
@ बल्लीकित्ता गांव के दंपती ने वर्षों के संघर्ष के बाद हासिल की स्थायी सहायक प्रोफेसर बनने की उपलब्धि, अतिथि और संविदा शिक्षक के रूप में सेवाएं देने के बाद मिली सफलता।
प्रदीप विद्रोही
भागलपुर/बांका। संघर्ष की राह लंबी हो, मंजिल का इंतजार कठिन हो और भविष्य अनिश्चित नजर आए, तब भी अगर हौसले बुलंद हों तो सफलता की नई इबारत लिखी जा सकती है। बांका जिले के अमरपुर प्रखंड अंतर्गत बल्लीकित्ता गांव के दंपती डॉ. अमित कुमार और संयुक्ता भारती ने कुछ ऐसी ही मिसाल पेश की है। बिहार विश्वविद्यालय सेवा आयोग की स्थायी सहायक प्रोफेसर परीक्षा में पति-पत्नी दोनों ने सफलता हासिल कर अपनी मेहनत, धैर्य और अकादमिक समर्पण का परिचय दिया है। अनारक्षित श्रेणी में डॉ. अमित कुमार ने आठवां, जबकि संयुक्ता भारती ने 24वां स्थान प्राप्त किया है।इस उपलब्धि की खास बात यह है कि दोनों ने उच्च शिक्षा के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाने के लिए लंबा संघर्ष किया। अतिथि और संविदा शिक्षक के रूप में सेवाएं देने के दौरान उन्होंने अपने लक्ष्य से नजरें नहीं हटाईं।

अलग-अलग शैक्षणिक सफर, मंजिल एक:
डॉ. अमित कुमार की शैक्षणिक यात्रा की शुरुआत एसएनजे हाई स्कूल, बेलहर से हुई, जहां से उन्होंने मैट्रिक की परीक्षा उत्तीर्ण की। इसके बाद उन्होंने भागलपुर के टीएनबी कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई पूरी की। उच्च शिक्षा के प्रति अपनी रुचि को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग से स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल की और इसी विभाग से पीएचडी भी पूरी की। वहीं, संयुक्ता भारती की शैक्षणिक यात्रा माउंट कार्मेल स्कूल से शुरू हुई। इसके बाद एसएम कॉलेज, भागलपुर से स्नातक की डिग्री प्राप्त की। उन्होंने तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग से स्नातकोत्तर और पीएचडी की पढ़ाई पूरी की। वर्ष 2010 में उन्होंने राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (NET) भी उत्तीर्ण की। दोनों की शैक्षणिक पृष्ठभूमि और इतिहास विषय के प्रति समर्पण ने उन्हें उच्च शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ने की मजबूत नींव प्रदान की।
अतिथि शिक्षक से स्थायी प्रोफेसर बनने तक का संघर्ष
डॉ. अमित कुमार ने अपने शैक्षणिक करियर में झारखंड के नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय में वर्ष 2018 में संविदात्मक सहायक प्रोफेसर के रूप में सेवाएं दीं। इसके बाद वर्ष 2019 में उन्होंने तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के मारवाड़ी कॉलेज में अतिथि सहायक प्रोफेसर के रूप में अध्यापन किया। लगातार शैक्षणिक गतिविधियों से जुड़े रहते हुए उन्होंने स्थायी नियुक्ति के अपने लक्ष्य के लिए प्रयास जारी रखे।
दूसरी ओर, संयुक्ता भारती ने वर्ष 2018 में एसएम कॉलेज, भागलपुर से अतिथि सहायक प्रोफेसर के रूप में अध्यापन की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के एमएलएस कॉलेज और मुंगेर विश्वविद्यालय के केएसएस कॉलेज में भी अपनी सेवाएं दीं। वर्तमान में वह बांका जिले के राजकीय डिग्री महाविद्यालय, फुल्लीडुमर में सहायक प्रोफेसर के रूप में कार्यरत हैं।
















