
बिहपुर मध्य पंचायत के वार्ड संख्या-01 में स्थापित मां के दरबार में उमड़ती है श्रद्धालुओं की आस्था, 8 नवंबर को होगी पूजा और 9 नवंबर को प्रतिमा का विसर्जन
नवगछिया। बिहपुर प्रखंड के बिहपुर मध्य पंचायत के वार्ड संख्या-01 में स्थित मां छोटी वाम काली मंदिर का इतिहास लगभग 250 वर्ष पुराना है। इस प्राचीन मंदिर के प्रति क्षेत्र के लोगों में गहरी आस्था और विश्वास है। स्थानीय लोगों का मानना है कि मां के दरबार में सच्चे मन से मांगी गई हर मुराद देर-सबेर अवश्य पूरी होती है। यही वजह है कि यहां दूर-दराज के क्षेत्रों से भी श्रद्धालु पूजा-अर्चना और दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को मंदिर में मां छोटी वाम काली की पूजा वैदिक एवं तांत्रिक विधि-विधान से की जाती है। मंदिर के प्रधान पुजारी मड़वा निवासी चंद्रशेखर झा हैं। उनके पूर्वज भी लंबे समय से मंदिर में पूजा-अर्चना करते आ रहे हैं। इस प्रकार पीढ़ियों से चली आ रही पूजा की परंपरा आज भी पूरी श्रद्धा के साथ निभाई जा रही है।
पूजा समिति के प्रधानमंत्री अरुण साह कसेरा, सचिव जागेश्वर मोदी एवं कोषाध्यक्ष अनिल कसेरा ने बताया कि मंदिर के विकास और पूजा आयोजन में टोला सहित पूरे गांव के लोगों का भरपूर सहयोग मिलता है। ग्रामीणों के सामूहिक प्रयास और श्रद्धालुओं की आस्था से प्रत्येक वर्ष पूजा का आयोजन भव्य तरीके से किया जाता है। मंदिर में पहली बलि सार्वजनिक रूप से दिए जाने की परंपरा भी वर्षों से चली आ रही है।
इस वर्ष 8 नवंबर को मां काली की पूजा आयोजित की जाएगी, जबकि 9 नवंबर को प्रतिमा का विसर्जन किया जाएगा। प्रतिमा का विसर्जन थाना घाट सरोवर में किया जाता है। पूजा के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा और सेवा का भी विशेष ध्यान रखा जाता है।
पूजा समिति के सदस्य अनिल कसेरा, ज्ञानदेव कुमार मोदी, श्रवण मोदी, विक्की कसेरा, राजेश कुमार साह, मिलन कसेरा, अमर कसेरा, गौतम कसेरा, सुजीत पोद्दार, अनिल पोद्दार, सुमो मोदी, छोटू कसेरा एवं किसान कसेरा सहित अन्य ग्रामीण आयोजन की तैयारियों में सक्रिय भूमिका निभाते हैं। समिति के सदस्यों द्वारा श्रद्धालुओं के बीच शरबत, फल एवं अन्य प्रसाद का वितरण भी किया जाता है।

लगभग ढाई सौ वर्षों की परंपरा, ग्रामीणों की एकजुटता और मां के प्रति अटूट श्रद्धा के कारण छोटी वाम काली मंदिर आज भी क्षेत्र की धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। हर वर्ष काली पूजा के अवसर पर यहां भक्तिमय माहौल रहता है और श्रद्धालु मां का आशीर्वाद प्राप्त करने पहुंचते हैं।















