
प्रदीप विद्रोही
नवगछिया । नवगछिया पुलिस जिले के खरीक प्रखंड स्थित राघोपुर में लौटती गंगा ने एक बार फिर अपना रौद्र रूप दिखाना शुरू कर दिया है। शुक्रवार की शाम गंगा के तेज कटाव ने गंगा पार नवगछिया क्षेत्र के महादेवपुर घाट और राघोपुर पंचायत के छोटी अलालपुर के आसपास गंभीर स्थिति पैदा कर दी। स्थानीय लोगों के अनुसार, कटाव की चपेट में आकर शंकरपुर-राघोपुर रेलवे लाइन, महादेवपुर घाट और ऐतिहासिक ब्रह्म बाबा स्थान गंगा में समा गए हैं। रेलवे लाइन के पास बसे कई घर भी कटाव की भेंट चढ़ चुके हैं। भयभीत ग्रामीण अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर भाग रहे हैं। ग्रामीणों का गुस्सा मंत्री ई शैलेन्द्र के दावे, जिला प्रशासन की चुप्पी और आपदा प्रबंधन की लापरवाही को लेकर उफान पर है।
ग्रामीणों का आरोप है कि लौटती गंगा के खतरे की आशंका पहले से होने के बावजूद जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन की टीम समय रहते सक्रिय नहीं हुई। रेलवे लाइन के पास बसे कई घरों के गंगा में समा जाने से लोगों में दहशत का माहौल है।

इधर, देर शाम कटाव की सूचना मिलते ही इलाके में चीख-पुकार मच गई। महिलाएं और बच्चे घर-द्वार छोड़कर अंधेरे में ही सुरक्षित स्थानों की ओर भागने लगे। लोग टॉर्च की रोशनी में घरों में रखे जरूरी सामान तलाशते नजर आए। कटाव की भयावहता के बीच ग्रामीणों को आशंका है कि यदि गंगा का कटाव पूरी रात इसी तरह जारी रहा, तो आसपास के गांवों की सुरक्षा पर गंभीर संकट खड़ा हो सकता है। रात के अंधेरे में स्थिति और भयावह होने की आशंका जताई जा रही है।
500 मीटर तक कटाव की सूचना, अंधेरे में जान बचाने की जद्दोजहद:
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, माधोपुर स्नान घाट के पास करीब 500 मीटर तक कटाव हुआ है। कटाव का सिलसिला जारी रहने से आसपास के इलाकों में खतरा बढ़ गया है। रात के अंधेरे में स्थिति और भयावह हो गई। ग्रामीणों का कहना है कि लोग टॉर्च की रोशनी में सुरक्षित स्थानों की ओर जाने की कोशिश कर रहे हैं। बच्चों और महिलाओं की चीख-पुकार से इलाके में अफरातफरी का माहौल बन गया।ग्रामीणों को आशंका है कि यदि कटाव की रफ्तार नहीं थमी, तो लत्तीपुर-जाह्नवी चौक जाने वाला रास्ता भी प्रभावित हो सकता है। पुराना पाखर का पेड़ पहले ही गंगा में समा चुका है। अब ऐतिहासिक स्थलों और आवागमन के रास्तों पर संकट गहराने से लोगों की चिंता बढ़ गई है।
आपदा प्रबंधन की टीम नहीं पहुंचने का आरोप:

जिला परिषद सदस्य प्रतिनिधि विजय मंडल और महागठबंधन की नेत्री अर्पणा कुमारी ने आरोप लगाया कि कटाव की गंभीरता के बावजूद मौके पर आपदा प्रबंधन और संबंधित विभागों की टीम तथा जरूरी संसाधन उपलब्ध नहीं थे। उन्होंने सवाल उठाया कि लौटती गंगा के कटाव की आशंका पहले से रहने के बावजूद प्रशासन ने समय रहते पर्याप्त तैयारी क्यों नहीं की। उन्होंने पथ निर्माण मंत्री ई. शैलेंद्र से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए मंत्री पद से इस्तीफा देने की मांग की। उनका कहना है कि ऐसे संकट के समय प्रभावित लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और कटाव रोकने के लिए तत्काल प्रभावी कदम उठाना जरूरी है।















