
@ 500 से अधिक संस्कृत स्तोत्रों को आवाज दे चुकी हैं माधवी, हर महीने करीब दो करोड़ श्रोता डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सुनते हैं उनके भक्ति गीत।
प्रदीप विद्रोही
भागलपुर। कभी साधना के सुर मंदिरों और आध्यात्मिक मंचों तक सीमित रहते हैं, तो कभी वही स्वर देशभर में अपनी अलग पहचान बना लेते हैं। भागलपुर जिले के सबौर की बेटी और झारखंड के गोड्डा की बहू माधवी मधुकर झा के साथ कुछ ऐसा ही हुआ है। संस्कृत के प्राचीन स्तोत्रों को मधुर संगीत में पिरोकर लोगों तक पहुंचाने वाली माधवी की भक्ति साधना को उस समय विशेष पहचान मिली, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनकी आवाज में प्रस्तुत आदि शंकराचार्य रचित ‘भवान्यष्टकम’ का वीडियो अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर साझा किया।

प्रधानमंत्री की इस पहल से माधवी की संगीत साधना एक बार फिर चर्चा में आ गई है। शारदीय नवरात्र की षष्ठी तिथि पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मां कात्यायनी को नमन करते हुए देशवासियों के जीवन में शक्ति, साहस और सकारात्मक ऊर्जा के संचार की कामना की। इसी अवसर पर उन्होंने ‘भवान्यष्टकम’ की प्रस्तुति वाला वीडियो साझा किया। आदि शंकराचार्य द्वारा रचित यह प्रसिद्ध स्तोत्र मां भवानी के प्रति पूर्ण समर्पण, श्रद्धा और भक्ति की अभिव्यक्ति है। इसके शब्दों में भक्त का अपनी आराध्या के प्रति विश्वास और शरणागति का भाव दिखाई देता है।प्रधानमंत्री की सोशल मीडिया पोस्ट के साथ इस स्तोत्र की प्रस्तुति को भी व्यापक दर्शक वर्ग तक पहुंचने का अवसर मिला। साझा किए गए वीडियो के थंबनेल और क्रेडिट में गायिका माधवी मधुकर झा का नाम और तस्वीर दिखाई देने की जानकारी दी गई है।
प्रधानमंत्री द्वारा अपनी प्रस्तुति साझा किए जाने पर माधवी मधुकर झा ने भावुक प्रतिक्रिया व्यक्त की।उन्होंने कहा, ‘आदरणीय प्रधानमंत्री जी ने मेरी आवाज सुनी और उसे देशवासियों के साथ साझा किया। मेरे जीवन और संगीत साधना के लिए इससे बड़ा तोहफा और सम्मान कुछ नहीं हो सकता।’ माधवी ने इस उपलब्धि को मां दुर्गा की कृपा से जोड़ते हुए कहा कि यह सब माता रानी की असीम अनुकंपा का फल है।
माधवी मधुकर झा की प्रस्तुतियों में दुर्गा सप्तशती और आदि शंकराचार्य रचित विभिन्न स्तोत्रों सहित कई आध्यात्मिक रचनाएं शामिल हैं। कठिन संस्कृत शब्दों और गहन आध्यात्मिक भावों से युक्त इन रचनाओं को मधुर संगीत के माध्यम से प्रस्तुत करना उनकी साधना का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, माधवी अब तक 500 से अधिक स्तोत्रों को स्वर दे चुकी हैं। संस्कृत संगीत के प्रति अपनी रुचि और समर्पण को व्यापक मंच प्रदान करने के लिए उन्होंने ‘मधुरम वृंद’ नाम से एक संस्कृत संगीत बैंड भी स्थापित किया है।उनका प्रयास संस्कृत के श्लोकों को केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित रखने के बजाय संगीत प्रेमियों के दैनिक जीवन और सांस्कृतिक अनुभवों का हिस्सा बनाना है।
यह आंकड़ा संस्कृत भक्ति संगीत के प्रति डिजिटल मंचों पर मौजूद व्यापक रुचि की ओर संकेत करता है। खासकर ऐसे समय में, जब नई पीढ़ी संगीत सुनने के लिए मोबाइल फोन और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल कर रही है, माधवी की प्रस्तुतियां प्राचीन आध्यात्मिक रचनाओं को नए श्रोताओं तक पहुंचाने का माध्यम बन रही हैं।
माधवी मधुकर झा की प्रस्तुतियों का दायरा डिजिटल प्लेटफॉर्म तक ही सीमित नहीं रहा है। वह अयोध्या में राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा से जुड़े उत्सवों, काशी विश्वनाथ धाम और मिथिलांचल के विभिन्न सांस्कृतिक आयोजनों सहित अनेक मंचों पर प्रस्तुति दे चुकी हैं। इसके अलावा, अलग-अलग राज्यों के स्थापना दिवस समारोहों में भी उन्हें अपनी कला प्रस्तुत करने का अवसर मिला है।
माधवी मधुकर झा की उपलब्धि भागलपुर जिले के लिए भी विशेष महत्व रखती है। उनका मायका भागलपुर के सबौर में है। वह यूको बैंक के एक सेवानिवृत्त अधिकारी की पुत्री हैं। उनका विवाह झारखंड के गोड्डा जिले के पोड़ैयाहाट प्रखंड अंतर्गत डांडै गांव निवासी पीयूष झा से हुआ है। वर्तमान में वह अपने परिवार के साथ दिल्ली में रहकर संगीत साधना को आगे बढ़ा रही हैं।
माधवी मधुकर झा की संगीत यात्रा का एक उल्लेखनीय पहलू यह है कि उनका काम संस्कृत के प्राचीन साहित्य को वर्तमान समय के श्रोताओं से जोड़ने पर केंद्रित है। संस्कृत के अनेक स्तोत्रों में शब्दों की जटिलता और उनके गहन अर्थ के कारण सामान्य श्रोताओं के लिए उनसे सहज रूप से जुड़ना कभी-कभी कठिन हो सकता है। ऐसे में संगीत इन रचनाओं को सुनने और उनके भावों से परिचित होने का एक प्रभावी माध्यम बनता है।माधवी इसी दिशा में अपनी साधना को आगे बढ़ा रही हैं। उनकी प्रस्तुतियां भक्ति संगीत के माध्यम से आध्यात्मिक साहित्य के संरक्षण और प्रसार के प्रयास का हिस्सा हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उनके स्वर में प्रस्तुत ‘भवान्यष्टकम’ का वीडियो साझा किया जाना इसी यात्रा का एक महत्वपूर्ण प्रसंग बन गया है।
















