5
(2)

@ कटाव वाले इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए प्रशासन ने साफ संदेश दिया है – खतरा बढ़े तो घर और सामान से पहले जान बचाएं। लोगों को जरूरी घरेलू सामान और मवेशियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने की सलाह दी गई है।

प्रदीप विद्रोही
भागलपुर। करीब दस साल बाद राघोपुर में गंगा फिर अपना रौद्र रूप पल-पल दिखा रही है। पिछले 11 दिनों से खैरपुर मार्जिनल बांध से जमींदारी बांध और रेलवे लाइन के बीच करीब 300-400 मीटर के क्षेत्र में अलग-अलग स्थानों पर कटाव जारी है। नदी की धार जिस तरह जमीन को काट रही है, उससे अब गंगा की नई धारा बनने की आशंका प्रबल हो गई है। ऐसा हुआ तो राघोपुर में बड़ी तबाही का खतरा पैदा हो सकता है।
कटाव की गंभीरता को देखते हुए ऊर्जा, पथ निर्माण और जल संसाधन विभाग की टीमें लगातार बचाव कार्य में जुटी हैं। मुख्यमंत्री स्तर से भी स्थिति की निगरानी की जा रही है। जल संसाधन विभाग के सचिव डॉ. चंद्रशेखर सिंह और पूर्व सचिव संतोष कुमार मल्ल कटाव स्थल का जायजा लेकर बचाव कार्यों की समीक्षा कर चुके हैं।
कटाव रोकने के लिए सुपौल के निर्मली से परक्यूपाइन और सीआई वायर से तैयार जालियां राघोपुर लाई गई हैं। इसके अलावा सोल कटिंग, जियो बैग, मेगा बैग और बांस पाइलिंग सहित कई तकनीकों से नदी की धार को नियंत्रित करने की कवायद चल रही है। कटाव को रोकने के लिए गंगा में बदस्तूर जियो बैग डाले जा रहे हैं लेकिन ये प्रयास फिलहाल कारगर साबित नहीं हो रहे हैं।
बाढ़ और कटाव से पीड़ित राघोपुर पंचायत के छोटी अलालपुर, शंकरपुर और नन्हकार टोलों में बाढ़ का खतरा बेहद गंभीर हो गया है। हालात इस कदर चिंताजनक हैं कि कई ग्रामीण अपने घर खाली कर सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन करने को मजबूर हो रहे हैं। गंगा का रौद्र रूप कुछ इस तरह देखने को मिल रहा है कि बड़ी नावों से लेकर बड़े जहाज तक उसकी चपेट में आ रहे हैं। भंवर यानी घिरनी का प्रभाव इतना तेज है कि इन नावों और जहाजों में लगे शक्तिशाली इंजन भी बेदम साबित हो रहे हैं। नाव और जहाज घंटों तक भंवर में फंसे रहकर चक्कर लगाते रहते हैं।
मालूम हो कि प्रभावित तीनों टोलों की आबादी लगभग साढ़े पांच हजार है और यहां करीब 1,200 घर हैं। ये परिवार दैनिक मजदूरी, खेती और अन्य छोटे व्यवसायों के जरिए अपना जीवन-यापन करते हैं। तिनका-तिनका जोड़कर इन लोगों ने अपना घर बसाया था। स्थिति फिलहाल इतनी भयावह हो चुकी है कि ग्रामीण अपने हाथों से अपना आशियाना उजाड़कर सुरक्षित ठिकानों की ओर जाने को मजबूर हैं।
जिला परिषद अध्यक्ष बीपीन मंडल कहते हैं कि मौजूदा स्थिति बेहद गंभीर है। राघोपुर स्थित पुराना प्रोटेक्शन बांध कट चुका है। पुराने रेलवे बांध में भी कटाव जारी है। इस बांध के कटने के बाद खरीक और बिहपुर की करीब दो से ढाई लाख की आबादी प्रभावित हो सकती है। वर्ष 2008 में भी इस तरह की भीषण स्थिति देखी गई थी। बचाव कार्य लगातार जारी है। गंगा की धारा को नियंत्रित करने के लिए तमाम प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन गंगा रुकने का नाम नहीं ले रही है। कटाव बदस्तूर जारी है।
इधर, तीनों टोलों में रहने वाले लोगों को तत्काल राहत और सुरक्षा की आवश्यकता है। लगातार बढ़ते बाढ़ के खतरे के बीच ग्रामीणों के सामने जान-माल की सुरक्षा, भोजन, पीने के पानी और सुरक्षित आश्रय की गंभीर समस्या उत्पन्न हो सकती है।
यह सामान्य स्थिति नहीं, बल्कि आपात स्थिति है।


ग्रामीण त्रिलोकी नाथ दिवाकर सहित दर्जनों पीड़ितों ने बिहार सरकार और जिला प्रशासन से विशेष आग्रह किया है कि छोटी अलालपुर, शंकरपुर और नन्हकार की गंभीर स्थिति का तत्काल संज्ञान लिया जाए। राहत एवं बचाव दल भेजकर ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए और जरूरतमंद परिवारों को तत्काल वास्तविक सहायता उपलब्ध कराई जाए। समय रहते कार्रवाई जरूरी है, क्योंकि ग्रामीण पहले ही अपने घर छोड़कर पलायन करने को मजबूर हो रहे हैं।
इधर, कटाव वाले इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए प्रशासन ने साफ संदेश दिया है – खतरा बढ़े तो घर और सामान से पहले जान बचाएं। लोगों को जरूरी घरेलू सामान और मवेशियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने की सलाह दी गई है।

Aapko Yah News Kaise Laga.

Click on a star to rate it!

Average rating 5 / 5. Vote count: 2

No votes so far! Be the first to rate this post.

Share: