से जनवरी तक विक्रमशिला सेतु पर यातायात बंद रहेगा और इसी अवधि में अस्थायी पुल से स्थायी मरम्मत की ओर कदम बढ़ाया जाएगा।

सात यात्री जहाजों ने दिया आवेदन:
सेतु बंदी से पहले नदी परिवहन को सक्रिय करने की तैयारी तेज हो गई है। यात्री जहाजों के संचालन के लिए अब तक सात आवेदन प्रशासन को मिल चुके हैं। मालवाहक जहाजों के लिए आवेदन की प्रक्रिया भी जारी है। 20 सितंबर के बाद प्रस्तावित जिला प्रशासन की बैठक में नदी परिवहन की व्यवस्था को अंतिम रूप दिए जाने की उम्मीद है।
सुरक्षा के लिए जहाजों पर लाइफ जैकेट, गोताखोर और सुरक्षा बलों की तैनाती की जाएगी। त्योहारों के दौरान बढ़ने वाली भीड़ को देखते हुए नदी मार्ग पर विशेष निगरानी रखने की तैयारी है।
गंगा पार होगा माल, लेकिन ओवरलोडिंग नहीं:
सेतु बंद रहने के दौरान सिर्फ यात्री ही नहीं, मालवाहक वाहन भी नदी के रास्ते पार कराए जाएंगे। बाबूपुर और हाई लेवल घाट पर ओवरलोड वाहनों की जांच होगी। जहाज संचालकों को प्रत्येक ट्रक का लोडिंग बिल जांचना होगा। वजन सीमा से ज्यादा माल मिलने पर ट्रक को गंगा पार कराने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
अस्थायी पुल की कहानी अब खत्म होने की ओर
विक्रमशिला सेतु का हिस्सा क्षतिग्रस्त होने के बाद लोगों की आवाजाही जारी रखने के लिए बेली ब्रिज तैयार किया गया था। जून में इस पर सीमित आवागमन शुरू हुआ था। अब वही अस्थायी इंतजाम हटाकर क्षतिग्रस्त हिस्से की स्थायी मरम्मत की जाएगी। इस बार चुनौती सिर्फ पुल की मरम्मत नहीं है। निर्माण एजेंसियों को जनवरी तक काम पूरा करना होगा और प्रशासन को इस दौरान भागलपुर-नवगछिया के बीच लोगों और माल की आवाजाही भी बनाए रखनी होगी।
पुल बंदी का असर टोल पर भी:
विक्रमशिला सेतु के बंद होने और बाढ़ के असर का प्रभाव एनएचएआई के बायपास टोल प्लाजा की आय पर भी पड़ा है। सेतु बंद होने के बाद टोल कलेक्शन में 79.2 प्रतिशत की गिरावट बताई गई है। बाढ़ के बाद इसमें 38.46 प्रतिशत की अतिरिक्त कमी दर्ज हुई। इसी के चलते टोल एजेंसी से प्रतिदिन ली जाने वाली राशि करीब 6.25 लाख रुपये से घटाकर 1.30 लाख रुपये कर दी गई है। इसके बावजूद एजेंसी को प्रतिदिन करीब 80 हजार रुपये तक का नुकसान उठाना पड़ रहा है।
अब अक्टूबर से जनवरी तक विक्रमशिला सेतु पर मशीनें चलेंगी और उसके समानांतर गंगा पर जहाज। एक तरफ पुल को स्थायी रूप से दुरुस्त करने की कवायद होगी, तो दूसरी तरफ नदी भागलपुर-नवगछिया के बीच संपर्क की अस्थायी जीवनरेखा बनेगी।

















