
@ दो माह से धीमी गति से चल रहा जर्जर पुल का मरम्मत कार्य, आमरण अनशन और मशाल जुलूस से जताया जा रहा आक्रोश।
प्रदीप विद्रोही
भागलपुर। राष्ट्रीय राजमार्ग-80 (NH-80) के पुनर्निर्माण के दौरान कहलगांव से सटे जर्जर कुआ नाला पुल की अनदेखी का मुद्दा अब गंभीर रूप लेता जा रहा है। जिस पुल की स्थिति को राजमार्ग निर्माण के समय ही प्रमुखता से उठाया जाना चाहिए था, उसे लेकर अब लोग आंदोलन करने को मजबूर हैं। स्थानीय स्तर पर यह सवाल उठ रहा है कि यदि NH-80 के पुनर्निर्माण के दौरान ही सामूहिक रूप से आवाज उठाई गई होती और पुल की जर्जर स्थिति को दूर करने की मांग की गई होती, तो शायद आज लोगों को इस तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता।

विडंबना यह है कि पुल की समस्या को लेकर समय रहते व्यापक पहल नहीं हुई, लेकिन अब जब इस जर्जर पुल से खतरे की घंटी बजी तो इसपर वाहनों की आवाजाही को रोकते हुए इसकी मरम्मत का काम चल रहा है और आवाजाही की समस्या जैसे स्कूली बच्चों, चौपट होते कहलगांव मंडी के व्यवसाय सहित अन्य समस्याएं लोगों को प्रभावित कर रही है तो विरोध-प्रदर्शन तेज हो गए हैं। आमरण अनशन से लेकर मशाल जुलूस तक के जरिए लोग अपना आक्रोश जाहिर कर रहे हैं। आंदोलनकारियों की मांग है कि पुल की मरम्मत का काम तेजी से पूरा किया जाए, ताकि लोगों को आवागमन की परेशानी से राहत मिल सके।
दो माह से चल रहा मरम्मत कार्य, गति पर उठ रहे सवाल
कुआ नाला पुल की जर्जर स्थिति को दूर करने के लिए पिछले करीब दो माह से मरम्मत का कार्य जारी है। हालांकि, काम की धीमी गति को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी है। पुल से जुड़ी समस्या का स्थायी समाधान नहीं होने के कारण क्षेत्र के लोगों को आवागमन को लेकर अनिश्चितता का सामना करना पड़ रहा है। इसी वजह से आंदोलन का दायरा बढ़ता दिखाई दे रहा है।
स्थानीय लोगों का मानना है कि राष्ट्रीय राजमार्ग के पुनर्निर्माण के समय ही पुल की तकनीकी स्थिति का समुचित आकलन कर आवश्यक मरम्मत या पुनर्निर्माण की व्यवस्था की जानी चाहिए थी। यदि उस समय इस मुद्दे पर सामूहिक पहल होती, तो संभव है कि मौजूदा संकट को टाला जा सकता था। हालांकि, उस समय पुल की स्थिति को लेकर किस स्तर पर क्या कार्रवाई हुई थी, यह संबंधित विभागीय अभिलेखों से ही स्पष्ट हो सकेगा।

एसडीएम ने दिया काम में प्रगति का भरोसा
इस बीच, कहलगांव एसडीएम ने पुल की मरम्मत को लेकर जानकारी देते हुए बताया कि पुल के ऊपरी हिस्से को दुरुस्त कर लिया गया है। उन्होंने बताया कि पुल का क्षतिग्रस्त बेयरिंग बेंगलुरु से एक-दो दिनों में आने की उम्मीद है। बेयरिंग उपलब्ध होने के बाद पुल के सभी बेयरिंग बदले जाएंगे।
उन्होंने आगे बताया कि बेयरिंग बदलने के बाद जर्जर गार्डर को वेल्डिंग के जरिए मजबूत करने का काम किया जाएगा। मरम्मत के इन चरणों को पूरा करने के बाद पुल की स्थिति के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
एसडीएम के अनुसार, उम्मीद है कि छठ पर्व से पहले पुल पर आवाजाही शुरू हो जाएगी। इस आश्वासन से लोगों को राहत मिलने की उम्मीद जगी है। हालांकि, पुल पर यातायात बहाल करने की अंतिम तारीख मरम्मत कार्य पूरा होने और तकनीकी सुरक्षा सुनिश्चित किए जाने पर निर्भर करेगी।
आंदोलन के बीच सुरक्षा और समयबद्ध मरम्मत की मांग
पुल की मरम्मत में हो रही देरी को लेकर आंदोलन कर रहे लोगों के बीच अब यह सवाल प्रमुखता से उठ रहा है कि आखिर कब तक उन्हें परेशानी झेलनी पड़ेगी। आमरण अनशन और मशाल जुलूस जैसे विरोध कार्यक्रम इस बात के संकेत हैं कि लोग जल्द समाधान चाहते हैं।
स्थानीय लोगों की अपेक्षा है कि संबंधित विभाग मरम्मत कार्य की नियमित निगरानी करे और तकनीकी प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए आवश्यक कदम उठाए। साथ ही, पुल को यातायात के लिए खोलने से पहले उसकी सुरक्षा का समुचित तकनीकी परीक्षण सुनिश्चित किया जाए, ताकि भविष्य में किसी तरह की दुर्घटना की आशंका न रहे।















